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घर संभला रहे तो ठीक

भारत में अगर देश के अंदर सभी समुदायों के बीच सद्भाव बना रहे और इसे मजबूत करने के कदम उठाए जाएं, तो विदेशों में बैठे कुछ मुट्ठी भर लोग भारत की अखंडता के लिए खतरा पैदा नहीं सकते।

कनाडा में एक अलगाववादी सिख संगठन ने कथित खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह का आयोजन किया। संगठन का दावा है कि इसमें हजारों सिखों ने भाग लिया। कथित जनमत संग्रह का नतीजा क्या रहा या यह कब घोषित होगा, इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं मिल सकी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो दिखाते हैं कि खालिस्तान का पीला झंडा लिए पुरुष और महिलाएं एक मतदान केंद्र के सामने लाइन लगाए खड़े हैं। लेकिन वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी है। इस बीच कनाडा सरकार के इस कथित जनमत संग्रह के आयोजन की इजाजत देने को लेकर भारत और कनाडा के संबंधों में कड़वाहट और बढ़ गई है। भारत ने इस मतदान की और इसकी इजाजत देने के लिए कनाडा सरकार की कड़ी निंदा की है। पिछले हफ्ते भारत ने इस बारे में एक तीखा बयान जारी किया था और कनाडा की सरकार से इस मतदान के आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था। लेकिन कनाडा सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कनाडा सरकार ने यह जरूर कहा कि वह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती है।

लेकिन कनाडा सरकार के सूत्रों ने कहा कि इस विषय पर कनाडा का रुख बहुत पुराना है। कनाडा सरकार की राय में जनमत संग्रह कराना कोई अपराध नहीं है, जिसके लिए सजा तय हो। जाहिर है, दुनिया के अलग-अलग देशों की सरकारें अपने हित, अपने अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों और अपने विचारों के मुताबिक ऐसे मामलों पर रुख तय करती हैँ। भारत में उसके बीच ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। भारत जो कर सकता है, वो यह है कि देश के अंदर सभी समुदायों और संप्रदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने और इसे मजबूत करने के कदम उठाए जाएं। अगर ऐसा हो, तो विदेशों में बैठे कुछ मुट्ठी भर लोग भारत की अखंडता के लिए खतरा पैदा नहीं सकते। क्या यह सिर्फ संयोग है कि विदेशों में कथित खालिस्तान का मुद्दा फिर उस समय जिंदा हुआ है, जब भारत में सामुदायिक अविश्वास बढ़ने की चर्चा ने जोर पकड़ा है? सबक यह है कि अगर अपना घर संभला रहे, तो विदेशी ताकतें हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी।

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