राहत में कोताही क्यों?

क्या कोरोना जैसे असाधारण संकट के समय सरकारी मशीनरी उसी अनुपात में काम नहीं कर रही है, जितना बड़ा ये संकट है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित कहा है कि हमें जान और जहान दोनों की चिंता करनी होगी। मगर सरकार ने “जहान” की जो चिंता की, वह उसकी मशीनरी में प्रतिबिंबित नहीं हुआ है। मसलन, अपने पहले राहत पैकेज में वित्त मंत्री ने किसानों को पीएम-किसान के तहत अगली किश्त का तुरंत भुगतान करने का एलान किया। कोरोना वायरस के कारण उपजे संकट से राहत देने के लिए पिछले महीने 26 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पैकेज की घोषणा की थी। इसके तहत साल 2020-21 के पीएम-किसान की पहली किस्त ‘तत्काल प्रभाव’ से 8.69 करोड़ किसानों को दी जानी थी। मगर इस पैकेज की घोषणा के दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी डेढ़ करोड़ से ज्यादा किसानों को पीएम किसान की पहली किस्त के 2,000 रुपए नहीं मिले थे। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की तरफ से एक आरटीआई याचिका पर एक वेबसाइट को मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 11 अप्रैल 2020 तक में 7.1 करोड़ किसानों को ही पहली किस्त का लाभ मिला था। इसका मतलब हुआ कि 1.59 करोड़ किसानों को तब तक पीएम-किसान की पहली किस्त मिलनी बाकी थी। मंत्रालय ने बताया कि 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद से 15,400 करोड़ की पीएम-किसान राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसमें से 1,675 करोड़ रुपए पिछले साल के हैं। 13,726 करोड़ रुपए साल 2020-21 के हैं। जब सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की, तभी इस ओर ध्यान दिलाया गया था कि पीएम-किसान का ये 2,000 रुपया कोई अलग से आवंटित राशि का हिस्सा नहीं है। बल्कि तय नियम के मुताबिक अप्रैल के पहले हफ्ते में इस राशि को वैसे भी किसानों के खाते में भेजा जाना था।

पीएम-किसान योजना के तहत एक साल में तीन किस्तों के जरिए 2,000-2,000 रुपये किसानों के खाते में डालने का प्रावधान है। यह सच है कि पहले के मुकाबले इस बार काफी तेजी से किसानों के खाते में पैसे डाले गए। वरना पहले की कुछ किश्तें अभी भी बकाया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पीएम किसान के तहत देश में कुल 14.5 करोड़ अनुमानित लाभार्थी हैं। इसमें से राज्यों ने अभी तक कुल 9.89 करोड़ किसानों की ही जानकारी केंद्र को भेजी है। यानी लगभग पांच करोड़ किसान वैसे भी इस योजना के लाभ से बाहर हैं। इस संकट के समय जरूरत ऐसे लाभार्थियों तक तीव्र गति से लाभ पहुंचाने की है। वरना, भारत में गहराता भूख का संकट काबू से बाहर निकल सकता है।

One thought on “राहत में कोताही क्यों?

  1. वित्त मंत्री ने घोषणा की लेकिन मुझे अभी तक नहीं मिला

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