चीन को सच बर्दाश्त नहीं

चीन में यह नई बात नहीं है। लेकिन जिस समय चीन अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों के निशाने पर है, उस समय सामान्य अपेक्षा यही थी कि चीन ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिससे उसकी छवि और खराब हो। लेकिन इस घटना से साफ होता है कि चीन इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं करता कि बाकी दुनिया उसके बारे में क्या सोचती है। अपने देश के नागरिकों के नागरिक अधिकारों की तो उसे कोई चिंता नहीं ही होती है। इसी बात की ये मिसाल है कि कोरोना संक्रमण के शुरुआती दिनों पर रिपोर्टिंग करने वाली सिटीजन जर्नलिस्ट को चीन की एक अदालत ने झगड़ा करने के आरोप में चार साल की सजा सुनाई दी। सिटीजन जर्नलिस्ट 37 वर्षीय झांग झान को “झगड़ा करने” और “समस्या को भड़काने” का दोषी पाते हुए चार साल की सजा सुनाई है। असल में झान ने महामारी के समय दुनिया के सामने जो तस्वीर पेश की वह बहुत ही भयानक थी। झान उन मुट्ठीभर लोगों में थीं, जिन्होंने भीड़भाड़ वाले अस्पतालों और सुनसान सड़कों की भयावह तस्वीरें दुनिया के सामने रखीं।

लेकिन इस हफ्ते शंघाई के कोर्ट ने झांग को सजा सुना दी। झांग ने साफ कहा था कि उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए सताया जा रहा है। उन्हें सजा सुनाने की घटना से इस बात की और अधिक पुष्टि हुई है कि चीन ने कोरोना संकट से जल्द नहीं निपटने की आलोचना को पुरजोर ढंग से दबाया है। चीन के वुहान से फैला वायरस एक साल में दुनियाभर में भारी तबाही मचा चुका है। कोरोना के कारण आठ करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। 17 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में कोरोना से संबंधित चीन में हो रही घटनाओं में बाकी दुनिया की स्वाभाविक दिलचस्पी है। पेशे से वकील रह चुकीं झांग इस साल एक फरवरी को अपने शंघाई वाले घर से वुहान पहुंची थीं। उन्होंने यूट्यूब पर स्थानीय नागरिकों का इंटरव्यू, कमेंट्री के साथ साथ स्थानीय शवदाहगृह का वीडियो, ट्रेन स्टेशनों, अस्पतालों और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी का वीडियो अपलोड किया था। मध्य मई में उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने इसके खिलाफ जून के आखिर में भूख हड़ताल की थी। उनके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उन्हें जबरन ट्यूब के जरिए खाना खिलाया। दिसंबर तक उनकी तबीयत बिगड़ गई। तब उन्हें रिहा किया गया। अब सजा सुना दी गई है।

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