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नजरिया तो वही है

तब इस महामारी से आहत आम लोग और उनके विरोधी वर्तमान मनोदशा के बीच भूल-चूक लेनी-देनी की सोच से आगे बढ़ने और मिल-जुल कर उस मुसीबत का सामना करने के लिए तत्पर होते, जो देश पर आई हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री अपनी भूल को अपनी उपलब्धि बताने की सोच के साथ आए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर कोरोना महामारी के आकलन, प्रबंधन और वैक्सीन नीति के बारे में अपनी सरकार की गलतियों को स्वीकार करते, तो वे पूरे देश के नेता के रूप में बोलते नजर आते। इस महामारी से आहत आम लोग और उनके विरोधी वर्तमान मनोदशा के बीच भूल-चूक लेनी-देनी की सोच से आगे बढ़ने और मिल-जुल कर उस मुसीबत का सामना करने के लिए तत्पर होते, जो देश पर आई हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री अपनी भूल को अपनी उपलब्धि बताने की सोच के साथ आए। वैक्सीन नीति में बदलाव किया, लेकिन पहले हुई गड़बड़ी के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहरा दिया। प्रबंधन में हुई घोर गड़बड़ी का दोष अपने पहले की सरकारों पर डाल दिया। झूठ नैरेटिव सेट करने की सोच से वे नहीं उबरे। तो जाहिर है, जो लोग उनके अंध समर्थक नहीं हैं, उनमें वैसी ही तीखी प्रतिक्रिया हुई। नतीजा है कि नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक अपने नैरेटिव के साथ चलते रहेंगे और बाकी लोग अपनी समझ के साथ। देश में इस आपदा काल में विभाजन तीखा बना रहेगा।

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जहां तक वैक्सीन नीति का सवाल है, तो पिछले हफ्ते वैक्सीन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र की टीकाकरण नीति को मनमाना और तर्कहीन कहा था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट देश भर में वैक्सीन की कीमत एक समान होने की जरूरत भी बता चुका था। पिछले हफ्ते केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना करते हुए उसने कहा कि अदालतें मूक दर्शक नहीं बनी रह सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से टीकाकरण नीति पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी थी और यह भी पूछा था कि वैक्सीन कब-कब खरीदी गई है। इसके लिए साल 2021-22 के बजट में निर्धारित 35 हजार करोड़ रुपये में से अब तक हुए खर्च का हिसाब देने को भी कहा गया था। इन सभी सवालों का जवाब देने के लिए केंद्र को दो हफ्ते का समय दिया गया था। विपक्ष ने ऊपर से सरकार को घेर रखा था। तो आखिरकार भारत सरकार ने पिछले दो महीने में तीसरी बार अपनी वैक्सीन नीति में बदलाव किया है। सरकार ने 21 जून से 18 साल से ऊपर के सभी भारतीयों के लिए राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराने की बात कही है। ये अच्छी बात है। लेकिन इससे यह भी जाहिर हुआ है कि सरकार उन गलतियों को सुधारने के लिए तैयार नहीं है, जिसकी वजह से देश को ये मुसीबत झेलनी पड़ी है।

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