कहां-कहां पिछड़ा अमेरिका? - Naya India
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कहां-कहां पिछड़ा अमेरिका?

एक सोच यह है कि आर्थिक मामलों में भले अमेरिका चीन से पिछड़ रहा हो, लेकिन सैनिक मामलों में उसका आज भी पूरी दुनिया पर वर्चस्व है। लेकिन अब शायद ये बात भी कमजोर पड़ रही है। ऐसी चेतावनी खुद अमेरिकी सेना के स्ट्रेटेजिक कमांड ने दी है। उसका कहना है कि अमेरिका की तुलना में चीन और रूस अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण बहुत तेजी से कर रहे हैं। उसके मद्देनजर अगर अमेरिका ने अपने परमाणु रक्षा ढांचे में तुरंत जरूरी निवेश नहीं किया, तो अपराजेय शक्ति के रूप में उसकी साख जाती रहेगी। अमेरिकी कांग्रेस की रक्षा संबंधी सुनवाई के दौरान स्ट्रेटेजिक कमांड के प्रमुख एडमिरल चार्ल्स रिचर्ड ने ये बातें टो-टूक कही। यह कमांड ही अमेरिका के परमाणु हथियारों की देखरेख करता है।

दरअसल, बाइडेन प्रशासन अभी अपने परमाणु अस्त्र नीति की समीक्षा कर रहा है। इसके तहत परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण करने पर संभावित खर्च का जायजा भी लिया जा रहा है। इसी सिलसिले में कांग्रेस में सुनवाई हुई। इसके पहले 2017 में अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय ने एक रिपोर्ट में एक अनुमान लगाया गया था। उसके मुतबिक अमेरिकी परमाणु हथियारों के पूरे आधुनिकीकरण पर 1.2 ट्रिलियन डॉलर का खर्च आएगा। तो स्ट्रेटेजिक कमांड की ओर से बताया गया कि चीन के पास अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टर मौजूद हैं। साथ ही उसके पास हथियार बनाने योग्य प्लूटोनियम की बड़ी मात्रा उपलब्ध है। इसका मतलब हुआ कि चीन जब फैसला करेगा, तब वह अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ा लेगा। रिचर्ड ने कहा कि चीन अपनी परमाणु क्षमताओं को इतनी तेजी से आधुनिक बना रहा है कि हफ्ते भर के अंदर पूरी तस्वीर बदल जाती है। इसलिए इस तथ्य का अब ज्यादा मतलब नहीं है कि अभी भी चीन के पास अमेरिका से कम परमाणु हथियार हैं। उधर रूस तेजी से अपनी परंपरागत परमाणु क्षमता के विकास और आधुनिकीकरण में जुटा हुआ है। अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित रखने की स्टार्ट संधि में तय सीमा के मुताबिक दोनों देशों के पास ऐसे लगभग 1500 हथियार हैं। चीन के पास ऐसे सिर्फ 320 परमाणु हथियार हैं। लेकिन अब अमेरिका रूस और चीन को एक साथ जोड़ कर देखता है। यह उचित भी है। इन दोनों देशों की धुरी लगातार मजबूत हो रही है। इसलिए अमेरिका चिंतित है, तो इसे स्वाभाविक ही कहा जाएगा।

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