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आपदा में ऐसा अवसर!

omicron second generation vaccine

दुनिया भर से उठी ये मांग अब तक बेअसर ही रही है कि ये कंपनियां कोविड-19 वैक्सीन पर अपना पेटेंट खत्म करें, ताकि इस महामारी से जल्द से जल्द दुनिया को छुटकारा मिल सके। लेकिन ऐसे विश्व कल्याण की भावना से कंपनियां नहीं चलतीं। उनके लिए मुनाफे का  स्वार्थ सर्वोपरि होता है।

आपदा किस तरह दवा कंपनियों के लिए अवसर बनी, ये बात धीरे-धीरे साफ होती जा रही है। कोरोना महामारी ने दुनिया भर में भले लाखों लोगों की जान ले ली हो और करोड़ों लोगों की कमर तोड़ दी हो, दवा कंपनियों की संवेदना नहीं जगी। दुनिया भर से उठी ये मांग अब तक बेअसर ही रही है कि ये कंपनियां कोविड-19 वैक्सीन पर अपना पेटेंट खत्म करें, ताकि इस महामारी से जल्द से जल्द दुनिया को छुटकारा मिल सके। लेकिन ऐसे विश्व कल्याण की भावना से कंपनियां नहीं चलतीं। उनके लिए मुनाफे का  स्वार्थ सर्वोपरि होता है। यही वजह है कि कोविड वैक्सीन बनाने वालीं तीन कंपनियां फाइजर, बायोनटेक, और मॉडर्ना हर सेकेंड 1,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 75 हजार रुपये) कमा रही हैं। अमीर देशों को कोविड वैक्सीन बेचकर इन तीन कंपनियों को रोजाना 9.35 करोड़ डॉलर (लगभग सात अरब रुपये) की कमाई हो रही है। एक नए विशलेषण में यह बात सामने आई है। ये हकीकत तब है, जब गरीब देशों के सिर्फ दो प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन की पूरी खुराक मिली है। पीपुल्स वैक्सीन अलायंस (पीवीए) ने यह विश्लेषण कंपनियों की जारी आय रिपोर्ट के आधार पर किया।

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विश्लेषण रिपोर्ट कहती है कि कंपनियों को अरबों डॉलर की सरकारी फंडिंग मिली है, इसके बावजूद उन्होंने दवा बनाने की तकनीक और अन्य जानकारियां गरीब देशों की कंपनियों से साझा करने से इनकार कर दिया है। जबकि ऐसा करके लाखों जानें बचाई जा सकती थीं। वैसे अन्य दो वैक्सीन उत्पादकों एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन का रवैया इन तीन कंपनियों से भिन्न रहा है। एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन ने अपनी वैक्सीन को कई मामलों में बिना लाभ के बेचा है। हालांकि ऐसी खबरें हैं कि ये कंपनियां भी अब बिना लाभ वैक्सीन बेचने की नीति को छोड़ने के बारे में सोच रही हैं। भारत और दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व में सौ से ज्यादा विकासशील और गरीब देशों ने मांग उठाई थी कि कोविड वैक्सीन को पेटेंट नियमों से मुक्त किया जाए, ताकि सभी देश अपने हिसाब से वैक्सीन का उत्पादन कर सकें। इस मांग का सबसे ज्यादा विरोध जर्मनी और ब्रिटेन ने किया। पीपल्स वैक्सीन अलायंस बहुत लंबे समय से यह मांग करता आया है कि वैक्सीन पेटेंट मुक्त होनी चाहिए। इस अलायंस में ऑक्सफैम, यूएनएड्स, और अफ्रीकन अलायंस समेत करीब 80 सदस्य हैं। लेकिन जब कंपनियों की पकड़ में धनी देशों की सरकारें हों, तो फिर ऐसी मांगों पर कौन ध्यान देता है!

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