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टकराव का नया बिंदु

कजाखस्तान का मसला रूस और पश्चिमी देशों के बीच विवाद का नया बिंदु बन गया है। रूस के फौजी कजाखस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव के अनुरोध पर वहां गए हैँ। स्वाभाविक तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों को ये हस्तक्षेप पसंद नहीं आया है। उन्होंने सेना भेजने की वैधता पर सवाल उठाए हैं।

अमेरिका और रूस के बीच पहले से जारी तनाव के बीच कजाखस्तान टकराव का एक नया बिंदु बन गया है। कजाखस्तान में हुई व्यापक हिंसा के बाद वहां कलेक्टिव सिक्युरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (सीएसटीओ) की फौज भेजी गई। सीएसटीओ में रूस की सबसे प्रमुख भूमिका है। जाहिर है, उसके ही सबसे ज्यादा फौजी कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट तोकायेव के अनुरोध पर वहां गए हैँ। स्वाभाविक तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों को ये हस्तक्षेप पसंद नहीं आया है। उन्होंने सेना भेजने की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इसी आधार पर ये मुद्दा उभरा कि सोमवार से अमेरिका, नाटो और अन्य यूरोपीय देशों की रूस के साथ शुरू हो रही वार्ता में कजाखस्तान का सवाल भी उठेगा। लेकिन रूस ने इससे दो टूक इनकार कर दिया है। उसने कहा है कि कजाखस्तान में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिस पर बातचीत की जाए। तो साफ है कि दोनों पक्षों के रुख अलग-अलग हैँ। यूक्रेन और कई दूसरे प्रश्नों को लेकर पहले से जारी तनाव में इस मतभेद से नया उबाल आने की आशंका जताई जा रही है।

कजाखस्तान में सैकड़ों लोग एलपीजी की ऊंची कीमतों का विरोध करने सड़कों पर उतरे थे। एलपीजी को यहां ऑटोगैस के नाम से भी जाना जाता है, जो यहां का प्रमुख ईंधन है। इसके बाद से विरोध की यह लहर पूरे देश में फैल गई और जहां तहां हजारों लोग सड़कों पर उतर कर विरोध में शामिल हो गए। प्रदर्शनकारी अलमाटी में भी सड़कों पर उतरे, जो पहले यहां की राजधानी हुआ करता था। वहां राष्ट्रपति भवन को आग लगा दी गई। इसके साथ ही म्युनिसिपल्टी की इमारतो और पुलिस की गाड़ियों को आग लगाने की भी खबरें आईं। उसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की, जिसमें बताया जाता है कि दर्जनों लोग मारे गए। प्रदर्शनों के फैलते ही राष्ट्रपति तोकायेव ने गैस के दाम घटा दिए। लेकिन उससे अशांति नहीं रुकी। इस बीच प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। फिर भी प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। तब राष्ट्रपति ने देश के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में आपातकाल का एलान कर दिया और सीएसटीओ से सेना भेजने की गुजारिश की। सीएसटीओ ने इस पर तुरंत कदम उठाया। लेकिन अब यही मामला रूस और पश्चिमी देशों के विवाद का एक और बिंदु बन गया है। इससे जिनेवा में सोमवार से शुरू हुई शांति वार्ता के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।

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