भारत में कोरोना - Naya India
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भारत में कोरोना

भारत में कोरोना से संक्रमित मरीज पाए जाने से सरकार और लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हाल में एक व्यक्ति दिल्ली में और दूसरा तेलंगाना में मिला है। जांच में पता चला है कि इनमें एक इटली से आया था और दूसरा कुछ दिन पहले दुबई से लौटा था। इससे यह तो साफ है ये दोनों व्यक्ति पहले से कोरोना से संक्रमित रहे होंगे। हालांकि सरकार विदेशों खासतौर से एशियाई देशों और ईरान से आने वाले लोगों की जांच कर रही है, लेकिन इसे पुख्ता तौर पर बचाव संभव नहीं है। यों तो सरकार ने कोरोना की समस्या से निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं और दूसरे देशों में फंसे लोगों को भारत लाने जैसे काम हो रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर भारत में कोरोना के मरीज बढ़ते हैं तो क्या हमारा सरकारी तंत्र इतना चाक-चौबंद है कि इस गंभीर आपदा का सामना कर पाएगा। भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र की जो हालात है, वह किसी से छिपी नहीं है। अगर महानगरों और कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें तो हालत यह है कि ज्यादातर इलाकों में प्रथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक ठप मिलेंगे।

यह तो साबित हो ही चुका है कि इससे संक्रमित जो लोग चीन से दूसरे देशों में पहुंचे हैं, वे अपने साथ इस बीमारी को ले गए। इसलिए सबसे ज्यादा जोर इसी पर दिया जा रहा है कि लोग एक दूसरे के संपर्क में आने से बचें। पर शहरों, महानगरों की जो हालत है, उसमें यह संभव कैसे होगा, सोचने की बात है। भारत का जनसंख्या घनत्व दुनिया में सबसे ज्यादा है। ऐसे में लोगों को न एक दूसरे से अलग रखा जाता है न शहरों को बंद किया जा सकता है। इसलिए अगर बड़े पैमाने पर कोरोना का कहर भारत में आते हैं तो व्यापक स्तर पर किसी भी रूप में इससे निपटने के इंतजाम भारत में नहीं हैं। इसलिए यह समय है जब हमें ऐसा तंत्र विकसित करने के बारे में सोचना होगा जो भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने में कारगर साबित हो सके। चीन से लेकर अमेरिका तक कोरोना वायरस जिस तेजी से फैला है, उससे बड़ी चुनौती यह खड़ी हो गई है कि कैसे इसका तोड़ निकाला जाए और इसे फैलने से रोका जा सके। अमेरिका में कोरोना से छह लोग मारे जा चुके हैं। ईरान में हालात ज्यादा खराब हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे गंभीर वैश्विक आपदा का दर्जा दे चुका है। भारत उन तीस देशों में शामिल है जो वायरस खतरे के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में फिलहाल इससे बचाव के प्राथमिक तरीके ही सबसे बड़े उपाय माने जा रहे हैं जो इसे फैलने से रोक सकते हैं।

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