वायरस, चीन पर रोएं या टोयोटा, प्याज पर?

तथ्य-सत्य पर गौर करें। गुरूवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने दो टूक कहा ‘भारत तत्काल अपनी ग़लत हरकतों को सुधारे।.. भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर संघर्ष के लिए भारत ज़िम्मेदार है’। फिर चीन की सत्ताधारी पार्टी के अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शीजिन ने भारत के रक्षा मंत्री के संसद में बयान पर लिखा- इन दिनों भारतीय सेना ने सीमा पर नरम रुख़ अपनाया हुआ है जैसा कि राजनाथ सिंह के संबोधन से भी पता चलता है। ये नरम रुख चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जबरदस्त दबाव की वजह से है।

क्या इन वाक्यों से देशभक्त भारतीय का खून नहीं खौलना चाहिए? चीन का रूख क्या उलटा चोर कोतवाल को डांटने वाला नहीं है? दुनिया ने देखा-जाना हुआ है कि मई में चीन ने नियंत्रण ऱेखा के भीतर घुस कर भारत के कोई एक हजार वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया है और इसमें देपसांग के कोई नौ सौ वर्ग किलोमीटर के सामरिक क्षेत्र को भारत से जैसे काटा है वह न केवल चोरी, बल्कि जंगखोरी व आगे की मंशा का साफ प्रमाण है। बावजूद उसकी हिम्मत जो भारत को धमकाता हुआ कहता है कि वह गलत हरकत से बाज आए।

जाहिर है चीन खम ठोक दुनिया के आगे भारत को अपमानित कर रहा है। भारत की जमीन खा लेने के बाद दुनिया को बता रहा है कि चीनी सेना ने जबरदस्त दबाव बनाया तो भारतीय सेना डर कर नरम रूख अपनाए हुए हैचीन के आगे भारत मिमिया रहा है। भारत के नेता उसके आगे-पीछे घूम कूटनीति कर रहे हैं और इसके चलते भारत की सेना सीमा पर नरम रूख अपनाने को मजबूर है।

अब इस सप्ताह वायरस का तथ्य-सत्य। 11 दिन में कोरोना वायरस ने भारत में दस लाख लोगों को संक्रमित किया है। मतलब कोई 90 हजार रोज नए मामले। और यह दुनिया के टॉप दस देशों में सर्वाधिक कम टेस्टिंग के बावजूद है। इन पंक्तियों के लिखते वक्त दस लाख की आबादी के पीछे भारत में सिर्फ 61 टेस्ट है जबकि भारत के आगे-पीछे के अमेरिका में 610 और ब्राजील में 634 टेस्ट है। सोचें इन देशों जितने यदि टेस्ट हुए तो भारत में कितने करोड़ संक्रमित निकलेंगे? उस नाते अक्टूबर में भारत दुनिया का न केवल नंबर एक संक्रमित देश होगा, बल्कि तब टेस्ट बढ़ने के साथ हर रोज संक्रमण का आंकड़ा लाख, सवा, डेढ-दो लाख होने की और बढ़ेगा। मैं वायरस को ले कर भारत की लापरवाही पर फरवरी से लिख रहा हूं और पहले मैं इस संकट के सन् 2021-22 तक बने रहने को बूझ रहा था लेकिन अब तय मानें कि भारत इस वायरस से दुनिया के लिए सन् 2024 तक ऐसा अछूत बना रहेगा कि विदेशी भारत आने की सोचेंगे नहीं तो भारत के यात्रियों के लिए दुनिया के तमाम देश तरह-तरह की बाधाएं व टेस्ट लिए हुए होंगे। बहरहाल मोटा तथ्य जैसे चीन के आगे भारत की सरकार बेबस, लाचार, मजबूर, कूटनीति की झूठी बातों, अपना जमीन गंवाने की दशा में है वैसे ही वायरस के आगे भारत सरकार और भारत की व्यवस्था जान-माल लुटवा रही है। सब भगवान भरोसे है। भारत के लोग इतना भर सोचने का दिमाग लिए हुए हैं कि हम कर क्या सकते हैं? न वायरस के आगे और न चीन के आगे!

अब दुनिया की नंबर एक ऑटो कंपनी टोयोटा पर गौर करें। इस जापानी कंपनी के पूर्णकालिक कर्ता-धर्ता उपाध्यक्ष-डायरेक्टर शेखर विश्वनाथन ने एक वैश्विक न्यूज एजेंसी से भारत में ऑपरेशन की हकीकत बताते हुए कहा- भारत में अत्यधिक टैक्स के चलते हम अपना विस्तार रोक रहे हैं। हम भारत आए, यहां पैसा लगाया और अब मैसेज प्राप्त है कि हमें आपकी जरूरत नहीं है। हालातों में सुधार है नहीं तो हम भारत छोड़ेंगे नहीं लेकिन अपना काम बढ़ाएंगे भी नहीं।

यह खबर दुनिया में प्रसारित हुई नहीं कि भारत सरकार को ताव आया। सच्चाई को दबाने के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट हुआ व शाम तक टोयोटा के देशी पार्टनर किर्लोस्कर ग्रुप के विक्रम किर्लोस्कर से बयान दिलवाया गया कि हम भारत के भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है और घरेलू ग्राहकों व निर्यात के लिए इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट में दो हजार करोड़ रुपए का इनवेस्टमेंट करेंगे। ध्यान रहे इससे पहले अमेरिका की जीएम मोटर्स और फोर्ड ने भी भारत में कारोबार बंद करने या ऑपरेशन घटाने के फैसले लिए हुए हैं। हकीकत है कि बरबाद आर्थिकी और वायरस के कारण बनी मंदी ने ऑटो क्षेत्र की कमर तोड़ी हुई है। ऊपर से यहां कारों पर  सिगेरट, शराब की तरह टैक्स कमाई का जरिया मान एक से 22 फीसदी तक लग्जरी गुड्स टैक्स लगता है। 28 फीसदी जीएसटी टैक्स अलग है।

बहुत संभव है दिवालिया होती केंद्र सरकार, जीएसटी वसूली में तीन-चार लाख करोड़ रुपए की होने वाली कमी, राज्यों को अपनी जीएसटी देनदारी के चक्कर में आगे कारों पर भी सिगरेट, पान मसाला आदि के साथ जीएसटी कंपनसेशन सेस लगा डाले। अंबानी-अदानी की कंपनियों पर मोनोपॉली-जियो आदि पर सेस नहीं लगेगा लेकिन मेड इंडिया के लिए भारत आई हुई विदेशी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों पर सेस इसलिए क्योंकि ये धंधा क्रोनी पूंजीवाद की तासीर में नहीं करती हे। और जाने लें गुरूवार को वित्त मंत्रालय से अनाम सूत्रों के हवाले ऑटो क्षेत्र को धमकाया गया कि शोर मचाकर रियायत की नहीं सोचें। जीएसटी नहीं घटेगी, लागत घटाओ और पैरेंट कंपनी को रॉयल्टी भेजना कम करो। सो, तय मानें अगले दो-तीन सालों में ऑटो क्षेत्र में भी भारत का जमा-जमाया मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र वैसे ही बरबाद होगा जैसे टेक्सटाइल का हुआ है और जिससे भारत की कीमत पर बांग्लादेश दुनिया का निर्यातक है।

अब प्याज पर आया जाए। सोमवार को अचानक सुबह भारत सरकार को इलहाम हुआ कि प्याज मंहगा हो रहा है तो निर्यात पर तुरंत रोक। जैसे तुरंत लॉकडाउन, तुंरत नोटबंदी वैसे तुरंत प्रभाव से प्याज निर्यात पर पाबंदी। सो, मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर निर्यात के लिए जमा चार लाख मीट्रिक टन प्याज और बांग्लादेश-नेपाल की सीमा पर प्याज लिए खड़े ट्रकों को लेकर व्यापारी, प्याज पैदा करने वाले किसान सभी हैरान हैं कि अब करें तो क्या करें? महाराष्ट्र के किसान नंबर एक निर्यातक हैं। वायरस काल में उन्हें विदेशी ऑर्डर के चलते प्याज से अच्छी कमाई होती लग रही थी लेकिन एक झटके में प्याज के दाम टूट गए। निर्यात को तैयार प्याज सड़ने के कगार पर है। वहां किसान और नेता आंदोलन कर चार दिन से दबाव बना रहे हैं कि कुछ तो राहत दे। 25 प्रतिशत प्याज सड़ चुका है। बांग्लादेश सीमा पर तीन हजार टन प्याज शिपिंग बिल के साथ है लेकिन अचानक ऊपर से आदेश तो बंदरगाह और सीमा तक पहुंचा प्याज सड़ने के कगार पर। यह जान शर्म से चेहरा झुकना चाहिए कि बांग्लादेश ने विरोध कर नसीहत दी है कि ऐसे कैसे फैसले होते हैं। शरद पवार से लेकर महाराष्ट्र के भाजपा नेता सब केंद्र सरकार में समझाने-गिड़गिड़ाने का काम कर चुके हैं। मगर बहरी-गूंगी-अंधी-मूर्ख सरकार को जैसे चीन की सीमा की हकीकत और ऑटो क्षेत्र की बदहाली नहीं समझ आती है तो प्याज पैदा करने वाले किसान की घायल दशा वह कैसे समझ सकती है!

तभी अपना मानना है कि सन् 2020 वह प्रारंभ है, जिससे आने वाले कई साल भारत माता भी रोते-रोते आंसू सुखाए हुए होंगी तो भारत का जन-जन यह समझ नहीं पाएगा कि रोएं तो क्या रोएं! सब अपनी बरबादी के बावजूद इस बेबसी में जकड़े हुए होंगे कि करम फूटे हुए हैं तो रामजी जैसे रखेंगे वैसे जी लेंगे। मतलब हिंदू राज ही हिंदू तासीर का हिंदुओं को असली अनुभव कराएगा।

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