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कोरोना की बढ़ती चुनौती

कोरोना वायरस महामारी में नया पहलू जुड़ गया है। कोविड-19 वायरस के नए संस्करण (स्ट्रेन) दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। इनकी वजह से अमेरिका सहित कई देशों में कोरोना वायरस संक्रमण की अगली लहर आ चुकी है। अब विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अभी चल रहे टीकाकरण का लाभ तभी टिकाऊ रहेगा, जब जल्द से जल्द दुनिया भर में सभी लोगों का टीकाकरण हो जाए। वरना, ऐसे स्ट्रेन उभर आएंगे, जो मौजूदा वैक्सीनों को बेअसर कर देंगे। अब तक कोरोना वायरस के पांच नए स्ट्रेन की पहचान हो चुकी है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इन नए स्ट्रेन की संक्रामक क्षमता अधिक तीव्र हो सकती है। ये भी संभव है कि इनकी वजह से मृत्यु दर बढ़ जाए। जो पांच स्ट्रेन सामने हैं, उनमें एक ब्रिटिश वर्जन और एक का उत्पत्ति स्थल जापान या ब्राजील रहा है।

एक वैरिएंट दक्षिण अफ्रीका सबसे पहले में पाया गया। जबकि दो के उत्पत्ति स्थल अमेरिका का कैलिफोर्निया राज्य है। इनके बीच कम से कम एक स्ट्रेन को सुपरस्प्रेडर माना जा रहा है। यानी इसकी संक्रमण करने की क्षमता अधिक है। ये क्षमता 50 से 70 प्रतिशत तक अधिक देखी गई है। इस वर्जन की अमेरिका पर तगड़ी मार पड़ी है। न्यूयॉर्क, मिशिगन, विस्कोंसिन और अन्य अमेरिकी राज्यों में इस स्ट्रेन के कारण संक्रमण के नए हॉटस्पॉट बन गए हैँ। इस स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की संख्या औसतन 7 से 10 दिन में दो गुनी हो रही है। अब कुछ विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में पाए गए नए स्ट्रेन मौजूदा वैक्सीन के प्रभावी होने की दर को कुछ कम कर देते हैं। इस बीच एक नया स्ट्रेन सामने आया है, जो कोविड-19 के स्ट्रेन के म्यूटेशन से बना है। यानी जो नए स्ट्रेन उभरे वे भी अपना स्ट्रेन पैदा करने लगे हैं। इस नए संस्करण का ई484के दिया गया है। अमेरिकी विशेषज्ञों ने कहा है कि मुमकिन है कि यह संस्करण मौजूदा वैक्सीनों से काबू में ना आए। तो फिर घूम- फिर कर बात जांच, क्वैरेंटीन, आइसोलेशन और सोशल डिस्टेसिंग और मास्क पर आ कर ठहर गई है। यानी इसके अलावा कोई ऐसा बचाव नहीं है, जो पूरी तरह संक्रमण मुक्त रखने की गारंटी कर पाए। इसलिए टीका लेना जरूरी है, लेकिन उसके बाद अपने को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना एक छलावा साबित हो सकता है।

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