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Thursday, May 6, 2021
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न बारिस आ रही, न वैक्सीन दिख रही!

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चंद महीनों पहले तक मुझे कोरोना व मानसून की खबरें पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। इसका कारण यह था किइनकी खबरें मेरे मन में आशा व उम्मीद का संचार कर देती थी। मैं घर में कैद रहकर बंद हो गया था। जब 60 साल से ज्यादा की आयु वालों को इससे सावधान रहने की खबर पढ़ता व सुनता तो मुझे लगता कि जैसे यह बात मेरे लिए ही कही जा रही है। अब पत्नी की हिदायतों के बावजूद सोसायटी के प्रांगण में शाम को मुंह पर मास्क लगाकर टहलता हूं। मुझे बरसात बहुत अच्छी लगती है। अब यह कहना बेहतर होगा कि गर्मी बिल्कुल भी नहीं पसंद आती है। इसकी एक वजह सर्दियों में दिसंबर माह के अंत में पैदा होना हो सकता है। मुझे लगता था कि गरमी का कष्ट थोड़े से दिनों का है। जब मई जून में खबरें पढ़ता कि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश होगी व समय के पहले ही मानसून आ रहा है तो बहुत अच्छा महसूस हुआ।

सोचा इस बार मैं सोसायटी में पहले से ज्यादा पौधे लगा कर हरा भरा कर दूंगा। शाम को ठंडी हवा में टहलने लगूंगा। घर की खिड़कियों से पानी बरसता हुआ देखने का मजा लूंगा। जल्दी ही मुझे अखबार में कहीं यह पढ़ने  को मिलेगा कि बरसात ने सरकार के दावे धोए अथवा दिल्ली के इलाको में पानी भर जाने के कारण वहां फंसे वाहनों की तस्वीर देखने को मिलेगी। मगर बारिश तो मानो सरकारी दफ्तर के बाबू की तरह हो गई है। बादल कभी कभार सुबह आते है व बिना अपना कर्तव्य निभाए शाम तक मानो बाबू की तरह हाजिरी लगाकर चले जाते हैं।

उसने गरजना तो बहुत पहले ही छोड़ दिया था। अब बिजली चमकना तो दूर रहा इंद्रधनुष तक देखने को नहीं मिलता है। अब खबरें छपनी लगी है कि पिछली बार की तुलना में 48 फीसदी कम बारिश हुई है। मंगल ग्रह तक के मौसम का वादा और दावा करने वाले हमारे वैज्ञानिक आज तक एक ऐसा उपकरण नहीं बना पाए जिनके दावों के मुताबिक उनकी भविष्यवाणी सही साबित हो जाए। और तो और मेरे सैल फोन में मौसम की भविष्यवाणी करने वाले विदेशी एप तक गलत साबित होते हैं।

पहले मैं यह जानने को बेताब रहता था कि हमें कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन कब तक मिल जाएगी। कुछ खबरें इस आशय तक की आयी थी कि प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले से इसकी वैक्सीन मिल जाने का एलान कर सकते हैं। बाबा रामदेव ने तो बहुत बढ़ चढ़कर इसकी दवा बना लेने का दावा किया था जो कि चीनी पटाखे की तरह फुस्स हो गया।

अब जो खबरें आ रही हैं वो काफी परेशान करने वाली है। पहले यह आशंका थी कि बारिश के बाद कोरोना प्रभावित मामलों की संख्या बढ़ सकती है मगर अब तो बारिश के बिना ही देश भर में इससे प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने लगी है। कुछ राज्यों ने तो अपने यहां लाकडाउन पुनः लगा दिया है। सबसे चिंताजनक खबर तो यह है कि वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सीन के कारगर होने पर संदेह जताया है। अभी तक माना जा रहा था कि इसकी वैक्सीन जल्दी ही दुनिया में कोरोना संकट से बचा लेगी लेकिन कुछ नए शोधों में दावा है कि इस बीमारी से ठीक होने वालों में वायरस के खिलाफ मजबूत इम्यूनिटी नहीं बन पा रही है। जिन लोगों में यह बन भी रही है वहां कुछ महीनों में ही कम हो रही है। इसलिए वैज्ञानिकों को इसकी वैक्सीन के कारगर होने में संदेह हो रहा है।

मालूम हो कि ज्यादातर वैक्सीन इंसानी शरीर में वायरस के प्रति एक खास तरीके की एंटीबाडी तैयार करने में मदद करती है। इन एंटीबाडी से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) मजबूत बनता है और जब भी कोई वायरस शरीर पर हमला करता है तो यह प्रतिरक्षा तंत्र उससे बचाव करता है। इसी कारण दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी अपनायी जा रही है व तीन प्लाज्मा बैंक खोल दिए गए है। मगर किंग्स कालेज के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एंटीबाडी टिकाउ साबित नहीं हुई तो कुछ महीनों में इसका स्तर कम होने लगेगा और वे संक्रमण से लड़ने की क्षमता खो देंगे।

इसके माने है वैक्सीन का असर कम होने लगेगा। उधर एक बार कोरोना से बीमार पड़े लोगों के दोबारा इसका शिकार हो जाने की खबरें भी आने लगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आपातकालीन निदेशक माइक रयान ने कहा है कि यह उम्मीद करना कि कुछ महीनों में प्रभावी वैक्सीन तैयार हो जाएगी बिल्कुल भी सच नहीं है। एंटीबाडी भी कब तक प्रभावी बनी रहेगी इस बारे में हमारे पास कुछ भी जानकारी नहीं है। वहीं कोरोना मरीजों के प्लाज्मा दान करने में भी दिक्कते आ रही है।

प्लाज्मा बैंक का मानना है कि हर 10 में से तीन कोविड मरीज ही प्लाज्मा दान करने के लायक है क्योंकि उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रीलाइजिंग एंटीबाडी तैयार नहीं हुई है। इसलिए उनका प्लाज्मा लेने का कोई फायदा नहीं है। अतः जब मैं कोरोना के वैक्सीन व बारिश के बारे में खबरों वाले अखबार देखता हूं तो वे मुझे हिंदी, अंग्रेजी के नहीं बल्कि उर्दू के नजर आते है। मुझे लगने लगता है कि हमारे देश में तो कोरोना भ्रष्टाचार व मंहगाई की तरह है जो कि पता नहीं कब समाप्त होगा। तभी देखना है हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले से क्या धमाका करते हैं।

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