अकेले वैक्सीन से नहीं रूकेगा कोरोना - Naya India अकेले वैक्सीन से नहीं रूकेगा
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप | बेबाक विचार| नया इंडिया| %%title%% %%page%% %%sep%% %%sitename%% अकेले वैक्सीन से नहीं रूकेगा

अकेले वैक्सीन से नहीं रूकेगा कोरोना

vaccination

इसमें संदेह नहीं है कि 21 जून के बाद भारत में वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ी है और हर दिन औसतन 50 लाख से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग रही है। यह भी सही है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आई है और पिछले करीब एक हफ्ते से मरने वालों की संख्या भी एक हजार से नीचे है। लेकिन सवाल है कि क्या अकेले वैक्सीनेशन के सहारे कोरोना को रोका जा सकता है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है क्योंकि वैक्सीनेशन के बाद दुनिया के दूसरे देशों की तरह भारत में इस बात का आकलन नहीं हो रहा है कि नए वैरिएंट्स पर यह कितना कारगर हो रहा है। हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि भारत की वैक्सीन अल्फा और डेल्टा दोनों वैक्सीन पर कारगर हो रही है लेकिन हकीकत यह है कि डेल्टा वैरिएंट के ही कई नए स्ट्रेन आ गए हैं, जिनमें एक डेल्टा प्लस है। इसके बारे में अभी तक वस्तुनिष्ठ अध्ययन नहीं हो पाया है।

य​ह भी पढ़ें: दुनिया के देशों में फिर तबाही शुरू

अकेले वैक्सीन या कोरोना को संभालने का बेहतर प्रबंधन वायरस के संक्रमण को रोकने में कारगर नहीं है, इसकी मिसाल केरल में देखने को मिल रही है। देश का सबसे पहला केस केरल में आया था। लेकिन केरल की तब की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने उससे पहले ही अपने यहां तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने और पूरी केरल सरकार ने बहुत ढंग से प्रबंधन किया। इसके बावजूद दूसरी लहर में केरल में सर्वाधिक तबाही मची है। अभी तक केरल देश का एकमात्र राज्य है, जहां कोरोना की दूसरी लहर पूरी तीव्रता के साथ मौजूद है। पिछले 10 दिन से लगातार 10 हजार से ज्यादा केसेज आ रहे हैं और मरने वालों की संख्या एक सौ से ऊपर रह रही है। केरल में इसके अलावा कुछ नहीं बदला है कि अब पहले वाली स्वास्थ्य मंत्री वहां नहीं हैं, लेकिन क्या इतने भर से कोरोना प्रबंधन में केरल फिसड्डी हो गया या वायरस की दूसरी लहर नहीं थमने के कुछ और कारण हैं?

vaccine for childrens

य​ह भी पढ़ें: यह अछूत होना नहीं तो क्या?

क्या केरल में कोई नया स्ट्रेन या नया वैरिएंट तबाही मचा रहा है? या केरल के लोग लापरवाही कर रहे हैं और वैक्सीन लग जाने या हर्ड इम्यूनिटी हो जाने के झूठे प्रचार में सावधानी नहीं बरत रहे हैं? कुछ भी कारण हो सकता है लेकिन सवाल है कि यह पता कैसे चलेगा? जब तक केरल को केस स्टडी बना कर पता नहीं लगाया जाता है कि वहां कैसे दूसरी लहर खत्म नहीं हो रही है तब तक देश के बारे में भी आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता है। ध्यान रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन और दुनिया के कई कोरोना विशेषज्ञ कह चुके हैं कि जब तक सब सुरक्षित नहीं हैं, तब तक कोई सुरक्षित नहीं है। इसका मतलब है कि अगर दिल्ली के लोग सोच रहे हैं कि उनके यहां संक्रमण की दर 0.12 फीसदी हो गई है और केसेज लगभग खत्म हो गए हैं इसलिए वे सुरक्षित हैं तो यह भरोसा गलत भी साबित हो सकता है। देश के 10 राज्यों में अब भी संक्रमण की दर पांच फीसदी के करीब है और देश में हर दिन अब भी 40 से 50 हजार केस आ रहे हैं। जून के दूसरे हफ्ते के बाद से ही यह औसत चल रहा है, इसमें कमी नहीं आ रही है।

य​ह भी पढ़ें: कोविड खत्म नहीं हो रहा!

तभी सिर्फ वैक्सीनेशन के भरोसे बैठे रहना कोई रास्ता नहीं है। सरकार को प्री इम्प्ट पहल करनी होगी। वायरस का कोई नया वैरिएंट हमला करे या मौजूदा वैरिएंट कहीं पर फिर से फैले उससे पहले उसे रोकना होगा। लोगों को सावधान करना होगा। अनलॉक की प्रक्रिया में सावधानी बरतनी होगी। ज्यादा से ज्यादा लोगों को घरों में रखना होगा और उसके लिए सरकार को उनके लिए आर्थिक बंदोबस्त करना होगा। दक्षिण के मुकाबले उत्तर भारत के राज्यों में रहस्यमय तरीके से कम हो रहे केसेज पर भी नजर रखनी होगी। आखिर ऐसा कैसे हो रहा है कि साढ़े तीन करोड़ की आबादी वाले केरल में वायरस काबू में नहीं आ रहा है और 22 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश या 12 करोड़ वाले बिहार में केसेज ही नहीं आ रहे हैं! ऐसा कैसे हो रहा है, उसका अंदाजा सबको है लेकिन उस वजह से 140 करोड़ लोगों का जीवन फिर से खतरे में आ सकता है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
पंजाबी और तुस्सी-तैनूं का बेअक्ल हल्ला!
पंजाबी और तुस्सी-तैनूं का बेअक्ल हल्ला!