जरूरतें लॉकडाउन से आगे की

भारत में लॉकडाउन हो चुका है। ऐसा अचानक हुआ। प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू की अपील की थी, जो सफल रही। उसके बाद तुरंत लॉकडाउन कर दिया गया। वैसे यही कहा जाएगा कि यह जरूरी कदम है। कोरोना वायरस से बचने के लिए अब इसके लिए अलावा कोई चारा नहीं है। मगर महज इतना करना पर्याप्त नहीं है। ये बात डब्लूएचओ ने भी कही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक लॉकडाउन हटने के बाद वायरस तेजी से फैले इसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य के उपाए किए जाने जरूरी हैं। देशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और दुरुस्त करने की जरूरत है। डब्लूएचओ की इस चेतावनी को उन देशों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद खराब स्थिति में है। डब्लूएचओ के विशेषज्ञों के मुताबिक जरूरत ऐसे लोगों को ढूंढने पर जोर देने की है, जो वायरस से संक्रमित हैं। हमें उन्हें अलग-थलग (आइसोलेट) करने की जरूरत है। ऐसे लोगों को ढूंढकर उन्हें अलग करने और उन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। ये तो साफ है कि अगर हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं होंगी, तो लॉकडाउन हटने के बाद खतरा बढ़ेगा और वायरस तेजी से फैलेगा।

गौरतलब है कि चीन और कई यूरोपीय देशों और अमेरिका के बाद भारत ने भी कोरोना वायरस से निपटने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। ज्यादातार लोगों को घरों से काम करने को कहा जा रहा है। स्कूल, बार, पब और रेस्तरां बंद कर दिए गए हैं। बहरहाल, चर्चा में सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के उदाहरण हैं। ये देश यूरोप के लिए एक मॉडल साबित हो रहे हैं। वायरस के फैलाव को नियंत्रित करने के बाद हमें वायरस के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़नी होगी और उन देशों ने ऐसा करने की मिसाल पेश की है। विश्व में कोरोना से सर्वाधिक इटली प्रभावित हुआ है। इस रोग को लेकर आतंक इसलिए फैला है, क्योंकि कोरोना वायरस की कोई दवा या टीका नहीं है। इसके कई वैक्सीन पर विकसित देशों में प्रयोग चल रहा है, लेकिन अभी तक सिर्फ एक वैक्सीन का ही अमेरिका में परीक्षण शुरू हुआ है। डब्लूएचओ का कहना है कि वैक्सीन उपलब्ध होने के मामले में यथार्थवादी होने की जरूरत है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बिल्कुल सुरक्षित हो। इसमें कम से कम एक साल भी लग सकता है। तब तक सोशल डिस्टेंसिंग एक रास्ता है। मगर बाकी बातों पर भी ध्यान देना होगा।

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