बड़ी बात है अमित शाह!

सन्‍ 2019 का भारत मतलब अमित शाह है, अमित शाह का एजेंडा है। याद करे सन 2014 के भारत को! प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने कितनी तरह की योजनाएं, जुमले, उत्सव, संकल्प दिखलाएं थे। स्वच्छ भारत, योगमय भारत, मैक इन इंडिया, स्टेंडअप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्कील इंडिया, जनधन योजना, फसल बीमा, किसान पेंशन, किसान सम्मान निधी, सांसद आदर्श ग्राम योजना, मुद्रा योजना, नमामी गंगे, नौटबंदी, जीएसटी आदि दर्जनों, योजनाओं- जुमलों के साथ नरेंद्र मोदी ने अपना और अपनी सरकार का ब्रांड बनाया था।

अब जरा 2019 में शपथ के बाद के गुजरे वक्त पर गौर करें? नरेंद्र मोदी की एक नई योजना, एक नया जुमला याद नहीं आएगा! (पांच ट्रिलियन की इकॉनोमी बनाने का जुमला अपवाद) नई सरकार के गठन के बाद के पहले संसद सत्र में बजट भी बिना छाप वाला था तो मानसून और ताजा शीतकालीन सत्र भी क्या नैरेटिव लिए हुए है? मौटे तौर पर लगभग सौ फिसदी गृह मंत्री अमित शाह की सक्रियता, उनके भाषणों, उनके एजेंडे में सबकुछ रंगा हुआ है!

लगता है मानों अमित शाह ने नरेंद्र मोदी को समझा दिया है कि वोट आपके नाम, आपकी योजनाओं, आपके जुमलों में स्थाई नहीं बनेंगे। यदि पुलवामा, बालाकोट स्ट्राइक और भारत-पाक, हिंदू-मुस्लिम नहीं किया होता तो सत्ता गंवा बैठते इसलिए अब मुझे काम करने दीजिए। और तभी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 की समाप्ति, राम मंदिर, एनआरसी, नागरिकता कानून का नौ महिनों में वह नैरेटिव बना है जिस पर सरकार, भाजपा निश्चित ही खम ठोंक कह सकती है कि यह है बड़ी बात!

सो मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहचान की बड़ी बात है अमित शाह! उनका एजेंड़ा कार्यकाल की पहचान हो रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में जो किया और उसे जिस मुकाम पर पहुंचाया है वह है बड़ी बात! सीबीआई-ईडी का और ज्यादा बेशर्मी से उपयोग और पी चिंदबरम का जेल जाना है बड़ी बात! राम मंदिर का फैसला आना है बड़ी बात! इस सत्र के लिए फटाफट नागरिकता संशोधन बिल बनना और आगे एनआरसी की तैयारी होना और चुपचाप बहुत होशियारी से भारत में हिंदूओं को प्रथम श्रेणी का और मुसलमान को दूसरे श्रेणी के नागरिक का बोध करवाना व धीरे-धीरे द्विराष्ट्र थ्योरी को जिंदा बनवाना है बड़ी बात!

क्या नहीं?

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