खेलों पर कोरोना की मार

कई पीढ़ियों को ऐसा वक्त याद नहीं होगा, जब दुनिया में किसी खेल की कोई बड़ी प्रतियोगिता ना चल रही हो। लेकिन कोरोना की मार ऐसी पड़ी है कि ये ऐसा ही वक्त है। फुटबॉल या टेनिस, क्रिकेट हो या फॉर्मूला वन, या फिर चाहे कोई दूसरा खेल- सबके टूर्नामेंट स्थगित कर दिए गए हैं। आईपीएल इस साल होगा या नहीं, इसको लेकर संदेह है। और अब खबर यह है कि खेलों का महाकुंभ ओलिंपिक को भी एक साल के लिए टालने का फैसला हुआ है। ओलिंपिक इतिहास में बिना युद्ध की स्थिति में ऐसा पहली बार होगा। दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इस साल ओलंपिक खेलों के आयोजन पर काले बादल गहराते चले गए। सबसे पहले कनाडा ने टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला ले लिया। ओलंपिक खेलों का इस साल जुलाई में जापान में आयोजन होना था। इसके लिए जापान में जोर-शोर से तैयारियां चलती रही हैं। लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इस साल खेलों के आयोजन को टालने की मांग मजबूत हो गई। संक्रमण से जुड़ी चिंताओं की वजह से कनाडा ने टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला करते हुए खेलों को एक साल स्थगित कर देने की अपील की।

कनाडा की ओलंपिक समिति ने कहा कि यह सिर्फ खिलाड़ियों के स्वास्थ्य के बारे में नहीं है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में भी है। इसके पहले अंतरराष्टीय ओलंपिक समिति ने कहा था कि अगले चार हफ्तों में इस विषय पर निर्णय लिया जा सकता है। पर इस समयसीमा की भी आलोचना हुई। इसे कमेटी का “गैर-जिम्मेदाराना” रुख बताया गया। तब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कहा कि हो सकता है खेलों को स्थगित करने के अलावा कोई और रास्ता ना बचे। वैसे ऑस्ट्रेलिया ने अपने खिलाड़ियों को कह रखा था कि वे टोक्यो ओलंपिक्स 2021 को ध्यान में रखते हुए तैयारी जारी रखें। साथ ही जापानी अधिकारी और ओलंपिक अधिकारी स्थगन की संभावना को सिरे से नकार रहे थे। वे लगातार कह रहे थे कि ओलंपिक खेल अपने तय समय के अनुसार ही होंगे। लेकिन खिलाड़ियों और खेल संगठनों की आलोचना हाल के दिनों में बढ़ गई। उसका दबाव ओलिंपिक कमेटी और जापान सरकार पर पड़ा और आखिरकार ओलिंपिक खेलों को अगले साल की गर्मियों तक टालने का निर्णय हो गया।

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