जर्मनी में भी ऐसा!

जर्मनी विकसित देश है। बाकी यूरोपीय देशों की तरह वह हाल में अस्थिरता और उथल-पुथल का भी शिकार नहीं रहा है। आम तौर पर माना जाता है कि यह प्रगतिशील मूल्यों के साथ जीने वाला देश है, जहां बाहर से आए लोग भी इस परंपरा में घुलमिल गए हैँ। इसीलिए ये खबर चौंकाने वाली है कि जर्मनी में इस समय कम से कम 68,000 ऐसी महिलाएं हैं, जो खतना परंपरा की शिकार हैं। एक ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2017 से अब तक ही महिला खतना के मामलों में करीब 44 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वक्त भी कम से कम 15,000 लड़कियां इस खतरे की जद में हैं। कानूनन जर्मनी में खतने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। आखिर अचानक इन मामलों में इतना बड़ा उछाल क्यों आया? जर्मन सरकार ने आप्रवासन को इसकी बड़ी वजह बताया है। उसके मुताबिक ऐसे तमाम देशों से बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर जर्मनी में रह रहे हैं, जहां महिला खतना की परंपरा आम है। यही कारण है कि जर्मनी में इनकी तादाद में अचानक इतनी बढ़त आई है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन क्या एक विकसित और प्रगतिशील देश अपने यहां ऐसी अमानवीय और लिंगभेदी परंपरा को जारी रहने दे सकता है, असल सवाल यह है। क्या बाहर से आए लोगों पर आधुनिक न्याय के कानूनों को वहां सख्ती से लागू नहीं किया जाना चाहिए?

गौरतलब है कि जर्मन सरकार के मंत्रियों ने भी कहा है कि महिलाओं का खतना किया जाना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। यह एक ऐसा प्राचीन अपराध है, जिससे महिलाओं और लड़कियों की शारीरिक संपूर्णता और अपने यौन मामलों में खुद निर्णय लेने का अधिकार उनसे छीन लिया जाता है। यह सच है तो इसे जारी रहने क्यों दिया जा रहा है? तमाम अध्ययन दिखा चुके हैं कि इसका बुरा असर जिंदगी भर शारीरिक और मानसिक स्तर पर पीड़ितों के साथ रहता है। अब जर्मन सरकार ने स्थानीय समुदायों के स्तर पर इन मामलों को और बढ़ने से रोकने के कदम उठाने की बात कही है। वैसे जर्मनी में यह कानून है कि किसी के खतना होने का संबंधित परिवार को सजा हो सकती है। लेकिन कई लोगों को इस नियम का पता नहीं है और कई लोग डरते नहीं हैं। नतीजा यह है कि मुस्लिम बालिकाओं के साथ यह अत्याचार जारी है।

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