समोसे की बड़ी तलब हो रही है? - Naya India
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समोसे की बड़ी तलब हो रही है?

मैंने अपने जीवन में पहले कभी इतना परिवर्तन नहीं देखा। जब छोटा था तो अक्सर टायफाइड रोग का शिकार हो जाता था। तब डाक्टरो का परहेज पर बहुत जोर रहा करता था। वे आमतौर पर खाने वाली तमाम चीजे जैसे रोटी, दाल सब्जी आदि बंद कर देते थे। जोकि अक्सर एक महीने तक बंद रहती थी। फिर डाक्टर तबियत में सुधार होने पर करीब एक माह की बीमारी के बादआटे से बनी रोटी का ऊपरी फूला हुआ टुकड़ा अरहर की दाल के पानी के साथ खाने की इजाजत दिया करते थेजोकि उन दिनो बहुत नियामत लगती थी।

समय के साथ हालात बदल गए। अब आमतौर पर डाक्टर खाने-पीने की पाबंदी नहीं लगाते हैं। जब 20 साल पहले मेरे दिल का माइट्रल वाल्व बदला गया तो आपरेशन के बाद मैं शल्य चिकित्सक व एम्स के जाने-माने निदेशक डा. वेणु गोपाल को खुद को दिखाने गया व उनसे पूछा कि मुझे क्या परहेज करना पड़ेगा? इन पर उन्होंने कहा कि सीमा के अंदर रहते हुए सब कुछ खा पी सकते हो। मेरे साथ गए मेरे बड़े भाई ने जोकि मेरे पीने की आदत से परिचित थे उनसे पूछा कि यह कितनी पी सकते हैं। इस पर डा. वेणु गोपाल ने कहा अगर बहुत मन करे तो बढि़या स्काच के 30-30 मिलीलीटर के दो पैग ले सकते हो। हम लोग वाल्व बदलने के कारण आपको खून पतला करने वाली दवा दे रहे हैं व एल्कोहल भी खून को पतला करता है। अतः सीमा में रहते हुए पीजिएगा। मैंने कुछ वर्षों तक पी व कुछ साल से उसे मुंह भी नहीं लगाया है। क्योंकि अंदर से तलब लगनी बंद हो गई है। सच कहूं तो अगर अब कभी दारू का गिलास मुंह तक ले जाऊं तो उससे वैसे ही वितृष्णा होती है जैसे कि इसे कभी न पीने वाले व्यक्ति को होती होगी।

इसी तरह अब नॉनवेज खाने का भी मन नहीं करता है। आखिरी बार कनाडा में ही खाया था। कनाडा आते-जाते समय हवाई जहाज में मिलने वाली मुफ्त की दारू व नॉनवेज भी नहीं खाया था। लॉकडाउन के दौरान उस बारे में सोचने का मौका मिला। तब लगा कि इन दिनों हमारे हाथ इतने ज्यादा बंध गए हैं कि बाहर जाकर खाना-पीना तो दूर रहा अपने बाल तक नहीं कटवा पाया। कनाडा में भी बाल काफी बढ़ गए थे। वहां जान बूझकर नहीं कटवाए थे।मेरा मानना है कि आमतौर पर हमें अपना नाई व दर्जी नहीं बदलना चाहिए। अब मैं अपने देश में बाल नहीं कटवा पा रहा हूंम। मुझे लगा कि इन दिनो मेरे जीवन का तरीका भी बदल गया है। आमतौर पर मधुमेह होने के बावजूद मैं सप्ताह में कम-से-कम एक बार हनुमानजी पर प्रसाद चढ़ाने के लिए लड्डू लेकर आता हूं। जबसे लॉकडाउन चल रहा है तब से मंदिर में ताला लगा हुआ है व प्रसाद नहीं चढ़ा पाया। घर पर भगवान की पूजा करने के बाद उन्हें थोड़ी से मिश्री चढ़ा देता हूं।

मुझे मीठा खाने का बहुत शौक है व इस कारण अपनी स्पेशलिस्ट से डांट भी खाता रहता हूं जोकि मेरी शुगर बढ़ जाने पर अपनी नाराजगी जताती रहती है। मिठाई खाए बहुत दिन हो गए है। हलवाई की दुकाने बंद चल रही है। वह तो संयोग से मदर डेरी की दुकान पर आइसक्रीम मिल जाती है व उसका टब लाकर रख लेता हूं व रात को सोते समय थोड़ी खा लेता हूं। आम आने शुरू हो गए हैं मगर उनमें मिठास नहीं है व आम का उसके साथ मजा नहीं आता है। पिछले शनिवार को हनुमानजी पर चोला चढ़ाया था व उस दिन मदर डेरी पर मिल्क केक के डिब्बे देखे थे व उसका डिब्बा लेकर हनुमानजी पर प्रसाद चढ़ाया व उसके बाद काफी दिनो के बाद कुछ मीठा खाया। इसके अलावा मुझे समोसा बहुत पंसद है। समोसा खाए हुए भी काफी दिन हो गए हैं। जब मधुमेह की बीमारी का पता चला तब डाक्टर ने समोसा खाने पर रोक लगा दी थी क्योंकि उसमें आलू होता है। अब लगता है कि उसका स्वाद ही चला गया है। एक ऋषि की तरह जिदंगी जी रहा हूं।

जिदंगी में पहली बार ऐसा मौका आया है जब लगता है कि बाजार जाकर भी क्या करूंगा। नोटबंदी के दौरान सारी रोजगारी खर्च कर दी थी। बहरहाल अब कई बार समोसा खाने की तलब होती है। नरेंद्र मोदी ने हमें साधू बनाकर अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करने के लिए बाध्य कर दिया है क्योंकि आप चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। आजकल चैनलो पर साफ नदियां, हवा, पानी व कूड़े के अंबर में आई कमी दिखाई जा रही है। मगर यह तभी तक देखने को मिलेगी जब तक जीवन सामान्य नहीं हो जाता है।

मुझे आश्चर्य इस बात पर है कि एक और आपसी दूरी बनाए रखने पर जोर दे रही इस सरकार ने जोकि घर से बाहर निकलते समय चेहरे पर मास्क लगाए रखने पर जोर दे रही है वही ग्रीन जोन वाले इलाको में पान, पान मसाला आदि की बिक्री पर लगी रोक हटा दी है। सबको पता है कि हमारे देश में लोगों को थूकने का कितना शौक है और वे पान व पान मसाले की पीक थूककर कितनी गंदगी फैलाते हैं। मुझे लगता है कि यह सब कोरोना वायरस से लोगों को प्रभावित करेगा। यह देश व हमारी सरकार भी गजब की है जो शराब, सिगरेट, पान मसाला बेचने की छूट तो देती है मगर उसने समोसा बेचने पर रोक लगा रखी है।

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