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राजा के डायमंड चोरी और रिश्ते बिगड़ने

सउदी अरब के शासक के राजमहल में एक क्रिआंग क्राई नामक नौकर काम करता था। यह महल प्रिंस फैजल बिन अहद का था। क्रिआंग क्राई राजमहल का जाना माना सेवक था और वह उस महल के किसी भी हिस्से में जा सकता था। उसने करीब 91 किलो जवाहरत चुरा कर उन्हें एक वैक्यूम क्लीनर के थैले में छिपाकर महल के बाहर निकाल लिया। बताते हैं कि चोरी किए गए इन सामानों में एक बहुचर्चित 50 कैरेट का ब्लू डायमंड भी था। इसके कारण सउदी अरब व थाईलैंड के संबंधों में इतना तनाव आ गया कि वे 30 साल तक बेहद खराब रहे।

हम बचपन से पढ़ते और मानते आए हैं कि चोरी करना बुरी बात है। हम इसे अपराध मानते हैं पर इतना बुरा अपराध नहीं मानते हैं। मगर यदि इ के कारण दो देशों के रिश्ते ही बिगड़ जाए तब? इतिहास में ऐसे मामले बहुत ज्यादा चर्चित है। एक बड़ा मामला ब्लू डायमंड अफेयर कहलाता है। यह इतना गंभीर मामला बन गया है कि इसके कारण सउदी अरब व थाईलैंड के संबंधों में इतना तनाव आ गया कि वे 30 साल तक बेहद खराब रहे। लंबे अंतराल के बाद अब दोनों देश अपने संबंध सुधारने के लिए तैयार हुए है।

यह घटना 1989 की है। उस समय सउदी अरब के शासक के राजमहल में एक क्रिआंग क्राई नामक नौकर काम करता था। यह महल प्रिंस फैजल बिन अहद का था। क्रिआंग क्राई राजमहल का जाना माना सेवक था और वह उस महल के किसी भी हिस्से में जा सकता था। उसने करीब 91 किलो जवाहरत चुरा कर उन्हें एक वैक्यूम क्लीनर के थैले में छिपाकर महल के बाहर निकाल लिया। बताते हैं कि चोरी किए गए इन सामानों में एक बहुचर्चित 50 कैरेट का ब्लू डायमंड भी था।

उसने चुराए गए हीरों व दूसरे बेशकीमती सामान को अपने देश थाइलैंड भेजा। वहां उसे इस चोरी के जवाहरात व आभूषण बेचने में दिक्कत होने लगी। इस पर उसने औने पौने दाम पर बेचना शुरु कर दिया। जब बैंकाक के एक सुनार को इस बात का पता चला तो उसने उससे बहुत कम पैसों में सारा सामान खरीद लिया। सउदी अरब की शाही पुलिस ने इस चोरी के मामले की जांच की व जांच करने वाले पुलिस अधिकारी जनरल चालोर ने क्रिआंग क्राई को गिरफ्तार कर लिया।

उससे व चोरी का माल खरीदने वाले सुनार से पूछताछ करने के बाद उन्होंने चोरी का ज्यादातर सामान जप्त कर लिया। चोर को सात साल की सजा हुई। मगर अपने अच्छे बरताव के कारण उसे तीन साल बाद रिहा कर दिया गया। सउदी अरब के शासकों ने पाया कि उनका चोरी गया आधा सामान ही मिल पाया था व इसमें से एक बेशकीमती ब्लू डायमंड (नीला हीरा) गायब था व आधे से ज्यादा जब्त किए गए हीरे नकली थे। उस समय बैंकाक के अखबारों में यह खबर छपने लगीं, कुछ आला अफसरों की बीवियों को चोरी गए जेवर पहने पाया गया है।

इससे सउदी अरब में लगा कि थाइलैंड के आला अफसर उनके चोरी गए जेवर उपयोग में ला रहे हैं। इसके बाद शाही परिवार के एक करीबी व्यापारी मोहम्मद अल रुवैली ने बैंकाक जाकर इस मामले की अपने स्तर पर जांच पड़ताल शुरु कर दी। मगर वह 12 फरवरी 1990 को लापता हो गया। आरोप है कि उसकी रहस्यमय तरीके से हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ समय पहले सउदी अरब के तीन राजनयिकों के बैंकाक से अचानक गायब हो जाने की खबरें आयी थीं। इन सभी मामले का कुछ पता नहीं चला।

सउदी सरकार ने थाईलैंड की सरकार पर लापता होने वालों की खोज करने व हत्यारों का पता लगाने के लिए कुछ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया वही दूसरी ओर चोरी के मामले की जांच करने वाले ले. जनरल चालोर पर चोरी का माल खरीदने वाले सुनार की पत्नी व बेटे की हत्या करवा देने के आरोप लगाए। थाईलैंड के सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्तूबर 2009 को ले. जनरल चालोर को मौत की सजा सुना दी। बाद में थाईलैंड के शासक के 84 वें जन्मदिन पर मौत की सजा को 50 साल की जेल की सजा में बदल दिया गया।

उसके साथ ही रहे सउदी पुलिस वालों को लंबी सजाए सुनायी गईं। इन घटनाओं से दोनों देशों के बीच संबंध काफी खराब हो गए। सउदी अरब ने अपने यहां काम करने आने वालों थाई नागरिकों को वीजा देना बंद कर दिया। दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए व अपने दूतावास बंद कर दिए। इसका बहुत बुरा असर पड़ा। बता दें कि 1989 में सउदी अरब में डेढ़ से दो लाख थाई नागरिक काम करते थे। उनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई।

इस समय वहां सिर्फ 10 हजार लोग ही काम कर रहे हैं। पहले वहां काम करने वाले थाई नागरिक हर साल करीब दो करोड़ डालर अपने देश भेजते थे। यह राशि चंद लाखों तक ही सीमित हो गई। कुछ समय पहले दोनों देशों ने अपने संबंध सामान्य बनाने का फैसला किया है। अब दोनों ही देशों में एक दूसरे के दूतावास खुल जाएंगे। वहीं इस चोरी को अंजाम देने वाले क्रिआंग क्राई ने 17 मार्च 2016 को 65 साल की आयु में भिक्षु (सन्यासी) हो जाने का फैसला करते हुए कहा कि अपनी बेईमानी के कारण खुद पर लगे दागों को मिटाने के लिए वह यह कदम उठा रहे हैं। उसका मानना है कि लापता ब्लू डायमंड एक शापित हीरा है जिसके कारण इतने लोगों की जाने गई व उसे सजा काटनी पड़ी। इसलिए वह अब भिक्षुक बन रहा है।

लगभग ऐसी ही एक घटना भारत की भी है। बात तब की है जब पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम जीवित थे। वे 63 कृष्ण मेनन मार्ग पर रहते थे। वहीं उनका जगजीवन कांग्रेस नामक दफ्तर चला करता था। उस समय जाने माने कांग्रेस नेता पंडित ब्रज मोहन जो कि जवाहरलाल नेहरु के रहते दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष व युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके थे। उनकी पार्टी में महासचिव पद संभाल रहे थे। मैं उनसे मिलने के लिए अक्सर उनके दफ्तर जाता था। वहां एक सहाय नामक सज्जन भी थे जो मेरी बहुत आवभगत करते थे। एक दिन ब्रजमोहनजी ने मुझसे कहा कि यह सहाय तुम्हारी जाति का है। तुमसे बहुत मीठी बातें करता है पर तुम इससे सावधान रहना।

उसके बात उन्होंने मुझे एक किस्सा सुनाया। जब देश आजाद हुआ तब त्रिभुवन नेपाली राजा हुआ करते थे व नेपाल का प्रधानमंत्री शमशेर बहादुर राणा जिसने राजा को लगभग अपने कब्जे में रखा हुआ था। उन्होंने नेहरु को सारी बात बताते हुए उससे छुटकारा दिलवाने को कहा। इस पर नेहरुजी ने एक योजना तैयार की। इसके तहत भारत को राजा को वहां से निकालने के लिए एक विमान भेजना था। विमान वहां पहुंच जाने पर राजा अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए वहां से घर से निकलते व सीधे हवाई अड्डे आकर विमान में सवार होकर भारत आ जाते। उस समय चंद्रशेखर प्रताप नारायणसिंह नेपाल स्थित भारतीय दूतावास में राजदूत थे। काठमांडू स्थित दूतावास वहां का सबसे बड़ा करीब 250 एकड़ में फैला दूतावास है।

तय योजना के हिसाब से सब कुछ हुआ व राजा अपने परिवार समेत खाना ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े बड़े डब्बों में घर के जेवरात, हीरे व मोती भर के हवाई अड्डे पहुंच गए। तब सहाय भी उन्हें बचाने वालों लोगों में शामिल था। जब राजा भारत पहुंचे तो उन्होंने देखाा कि उनके सामान में से वह डब्बा गायब था जिसे कीमती हीरे जवाहरत भरे हुए थे। उन्होंने सहाय से काफी पूछताछ भी की पर सहाय ने अपनी अनभिज्ञनता जतायी। राजा ने यह बात नेहरुजी को भी बताई पर उन्होंने कुछ नहीं किया। बाद में हालात सामान्य होने पर जब त्रिभुवन अपने देश वापस लौटे तो उन्होंने गुस्से में आकर सहाय को अवांछित घोषित करते हुए उसके नेपाल में प्रवेश पर रोक लगा दी जो कि सहाय पर ताउम्र जारी रही। आज सहाय व त्रिभुवन दोनों ही दुनिया में नहीं है।

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