गहरे संकट में इंफोसिस

कभी बेहद प्रतिष्ठित रही कंपनी इंफोसिस की छवि अब तार-तार होने के करीब है। कंपनी के अनाम कर्मचारियों के एक समूह ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलिल पारेख और कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी निलांजन रॉय पर लघु अवधि में आय और लाभ बढ़ाने के लिए ‘अनैतिक व्यवहारों’ में लिप्त होने की शिकायत की है। यानी मामला कुछ-कुछ सत्यम की तरह है, जिसके ढहने से भारतीय अर्थव्यवस्था हिल गई थी। कंपनी के निदेशक मंडल को 20 सितंबर को लिखे पत्र में समूह ने कहा कि हालिया तिमाहियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कथित अनैतिक व्यवहार को हम आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं। लघु अवधि में आय और लाभ को बढ़ाने के लिए इसी तरह के कदम चालू तिमाही में भी उठाए गए हैं। ह्विसिलब्लोअर उस व्यक्ति को कहा जाता है जो अनियमितता या भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करता है। इंफोसिस के ह्विसिलब्लोअर का कहना है कि उनके पास उनके आरोपों को साबित करने के लिए ई-मेल और वॉयस रिकॉर्डिंग हैं। इंफोसिस ने एक बयान में कहा कि कंपनी की प्रक्रिया के तहत ह्विसिलब्लोअर की शिकायत को ऑडिट समिति के समक्ष रखा गया है। इन्फोसिस के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी के मुताबिक एक मुख्य शिकायत सीईओ की अमेरिका और मुंबई की अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर है।

शेयर बाजार को दी सूचना के मुताबिक नीलेकणि ने एक बयान में कहा कि समिति ने स्वतंत्र आंतरिक ऑडिटर ईकाई और कानूनी फर्म शारदुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी से स्वतंत्र जांच के लिए परामर्श शुरू कर दिया है। नीलेकणि ने कहा कि कंपनी के निदेशक मंडल के सदस्यों में से एक को 20 और 30 सितंबर 2019 को दो अज्ञात शिकायतें प्राप्त हुईं थीं। कंपनी ने ह्विसिलब्लोअर की शिकायत को ऑडिट समिति के समक्ष पेश करने जानकारी दी थी। समूह ने इस बाबत अमेरिका के नियामक सिक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन को भी तीन अक्टूबर को एक पत्र लिखा। इंफोसिस को कंपनी के कामकाज में लापरवाही को लेकर पहले भी ह्विसिलब्लोअर की शिकायत मिल चुकी हैं। इससे पहले इस तरह की एक शिकायत कंपनी के इजराइल की स्वचालन प्रौद्योगिकी कंपनी पनाया को खरीदने में की गई गड़बड़ी को लेकर की गई थी। ये खबर आने के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस के शेयर के भाव में भारी गिरावट आई है। जाहिर है, कंपनी संकट में फंस चुकी है। साथ ही इससे भारतीय कॉरपोरेट जगत को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

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