चीन के लिए भारी होता वायरस

पिछले कुछ दिनों से मैं टीवी पर डिस्कवरी चैनल पर चीन के बारे में देख रहा हूं। सच कहूं तो यह सीरिज देखने के बाद चीन के बारे में मेरी राय ही बदल गई। वह हमारा दोस्त भले ही न हो मगर उसकी उपलब्धियां समझने लायक हैं। मैंने देखा कि वहां के लोगों ने ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं जिनका इस्तेमाल खेतों में कीड़े लगने पर फसलो पर रोग की दवा छिड़कने के किया जाता है व इनका निशाना इतना सटीक होता है कि वे केवल बीमार पौधों पर ही दावा छिड़क कर उसे बरबाद होने से बचाते हैं।

चीन आज पुराने सिल्क रूट को विकसित कर अपने यहां से यूरोप तक सड़क मार्ग तैयार कर अपने निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है। पिछले दिनों दिखाया गया कि वहां की सरकार ने ऐसी प्रणाली विकसित की है जिसके जरिए उसके हर नागरिक की चिकित्सकीय जानकारी का रिकार्ड बन जाए और वह इस बात का पता लगा सके कि वहां किस नागरिक को क्या बीमारी होने वाली है या हो सकती है। मगर जब इस देश में कोरोना वायरस फैलने के कारण उससे लोगों के मरने की खबर पढ़ी तो यह सब जानकारी धरी रह गई।

इतना बड़ा देश जोकि अर्थव्यवस्था के हिसाब से दुनिया में काफी ऊंचाई पर है वहां काम धंधा ठप्प हो जाने के कारण दुनिया भर में उसका असर पड़ रहा है व शेयर बाजार गिरने लगा है। इससे पहले भी बर्ड फ्लू व दूसरे वायरसों के कारण पूरी दुनिया को प्रभावित होते हुए देखा था। मगर इस वायरस के कारण चीन पूरी दुनिया से कट गया है। मेरी जितनी जानकारी जो है उसके मुताबिक कोरोना वायरस के लक्षण खांसी जुकाम सरीखे से होती है, नाक बहने लगती है। इसके बिगड़ने पर निमोनिया सरीखी गंभीर बीमारी हो जाती है।

यह छूआ-छूत से फैलने वाला वायरस है। इसके बारे में पढ़ने के बाद मैंने मांसाहारी भोजन पूरी तरह से बंद कर दिया है। खबर है कि इसका वायरस जानवरो के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंचता है। मालूम हो कि चीन में लगभग सभी जानवर खाए जाते हैं। इनमें कुत्ते से लेकर सांप तक शामिल हैं। इसका वायरस जानवरों के मांस के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंचता है।

खबर है कि मांसाहार के कारण इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ रही है। कोरोना वायरस का पिछले ही साल पता चला था व यह सार्स की तरह सांस लेने में बहुत दिक्कते पैदा करता है। पता चला है कि 75 फीसदी मामलों में यह बीमारी जानवरो के जरिए इंसानों तक पहुंची है। गंदी फैक्ट्ररियो, मांस की अस्वच्छ दुकानों, कत्लगाड़ी के जरिए यह इंसानों तक पहुंच रही है। इसका कारण इंसानो में सार्स व बर्ल्ड फ्लू की तरह पनपता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह बीमारी वुहान शहर की मांस बेचने वाले बाजारों से फैली थी। जहां इंसान मांस के संपर्क में आए थे जिन्हें पहले यह बीमारी हुई वे या तो बाजार ज्यादा जाते थे अथवा यह मांस समुद्री जीव काटने बेचने का काम करते थे।

यह इबोला व फ्लू का ही निकट संबंधी है। वैज्ञानिको का कहना है कि जानवरों के फार्म में जहां जानवर बीमार होते हैं वहां उनके अंदर एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध बना लेने वाले सुपरबग पैदा होते हैं। कुछ अध्ययनों में यह कहा गया है कि 2050 तक कैंसर की तुलना में इस रोग से कहीं ज्यादा लोग मारे जाएंगे। ज्यादातर बीमारियां उन जानवरों के जरिए फैलती है जिनका इंसान खाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

मांस में फाइबर नहीं होता है व इसमें धमनियो को मोटा करने वाले सैचूरेटेड फैट व कोल्स्ट्राल होता है। प्रोसेस्ड मीट खाने की कैंसर ग्रस्त होने की आशंका रहती है। चीन के अधिकारी इस बात से बेहद परेशान है कि जिस वुहान शहर से इस खतरनाक रोग की शुरुआत हुई वहीं कुछ माह पहले चीनी राष्ट्रपति ने वहां की कुख्यात सी समुद्री जीवजंतु बेचने वाले बाजार के निकट एक रेस्तरां में अपने मां-बाप के साथ मांसाहारी भोजन किया।  अब तक पूरी दुनिया में इस कोरोना वायरस के कारण हजारों लोग बीमार पड़ चुके हैं अकेले चीन में 150 के करीब लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।

वहां वैसे भी नववर्ष के कारण त्यौहारो का सिलसिला चल रहा था जोकि इस बीमारी के कारण काफी फीका पड़ गया है। दुकाने बंद है व लोगों का आपस में मिलना-जुलना बंद हो गया है। उन्होंने 27 दिसंबर को खाना खाया व चार दिन बाद चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा कि उनके यहां एक ऐसी बीमारी के वायरस का पता चला है जो कि बहुत तेजी से निमोनिया फैला रहा है। यह रोग फैलने के बाद वहां की सरकार ने यह मछली बाजार बंद कर दिया।

शुरू में इस रोग को गंभीरता से न लेने व वायरस का परीक्षण न होने के कारण कोरोना वायरस तेजी से फैला। इसका खुलासा होने पर चीन ने जनवरी के तीसरे हफ्ते में वुहान शहर को बाकी देश से एकदम अलग कर दिया। वहां लोगों का आना-जाना रोक दिया। वहां न तो हवाई जहाज आ-जा रहे हैं और न ही रेलमार्ग के जरिए आया-जाया जा सकता है। वुहान की जनसंख्या 1.10 करोड़ है व वहां आर्थिक व औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र है। वहां 15 दिन के अंदर 11020 रोगियों की क्षमता वाले दो अस्पताल बनाए जाने का काम चल रहा है।  चीन में स्वास्थ्य आपात स्थित घोषित कर दी गई है व पांच करोड लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। जिस समय यह वायरस फैला वह चीन के हिसाब से बहुत अहम हैं। चीन में  नववर्ष बहुत धूमधाम से मनाया जाता है व इस दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा लोग अपने घरो को आते जाते हैं। हवाई जहाज, ट्रेने, बसे तक ठसाठस भरकर चलती हैं व करोड़ो लोग अपने घर आते जाते हैं। उनके कारण यह वायरस तेजी से फैला व चीन तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि हांगकांग, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस तक पहुंच चुका है।

आश्चर्यजनक बात यह है कि इस वायरस से लड़ने वाली कोई वैक्सीन नहीं है व इंसान को अपनी रोगों से लड़ने की क्षमता व प्रणाली ही उसे बचा सकती है। वुहान वहां के हुवेई राज्य की राजधानी है व 1927 में चीन की राजधानी हुआ करता था।

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