चमगादड़ ने फैलाया है कोरोना वायरस

मैं बचपन से ही चमगादड़ व कौव्वों को गंदे पक्षियों के रूप में जनता था। इन दोनों को कोई छूना तक नहीं चाहता था। इन्हें अशुभ भी माना जाता था। कहते हैं कि कौव्वा अगर शरीर को छू ले तो परिचितो को चिट्ठियां भेजकर उस व्यक्ति के मरने की खबर दी जाती थी ताकि उनके रोने-पीटने से अशुभ असर मिट जाए। चमगादड़ तो उससे भी कई आगे था।शायद यह वजह है कि इन दोनों ही पक्षियो कोकभी किसी देवी-देवता के साथ नहीं जोड़ा गया। वैसे भी चमगादड़ भी उड़ता है मगर वह पक्षी नहीं है और उसे स्तनपायी माना जाता है। वह सूरज की रोशनी में देख नहीं सकता है व अंधेरे में आवाज के सहारे अपनी उड़ान भरते हुए शिकार करता है। हाल ही में कोरोना वायरस के कारण चमगादड़ फिर खबरों में आ गया है।

माना जाता है कि चमगादड़ के जरिए इसका वायरस आम लोगों तक चीन में पहुंचा है। चीन समेत कुछ देशों में चमगादड़ का खाने के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड व चीन में बहुत स्वादिष्ट भोजन की तरह खाया जाता है। दुनिया में कई तरह के चमगादड़ पाए जाते हैं। इनमें से 167 तरह के चमगादड़ खाए जाते हैं। दक्षिण पूर्व एशिया में सिंगापुर को छोड़कर अन्य सभी देशों में चमगादड़ स्वाद के साथ खाए जाते हैं। कुछ जगह इन्हे भूनकर खाया जाता है तो कुछ में इनका सूप व रसेदार सब्जी बनाई जाती है। फल खाने वाले चमगादड़ को चिकन का पर्याय माना जाता है। व उन्हें उनकी तरह ही खाया जाता है। इंडोनेशिया व फिलीपिंस में इनका जमकर शिकार किया गया।

फल खाने वाले चमगादडों को फाक्स बैट कहते हैं। बड़ी मात्रा में अंधेरी जगहो में रहने के कारण इनका आसानी से शिकार किया जाता है। माना जाता है कि इबोला से लेकर कोरोना वायरस तक फैलने में इनकी बहुत अहम भूमिका रही है। चीन में भी यह रोग चमगादड़ो के कारण ही फैला। हुबेई के समुद्री भोजन बेचने वाले बाजार में बड़ी तादाद में चमगादड़ बिकते हुए पाए गए थे। दुनिया में करीब 1000 तरह के चमगादड़ पाए जाते हैं।

कुछ चमगादड़ कीड़े मकौड़े, चूहे, छिपकली आदि खाते हैं जबकि कुछ फल व मछली खाते हैं। कुछ चमगादड़ तो खून पीते हैं। इन्हें वैपाया ‘वैंपायर’ चमगादड़ कहते हैं। इनके द्वारा रेबीज रोग फैलने का खतरा रहता है। यह आमतौर पर पुराने वीरान मकानों व गुफाओं में रहते हैं। फल खाने वाले चमगादड़ आकार में सबसे बड़े होते हैं। आमतौर पर एक चमगादड़ 20 साल तक जीता है। उसके दोनों हाथ शरीर के साथ एक पतली त्वचा के साथ जुड़े होते हैं जोकि उड़ने के लिए पंख का काम करती है।

बैट को उसके खाल वाले पंखों के कारण ग्रीक भाषा में बैट कहा जाता है। उसके पंख में एक अंगूठा होता है जिसमें लगे नाखून के जरिए वह पेड़ अथवा दीवार के साथ लटक जाता है। चीन में चमगादड़ो को फू कहते हैं वे उसे शुभ माना जाता है। वे कम बच्चे देते हैं। एक चमगादड़ एक साल में एक बच्चा ही पैदा करता है। इन्हें चिरोपटेग या कड़े पंखी वाला जीव कहा जाता है। चमगादड़ रंगो को भी पहचानते हैं इनमें एक प्राकृति सोनार प्रणाली होती है। इसके सहारे यह उड़ने के साथ-साथ अपने शिकार का भी पता लगाते हैं।

वैपायर बैट मनुष्य की जगह जानवरों का खून पीते हैं। यह कीड़े मकौड़े खाकर हमारी फसलो की रक्षा करते हैं। वह बीज फैलाकर फसलो की तादाद बढ़ाते हैं व अपने बच्चे को दूध पिलाते हैं। अमेरिका में इनकी गिनती लुप्तप्राय जीवों में की जाती है। चमगादड़ को पैठ छह इंच से लेकर डेढ़ मीटर तक की हो सकती है। अपना वजन कम रखते हैं इसके लिए यह बहुत जल्दी ही लगभग आधे धंटे में भोजन हजम करके अपना पेट खाली कर लेते हैं।

इनकी बीट का इस्तेमाल खाद के रूप में किया जाता है क्योंकि उनसे भारी तादाद में साल्टपीटर या पौंटेशियम नाइड्रेट होते हैं। अमेरिकी सिविल वार के दौर में गुआत्रो नामक इस बीट का इस्तेमाल लड़ाई में गन व विस्फोटक तैयार करने के लिए किया गया था। यह अपने पैरो के बल पर उल्टा लटक कर आराम करते या सोते हैं। अमेरिका व कनाड़ा में दुनिया के सबसे ज्यादा 45 प्रकार के चमगादड़ पाए जाते हैं। उल्लू व सांप उनको खाना पसंद करते हैं।

अगर चमगादड़ न होते तो तमाम फल पैदा ही नहीं होते। चमगादड़ रात में भी अपने वजन के बराबर कीड़े खा जाते हैं और फसलों की उनसे रक्षा करते हैं। साइबेरिया में रहने वाला एक चमगादड़ 41 साल का होता है वे खुद को साफ-सुथरा रखना पसंद करता है। चमगादड़ करीब 85 तरह की दवाएं पैदा करने वाले पेड़-पौधो की प्रगति में सहायक साबित होता है। वहीं हमारे वैज्ञानिक उन पर भी प्रयोग करके जीवन रक्षक दवाएं तैयार करते हैं। चमगादडों की भी इंसानों की तरह नाभि होती है। जिस चमगादड़ को दुनिया के कुछ देशों में इंसान भूनकर चाव से खा रहे हैं वहीं उनकी मौत का कारण बन रहा है। चीन में तो वह एक ऐसे रोग के वायरस हैं जोकि लोगों की मौत का कारण बन रहा है। यह प्रकृति का खेल नही तो और क्या है?

One thought on “चमगादड़ ने फैलाया है कोरोना वायरस

  1. कोराना वायरस अमेरिका का जैविक हथियार है ,जो काम ट्रेड वार नहीं कर सका ये काम ये कर रहा है ।ये सिर्फ एशियाई लोगो पर असर करता है , बच्चो और अमेरिकन लोग पर ये असर नहीं करता ।

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