अमेरिका जब संभला नहीं तो भारत..

आज चार जुलाई है। अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस। आज के दिन अमेरिकी लोग जैसे जश्न मनाते हैं, छुट्टी मनाते हैं, जो आतिशबाजी कराते हैं वह मानव सभ्यता के इतिहास में एक देश के परम वैभव की सर्वोच्च सालाना घटना है। और आज वहां कैसा दिन होगा? क्या वह मातम की छाया में, इस चिंता से स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाएगा कि वायरस की महामारी देश को कितना मारेगी? मैं गपशप कॉलम में आज यह सवाल इसलिए लिए हुए हूं क्योंकि मैंने 25 अप्रैल को इसी कॉलम में पहला आइटम लिखा था-अमेरिका क्या चार जुलाई तक खुलेगा? दूसरे आइटम का शीर्षक था- क्या दिवाली (14 नवंबर) खुले ताले में मनेगी?

तब मैंने लिखा था- डोनाल्ड ट्रंप का बस चलता तो अप्रैल के ईस्टर सप्ताह में ही अमेरिका खुल जाता। अप्रैल में आर्थिकी शुरू कराने की जिद्द में उन्होंने धमकी दी थी कि वे राष्ट्रपति हैं। उनका आदेश प्रदेशों को मानना होगा। अब ट्रंप मई में ही खोल देने का दम लगाए हुए हैं। परसों उन्होंने कहा 20 राज्य तैयार हैं। तीन चरण की तैयारी, रोडमैप में आर्थिकी को खोलने के राज्यों को सुझाव दिए।…पर अमेरिका जुलाई से पहले पचास फीसदी भी शायद ही खुल पाए।..,.वायरस ने ट्रंप को पहले भी धोखा दिया, वह उन्हें झूठा, लापरवाह राष्ट्रपति बना चुका है तो अमेरिका का ताला न मई में खुलना है और न जून में।…उस नाते अमेरिका के स्वंतत्रता दिवस याकि चार जुलाई जरूर वह एक तारीख हो सकती है, जिस दिन डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन में परेड करा कर देश को दिखलाएं कि हमने वायरस को हरा दिया। वे वापिस छाती फुलाते हुए कहें कि ग्रेट कंट्री! ग्रेट पीपुल! ग्रेट प्रेसीडेंट!

लेकिन ग्रेट अमेरिका का ग्रेट प्रसीडेंट आज अपनी मूर्खताओं, अंहकार, झूठ पर मन ही मन रो रहा होगा। दुनिया देख रही है कि ट्रंप और उनके रिपब्लिकन पार्टी के गर्वनरों, भक्तों ने नागरिकों को वायरस से संक्रमित बनाने की फैक्टरी में अमेरिका को कैसे नंबर एक बना डाला है। रोजाना चालीस हजार संक्रमित और डॉ. फौची का ऐलान कि कहीं लाख केस रोजानान होने लगें! इसलिए फरवरी से चार जुलाई की अमेरिकी टाइम लाइन का सीधा अर्थ है। महामारी, महामारी है न कि  फ्लू-डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारी। लोग संक्रमित होंगे, मरेंगे यदि उसे पकड़ने-मारने के बजाय उसके साथ जीने के लिए लोगों से कहा गया। दूसरी बात, वायरस अलग-अलग जगह अलग-अलग वक्त में फैलेगा और लोगों को मारेगा। वह पूरे देश को बुरी तरह चपेटे में लेगा। मार्च में न्यूयॉर्क चपेटे में था तो आज टेक्सास, फ्लोरिडा हैं। तीसरी बात, एक नेता वायरस को काबू में करा सकता है तो दूसरा नेता उसे फैलाते हुए पूरे देश को महामारी का कैंप बना सकता है। नेता की लीडरशीप, समझ और देश के सत्य या झूठ में जीने पर दारोमदार है।

क्या गजब बात जो इटली, स्पेन, यूरोप चार जुलाई के आज के दिन पर्यटन के लिए खुले हैं। ब्रितानी, जर्मनी के लोग ग्रीस, स्पेन के समुद्री किनारे छुट्टी मनाने पहुंचने लगे हैं लेकिन यूरोपीय संघ ने अमेरिकियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है तो ऐसे ही न्यूयॉर्क के गर्वनर कुमो ने अपने देश के ही टेक्सास, फ्लोरिडा आदि के लोगों के न्यूयॉर्क प्रदेश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। न्यूयॉर्क कि रिओपनिंग को कुमो ने टाला है क्योंकि बाकी प्रदेशों से वे न्यूयॉर्क में वायरस नहीं आने देना चाहते हैं।

मैंने मार्च-अप्रैल में गर्वनर कुमो का बहुत जिक्र किया। मिसाल दी कि लीडर हो तो कुमो जैसा। जो हर रोज प्रेस के सामने आ कर सत्य बोलता है। टेस्ट,टेस्ट और इलाज पर जोर दे रहा है। ईमानदारी से दुनिया को बता रहा है कि हां न्यूयॉर्क नंबर एक वायरस ग्रस्त है। इतने संक्रमित हो रहे हैं, इतने मर रहे हैं। सब खुली किताब है। अभी लोग मरेंगे और पीक भी आएगा और फिर सब कंट्रोल में होगा। जब तक कंट्रोल नहीं होगा तब तक काम-धंधा नहीं खुलेगा। मेरी प्राथमिकता जान बचाना है। वायरस क्योंकि वैक्सीन आने तक रहेगा इसलिए टेस्ट, ट्रेस, मेडिकल रिस्पांस का पुख्ता बंदोबस्त करके वायरस को पकड़े रहेंगे।  डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर की इस एप्रोच को ट्रंप और उनकी पार्टी के गवर्नरों ने पसंद नहीं किया लेकिन गवर्नर डटा रहा। आज न्यूयॉर्क में वायरस कंट्रोल में है और ट्रंप को थोक वोटों से जिताने वाले दक्षिण-पूर्व अमेरिका के फ्लोरिडा, टेक्सास आदि में रिकार्ड तोड़ संक्रमण है। तभी अब अमेरिका में कई जानकार चिंता में हैं किक्या अगली चार जुलाई को भी अमेरिका सामान्य होगा?

न्यूयार्क के कुमो, स्पेन, इटली के प्रधानमंत्री को दुनिया ने पहले नहीं जाना हुआ था। लेकिन इनकी और इन जैसे कुछ विश्व नेताओं की लीडरशीप का आज यह वैश्विक सत्य है कि यदि आप विज्ञान, बुद्धि, मेडिकल सलाह-साधनों में देश को सत्यवादी कमान दें तो महामारी पर भी काबू पाना संभव है। गर्वनर कुमो की एप्रोच पर भारत में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के बेटे, उपमुख्यमंत्री ने टिप्पणी की थी कि देखो, वह इतने वेंटिलेटर, टेस्ट आदि के लिए खपा हुआ है बावजूद इसके वहां कितने लोग मर रहे हैं। जबकि आज क्या स्थिति है? न्यूयॉर्क नियंत्रित है और लापरवाही, झूठ वाले तेलंगाना या भारत या अन्य राज्यों में जो हो रहा है और होगा उसे वक्त वैसे ही बताएगा, जैसे अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में आज दशा है!

अमेरिका की स्वतंत्रता के इतिहास में सन् 2020 की चार जुलाई न केवल लाचारी का दिन है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि एक नेता की लीडरशीप नंबर एक देश को कैसे शापित बनवा सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका जैसे मानवता के झंडाबरदार देश को शर्म, लाचारी, झूठ, मूर्खता और बीमारी का चेहरा बना दिया है। जो है, वह सबके सामने है। इसलिए आने वाले दिनों की तस्वीर बहुत भयावह है। वैक्सीन और टीका बनेगा, लगेगा, इस महामारी पर काबू भी पा लिया जाएगा लेकिन तब तक कितने करोड़ लोग उजाड़ होंगे? यह त्रासद इसलिए है क्योंकि हम विज्ञान-मेडिकल के परम युग में जी रहे हैं!

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