Caste system in America अमेरिका में जाति प्रथा!
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अमेरिका में जाति प्रथा!

Caste system in America

कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के डेविस कैंपस में जाति को अब आधिकारिक रूप से भेदभाव की नीति में शामिल किया गया है। इसके पहले वहां अनेक छात्रों ने इस बारे में शिकायत की थी। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक बीते सितंबर में यूनिवर्सिटी के इस कैंपस की नीतियों में संशोधन किया गया।

कहा जाता है कि भारत के लोग जहां पहुंचें, जातिवाद वहां पहुंच जाता है। लंबे समय तक लोग ऐसी बातें बातचीत में करते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों से ये मसला अमेरिका ऐसा गरमाया कि अब वहां जाति प्रथा को प्रतिबंधित करने के कदम उठाने की शुरुआत हो गई है। कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के डेविस कैंपस में जाति को अब आधिकारिक रूप से भेदभाव की नीति में शामिल किया गया है। इसके पहले वहां अनेक छात्रों ने शिकायत की थी कि उन्हें यूनिवर्सिटी में जाति के कारण भेदभाव झेलना पड़ा है। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक बीते सितंबर में यूनिवर्सिटी के इस कैंपस की नीतियों में संशोधन किया गया। नए नियमों के तहत अब वे छात्र या अध्यापक आधिकारिक रूप से शिकायत दर्ज करवा सकेंगे, जिन्हें यह महसूस होगा कि उनके साथ उनकी जाति के कारण भेदभाव हो रहा है। एक अमेरिकी अखबार के मुताबिक इस कैंपस के कई छात्रों ने वहां के नियमों में बदलाव की मांग उठानी तब शुरू की जब उन्होंने देखा कि चैट ग्रुप में लोग जाति के आधार पर मजाक उड़ाने वाले मीम भेज रहे हैं। साथ ही देखा गया कि वहां दक्षिण एशियाई लोग एक दूसरे की जाति पूछ रहे हैं।

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ये मामला सबसे पहले 2015 में सामने आया था। तब नेपाल से अमेरिका गए एक छात्र ने शिकायत की कि उसके परिजनों को कई बार नेपाल में मारपीट तक का सामना करना पड़ा था, क्योंकि वे कथित निम्न जाति के थे। लेकिन उसने कभी नहीं सोचा था कि अमेरिका में भी उसे जातिगत भेदभाव सहना होगा। उस छात्र ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि अन्य दक्षिण एशियाई लोगों के साथ संपर्क के दौरान रेस्तराओं से लेकर सामुदायिक कार्यक्रमों तक में उसे जाति की याद दिलाई जाती रही। उसके बाद से अमेरिका में जाति प्रथा की जब तब चर्चा होती रही। कई जगहों पर छात्रों के एक समूह ने खुद को संगठित करना शुरू किया। जातिवाद विरोधी एक एसोसिएशन की स्थापना भी हुई। इसकी शाखाएं आज 23 परिसरों में हैँ। लेकिन नियमों में बदलाव अभी सिर्फ डेविस स्थित कैंपस ने किया है। लेकिन इससे अभियान चलाने वाले छात्र खुश हैँ। उनका कहना है कि अमेरिका में जातिगत भेदभाव की समस्या को स्वीकार किए जाने की तरफ एक बड़ा कदम है। इससे यह संदेश गया है कि यह एक समस्या है, जिससे निपटने का वक्त आ चुका है।

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