वैक्सीन आने के बावजूद

कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने के बारे में पिछले दो हफ्तों के बीच कई उत्साहवर्धक खबरें आई हैं। इससे ये उम्मीद बंधी है कि आखिरकार इस संक्रमण पर काबू पा लिया जाएगा। लेकिन ऐसा जब तक हो पाएगा, उसमें अभी देर है। भारत में तो फरवरी के पहले वैक्सीन नहीं आ सकेगी, ये बात आधिकारिक रूप से कह दी गई है। वैक्सीन आना और फिर उसका सब तक पहुंचना एक समय लगने वाली प्रक्रिया है। इस बीच कोरोना महामारी का कहर बना रहेगा। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों की इस चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए कि 2021 की शुरुआत में खासकर यूरोप को महामारी की घातक तीसरी लहर का सामना करना पड़ सकता है। भारत में तो अभी ही दूसरी लहर के संकेत मिलने लगे हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की इस चेतावनी भी गौर करना चाहिए कि महामारी की दूसरी लहर सूनामी की तरह हो सकती है। डब्लूएचओ के अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में जब पहली लहर काबू में आ गई, तब ज्यादातर आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण करने से चूक गए। अब हमारे सामने दूसरी लहर है।

अगर अब भी जरूरी बुनियादी ढांचा खड़ा नहीं किया जाता है, तो अगले साल की शुरुआत में हमारे सामने तीसरी लहर होगी। यह बात सही है कि यूरोप में गर्मियों में हालात बेहतर थे। लेकिन सर्दियां आते ही संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा। 8.4 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी में 22 नवंबर को 14 हजार नए मामले दर्ज किए गए। डब्लूएचओ के मुताबिक एक बड़ी समस्या यह रही कि बहुत से नेताओं को तो यह समझ में ही नहीं आया कि वायरस “एक्स्पोनेंशियली” फैलता है, ‘अरिथमैटिकली’ नहीं। एक्स्पोनेंशियल का मतलब होता है कि संख्या एक सप्ताह में आठ गुना बढ़ सकती है, दो हफ्तों में यह 40 गुना हो सकती है और तीन हफ्तों में 300 गुना, फिर चार हफ्तों में शायद 1000 गुना से भी ज्यादा और इसी तरह यह बढ़ती रह सकती है। अच्छी बात यह है कि फिलहाल एशिया में ये संख्या अपेक्षाकृत रूप से कम है। उपाय यही है कि लोग पूरी तरह से वायरस के फैलाव को रोकने में लगें। दूरी बना कर रखें, मास्क पहनें, बीमार व्यक्ति को अलग-थलग रखें, हाथ और सतह साफ करते रहते हैं, और जिन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है उन पर विशेष ध्यान दें। ये सावधानियां अभी हमें लंबे समय तक बरतनी होगी, तभी हम अपनी जान बचा पाएंगे।

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