कोरोना से चीन बन रहा अछूत

कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन चीन में फैला कोरोना वायरस इतना घातक साबित होगा कि इसके कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करनी पड़ेगी। यह वायरस चीन में साढे चार सौ लोगों की जान ले चुका है और संख्या हर दिन बढ रही है। पूरी दुनिया में इससे 10,000 के करीब लोग प्रभावित है। इनमें सबसे ज्यादा लोग चीन के है व वहां लोंगों को दुनिया से अलग-थलक कर दिया गया है।

इस वायरस को कोरोना नाम इसलिए मिला है क्येांकि इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप से देखने पर यह सूर्य के एक कोरेन, अग्नि अणु से मिलता जुलता है। आमतौर पर यह वायरस जानवरों में पाया जाता है व उनके खाए जाने पर इंसानों के शरीर में पहुंचता है। याद दिला दे कि सार्स रोग भी चीन में इसी तरह से वायरस के जरिए फैला था। तब उसके कारण 800 लोगों को जिदंगी से हाथ धोना पड़ा था।

इसका नाम नोवल कारनीवोरस का एन सीओवी रखा गया है। अभी तक चीन के वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वायरस कब व केसे फैला था। इसकी शुरुआत हल्के बुखार व खांसी से होती है फिर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। माना जाता है कि इससे प्रभावित लोगों का पांचवा हिस्सा ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो पाता है।

छुआछूत का रोग होने के कारण यह वायरस बहुत तेजी से फैलता है। इससे 9776 लोग प्रभावित हुए व उनमें से दो फीसदी या चार सौ से ज्यादा लोग मारे गए। आमतौर पर इस रोग का वायरस चमगादड़ों व सांप में पाया जाता है। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक चीन में इसके ग्राफ पाए गए। पहले मरीज ने खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए वुहान के समुद्री जीव-जंतुओं वाले बाजार का दौरा किया। वहां चमगादड़ व सांप भी खाने के लिए बेचे जाते हैं। सार्स की तरह इस रोग के वायरस भी रोगी से हाथ मिलने या उसके द्वारा छीकने या थूकने से फैलते है।

इसको फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मुंह पर कपड़ा बांधकर रखना व इसके रोगी को सबसे अलग-थलग कर देना है। यह भी पता चला है कि इस वायरस के रोग के लक्षण पता चलने के पहले ही वह एक मरीज के जरिए दूसरे में चला गया। इसकी शिकार एक चीनी महिला अपनी व्यापारिक यात्रा के सिलसिले में जर्मनी से वहां गई। उसने अपने सहभागी को इस रोग से ग्रस्त कर दिया। जबकि खुद महिला के शरीर में इस रोग के लक्षण कई दिनों के बाद दिखे। आपस में मिलने-जुलने से यह रोग बहुत तेजी से फैलता है।

अभी तक दुनिया में इस बीमारी का पूरी तरह से ईलाज नहीं ढूंढ़ा जा सका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया के देशों से कहा है कि वो अपने यहां रोगियों को अलग-थलग करे व इसके बारे में तमाम जानकारी व आंकड़े दूसरे देशों को उपलब्ध करवाए। अनेक देशों ने चीन के साथ लगने वाली अपनी सीमा बंद कर दी है व भारत समेत तमाम देशों ने अपने नागरिको को सलाह दी है कि वे चीन की यात्रा न करे।

ध्यान रहे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल 2009 ने एच 1-एन-1 फ्लू से फैली बीमारी पर घोषित किया था। दोबारा 2014 के इबोला वायरस फैलने पर 2016 में जीका वायरस का प्रकोप होने पर इन महामारियों के कारण विश्व स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की गई। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका इस रोग से ग्रस्त लोगों के संपर्क में न आना है। उन लोगों को छींकते व खांसते समय मुंह को कपड़े से ढक कर रखना चाहिए। नाक व मुंह को पोछने के बाद इस्तेमाल रूमाल व पेपर को नष्ट कर देना चाहिए व हाथों को अच्छी तरह से धोने के बाद उन्हें सुखाना चाहिए। अभी इस वायरस का प्रभावी टीका तैयार नहीं हुआ है। चीन से एयरइंडिया के विमान के जरिए लाए जा रहे भारतीय छात्रो को दो हफ्ते तक सेना के मानेसर स्थित निगरानी केंद्र में रखा जाएगा।

आईटीबीपी ने भी छावला में 600 बिस्तरो का निगरानी केंद्र बनाया है। चीन के हुबेई प्रांत में छात्रों समेत करीब 700 भारतीय फंसे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर मेडिकल छात्र या शोधकर्ता है। इन सभी को वापस लाने का इंतजाम किया जा रहा है। उनकी दो चरणों में जांच होगी। इससे 23 देशों में कहर है। इनमें अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक शामिल है। ध्यान रहे कि 2002 में सार्स रोग भी 24 देशों में फैला था।

गनीमत बस इतनी है कि चीन के बाहर किसी देश में इससे प्रभावित अधिक व्यक्ति को जान से हाथ नहीं धोना पड़ा। अभी तक चीन से बाहर दो लोगों की इससे मौत की खबर है। अमेरिका ने भी अपने नागरिको से चीन की यात्रा न करने की सलाह दी है। दुनिया के तमाम देशों की विमान कंपनियों ने चीन जाने वाली अपनी उड़ानो को रद्द कर दिया है। चीन ने थाईलैंड व मलेशिया में फंसे अपने नागरिको को निकालने के लिए दो विमान भेजे हैं। इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने व्यक्तिगत सुरक्षा के काम आने वाले मास्क और कपड़ो के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

कोरोना वायरस को रोकने के लिए मास्क की बढ़ती मांग को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सुरक्षा मास्क एन 95 मास्क के साथ रूमालो का चीन से निर्यात भी रोक दिया गया है। चीन से कागज के आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीन को मास्क की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहां के अस्पताल काम में मास्क दिए जाने की मांग हैं। वहीं बीमारी के कारण छुट्टी बढ़ा दी गई है। मास्क की कमी के कारण लोग सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक के कंटेनर, हैलमेट व बैग पहनकर खुद को बचाते हुए धूम रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस संबंध में तस्वीरे वायरल हो रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares