• डाउनलोड ऐप
Thursday, May 6, 2021
No menu items!
spot_img

दुनिया सचमुच देख रही हमें!

Must Read

हरिशंकर व्यासhttp://www.nayaindia.com
भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था।आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य।संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

दुनिया भर के देशों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को जब गंभीरता से लिया, उसके तीन-चार महीने बाद भारत में इस बारे में गंभीरता से विचार शुरू हुआ। उसके बाद से एक साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनगिनत बार यह कह चुके हैं कि दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने अनगिनत बार अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि दुनिया भारत को देख रही है और अचंभित है कि कैसे भारत ने कोरोना पर नियंत्रण कर लिया। उन्होंने अनगिनत बार यह बात कही है कि भारत ने इस महामारी में भी दुनिया के सौ-डेढ़ सौ देशों की मदद की है। अपनी वैक्सीन कूटनीति में उन्होंने दर्जनों देशों को अपने पैसे से खरीद कर वैक्सीन अनुदान में भेजी। यह अलग बात है कि भारत में खुद वैक्सीन की कमी हो गई या आबादी के लिहाज से जिस  पैमाने पर वैक्सीनेशन होना था वह नहीं हुआ।

‘दुनिया भारत की तरफ देख रही है’ का जो विमर्श भाजपा के नेताओं ने खड़ा किया वह सचमुच हकीकत बन गई। दुनिया सचमुच भारत की ओर देख रही है कि यह कैसा असभ्य और अनपढ़-गंवार लोगों का देश है, जहां वायरस की भयावहता के बीच कुंभ मेले का आयोजन हो रहा है और एक राज्य का मुख्यमंत्री कहता है कि गंगा जल में डुबकी लगाने से कोरोना नहीं होगा! दुनिया हैरान है कि जिस देश में दो लाख से ज्यादा केसेज आ रहे हैं वहां एक राज्य का मुख्यमंत्री लोगों से लाखों की संख्या में कुंभ के मेले में शामिल होने की अपील करता है और कहता है कि आस्था के आगे कोरोना हार जाएगा!

दुनिया सचमुच आंखें फाड़ कर भारत की ओर देख रही है कि इस देश का नेतृत्व कैसे हाथ में है, जो कोरोना की भयावह महामारी के बीच हजारों लोगों को जुटा कर चुनावी रैलियां कर रहा है और इस बात पर गदगद हो रहा है कि उसकी सभाओं में इतनी भीड़ जुट रही है! दुनिया हैरान-परेशान है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि जो नेता शाम में बैठ कर लोगों को नसीहत दे कि मास्क लगाएं, सामाजिक दूरी रखें, कोरोना दिशा-निर्देशों का पालन करें, भीड़ न लगाएं और अगले दिन सुबह हजारों की सभा को संबोधित करने पहुंच जाए? यह पूरी दुनिया के लिए कौतुक का विषय है कि देश में दो लाख से ज्यादा केस जो आ रहे हैं और देश का सर्वोच्च नेतृत्व उसकी परवाह किए बगैर चुनावी सभाओं में व्यस्त है। देश के 10 राज्यों में उपचुनाव हो रहे हैं और उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों का प्राथमिक काम कोरोना से लड़ना नहीं, बल्कि उपचुनाव में प्रचार करना था।

सचमुच दुनिया भारत की ओर देख रही है कि यह वायरस से लड़ने का कौन सा मॉडल है, जो जिलों के कलेक्टर प्राइवेट लैब्स को फोन करके टेस्टिंग करने से रोक रहे हैं! यह कैसा मॉडल है, जिसमें संक्रमण से मरने वालों की संख्या छिपाई जा रही है और सिर्फ 10-15 फीसदी मौतों की आधिकारिक पुष्टि की जा रही है! वायरस से लड़ने का यह कौन सा मॉडल है, जिसमें एक राज्य सरकार का मंत्री कह रहा है कि जिसकी मौत आई होती है वह तो मर ही जाता है! यह कैसा मॉडल है कि जीवनरक्षक इंजेक्शन अस्पताल में नहीं मिल रहा है और सत्तारूढ़ पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बैठ कर इंजेक्शन बांट रहा है! सारी दुनिया इस बात को भी हैरानी से देख रही है कैसे भारत में आबादी के लिहाज से बहुत कम वैक्सीनेशन हुआ है और फिर भी भारत सरकार दुनिया में वैक्सीन बांट रही है! भारत की तरफ दुनिया इसलिए भी कौतुक के साथ देख रही है कि आखिर यह कैसा देश है, जिसने महामारी के एक साल में स्वास्थ्य की कोई बुनियादी सुविधा नहीं बढ़ाई, फिर भी नेता महामारी रोक लेने का दावा कर रहा है और लोग उस पर ताली-थाली बजा रहे हैं। महामारी के खिलाफ 21 दिन में जंग जीत लेने का दावा भी दुनिया के लिए कम कौतुक भरा नहीं था। उस दावे के करीब चार सौ दिन बाद देश के हालात ज्यादा बुरे हैं लेकिन उस पर क्या शर्मिंदा होना!

जहां तक कोरोना पर काबू पाने की बात तो अब खबर है कि भारत सरकार ने ब्रिटेन और दुनिया के दूसरे देशों की ओर देखना शुरू कर दिया है। जो कहते थे कि दुनिया हमारी तरफ देख रही है उनकी ओर से देश की राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे ब्रिटेन की ओर देखें, जिसने अपने यहां महामारी की दूसरी लहर पर काबू पा लिया है। राज्यों से ब्रिटेन का मॉडल फॉलो करने को कहा गया है। असल में ब्रिटेन ने सभ्य दुनिया के देशों के मुकाबले भी सबसे बेहतर तरीके से वायरस को हैंडल किया। एग्रेसिव टेस्टिंग, एग्रेसिव वैक्सीनेशन, माइक्रो कंटेनमेंट और सर्विलांस के सहारे उसने वायरस की दूसरी लहर पर काबू किया। वैसे भारत में कई बार प्रधानमंत्री ने ‘थ्री टी’, ‘फोर टी’ जैसे कई फॉर्मूले बताए, कई नारे भी दिए लेकिन उनसे कुछ हासिल नहीं हुआ है क्योंकि सिर्फ नारे देने से काम नहीं चलता है। ब्रिटेन की ओर देखने या उसके मॉडल को फॉलो करने में मुश्किल यह है कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है और स्वास्थ्यकर्मियों का तो अकाल है। महामारी के एक साल में स्वास्थ्यकर्मियों की भरती की कोई मुहिम नहीं चली है, जबकि ब्रिटेन में बड़ी संख्या में हेल्थकेयर वर्कर्स की बहाली की गई। यह तथ्य है कि भारत में डॉक्टर, नर्सें और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी थकने लगे हैं। उनकी संख्या बहुत सीमित है और एक साल तक लगातार काम करके वे थक रहे हैं। अगर सरकार ने नई नियुक्तियां की होतीं और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई होतीं तभी कोई फायदा था, सिर्फ कह देने से ब्रिटेन का मॉडल नहीं फॉलो हो जाएगा।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

Odisha में कोरोना वायरस के रिकार्ड 10,521 नए मामले आए, कुल संक्रमितों की संख्या 5 लाख के पार

भुवनेश्वर | ओडिशा में आज कोरोना वायरस संक्रमण (Corona virus infection) के रिकार्ड 10,521 नये मामले सामने आने के...

More Articles Like This