कोरोना के दौरान राक्षसी आतंक

कोरोना महामारी से सारी दुनिया के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान भी, दोनों ही परेशान हैं लेकिन इस भयंकर संकट के दौरान कश्मीर के हंडवाड़ा में जो आतंकवादी घटना हुई है, उससे अधिक शर्मनाक और दुखद क्या हो सकता है ? हमारे टीवी चैनल बता रहे हैं कि इन आतंकियों का सरगना हैदर भी मारा गया है और उसके साथ छिपा हुआ एक दूसरा आतंकी भी ढेर हो गया है लेकिन इस मुठभेड़ में भारत के पांच सैनिक मारे गए हैं। इनमें कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अतुल सूद, नायक राकेश, लांस नायक दिनेश सिंह और पुलिस अफसर शकील काजी शहीद हो गए हैं। हमारे इन बहादुर सैनिकों के बलिदान पर सारा देश स्तब्ध और दुखी है। यह ठीक है कि इस मुठभेड़ में आतंकियों का एक बदनाम सरगना भी मारा गया है। इस पर भारत संतोष कर सकता है लेकिन भारत के समरशास्त्री पूछ रहे हैं कि पाकिस्तान की सरकार क्या कर रही है ? उसने अपने इस आतंकी पर काबू क्यों नहीं किया ? उसे इस संकट की घड़ी में भी आतंक फैलाने के लिए भारत भेज दिया गया ? हैदर नामक इस आतंकी सरगना की पहचान हो चुकी है। वह पाकिस्तानी है। वह लश्करे-तोइबा का है।

हमारे कुछ पूर्व सैनिक इस घटना से इतने क्रुद्ध हैं कि वे मांग कर रहे हैं कि भारत इस वक्त पाकिस्तान को सबक सिखाए। उनका मानना है कि बातें बहुत हो चुकीं। अब मौका तलवार उठाने का है। लेकिन पाकिस्तान यह दावा कर सकता है कि हैदर से उसका कुछ लेना-देना नहीं है। यदि वह उसका नागरिक है तो भी आसिफ जरदारी के शब्दों में वह ‘नाॅन-स्टेट एक्टर’ है लेकिन पाकिस्तान इन आतंकियों की दो-टूक भर्त्सना क्यों नहीं कर सकता है ? क्या वह हिंसा के हथियार को रद्द कर सकता है ? क्या उसे इस तथ्य का अहसास नहीं हैं कि वह हजार साल भी हिंसा का सहारा लेता रहे तो भी उसकी इच्छा-पूर्ति नहीं हो पाएगी ? इन आतंकियों के चलते ही वह सारी दुनिया में बदनाम हो गया है। उसे कई विदेशी लोग गुण्डा-राज्य (रोग़ स्टेट) कहने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों ने उसका टेंटुआ कस दिया है। अनाप-शनाप फौजी खर्च ने पाकिस्तान के आम आदमी की जिंदगी तबाह कर रखी है। कोरोना-संकट के दौरान ऐसी घटना का होना यह भी सिद्ध करता है कि ये आतंकी राक्षसी वृत्ति के लोग हैं।

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