वायरस का नंबर एक चरागाह देश

अमेरिका से ही फिर भारत का सवाल है। जब अमेरिका की लीडरशीप की नासमझी-झूठ के कारण चार महीने में नॉर्मल होने के बजाय वह देश महामारी का ज्यादा मारा है और सर्दियों में अगली वेव का भी अनुमान है तो भारत में अनलॉक की मूर्खता में दिवाली (14 नवंबर) भले खुले ताले में मने लेकिन वह वक्त महामारी के पीक से पहले की अवस्था का होगा। मैंने मार्च-अप्रैल में लिखा था कि भारत के एयरपोर्ट से चीन की कम कनेक्टिविटी और वायरस के देर से घुसने जैसे कारणों से महामारी का भारत में प्रारंभ जून से होगा तो मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरू जैसे महानगरों से शुरुआत के बाद प्रदेशों में मॉनसून बढ़ते-बढ़ते महामारी आगे बढ़ेगी और ये प्रदेश सितंबर अक्टूबर से मुंबई-दिल्ली जैसे आंकड़े लिए हुए होंगे। इससे मॉनसून व सर्दियों में तो न जाने क्या हो!

अब हालातों को और बिगाड़ने की रीति-नीति है। दरअसल भारत में सरकार और वायरस के बीच यह कंपीटिशन हो गया है जो सरकार की जिद्द सबकुछ अनलॉक कर सामान्य बतलाने की है तो वायरस भी सामान्य अंदाज में मजे से फैलता जा रहा है। एक वक्त कहा जाता था कि वायरस सिक्किम में नहीं पहुंचा, नागालेंड, मेघालय याकि उत्तर-पूर्व में नहीं पहुंचा या इतने जिलों में नहीं पहुंचा अब जिधर खोदेंगे याकि टेस्ट करेंगे वायरस निकल आएगा। संख्या और प्रोजेक्शन का मतलब नहीं बचा है। अमेरिका और ब्राजील के फैलाव ने दुनिया के सभी देशों को बता दिया है कि वायरस सब तरफ पहुंचेगा उसे रोका तभी जा सकता है जब पकड़ने की टेस्टिंग हो। टेस्टिंग होगी तो अपने आप लोग-सरकार सतर्क होंगे और फैलाव रूकना संभव होगा। भारत की एक प्रदेश सरकार का किस्सा है कि फलां जगह के अधिकारी ने अपने आला अफसर को सूचना दी कि आज हमने इतने टेस्ट कराए, इतने केस निकले तो उसके बॉस ने हड़काते हुए कहां तुम्हें क्या केस पकड़ने का तमगा चाहिए? बैठे रहो चुपचाप!

इसलिए भारत वायरस के आगे न केवल बैठा हुआ है, बल्कि पूरा अनलॉक करके वायरस को फैलने देने का मौका बनवा रहा है। इसलिए 25 अप्रैल को मैंने इस कॉलम में लिखा था वह दोहरा देता हूं कि- रैपिड टेस्ट, एंटी बॉडीज टेस्ट के शार्ट कट तरीकों, नीम हकीमी सोच में भारत ने यदि आरटी-पीसीआर टेस्ट में लापरवाही बरती, प्रति माह पचास लाख टेस्ट का बंदोबस्त मतलब 130 करोड़ आबादी के अनुपात में टेस्ट, ट्रेसिंग, इलाज की युद्ध स्तरीय लड़ाई वाली समझ नहीं दिखाई तो दिवाली या नवंबर तो छोड़िए भारत तब तक वायरस में जकड़ा रहना है जब तक वैक्सीन बन कर करोड़ों की तादाद में भारत को सप्लाई नहीं हो जाती। और यह काम सवा-डेढ़ साल ले सकता है।

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