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साइबर हमला, चीन का नया हथियार!

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अजीत द्विवेदीhttp://www.nayaindia.com
पत्रकारिता का 25 साल का सफर सिर्फ पढ़ने और लिखने में गुजरा। खबर के हर माध्यम का अनुभव। ‘जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से शुरू करके श्री हरिशंकर व्यास के संसर्ग में उनके हर प्रयोग का साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और अब ‘नया इंडिया’ के साथ। बीच में थोड़े समय ‘दैनिक भास्कर’ में सहायक संपादक और हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ शुरू करने वाली टीम में सहभागी।

भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में 12 अक्टूबर 2020 को कई घंटों के लिए बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। लोकल ट्रेनें दो घंटे तक खड़ी रहीं और बाकी आपूर्ति 10 से 12 घंटे तक टप्प रही थी। महाराष्ट्र सरकार ने इसकी जांच के लिए जो कमेटी बनाई थी उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पावर सब स्टेशन्स के कंप्यूटर सिस्टम पर साइबर अटैक हुआ था और लोड डिस्पैच को डिस्टर्ब किया गया था। टाटा पावर ने बताया कि ‘साइमलटेनिएस सबस्टेशन ट्रिपिंग’ की वजह से बिजली आपूर्ति बाधित हुई। यह अपने आप में साइबर हमले का संकेत था। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी एक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की। अखबार ने साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनी ‘रिकार्डेड फ्यूचर’ के हवाले से बताया कि चीन के मालवेयर ‘रेडइको’ ने इस साइबर हमले को अंजाम दिया। जितनी तेजी से यह खबर आई उतनी ही तेजी से भारत सरकार के ऊर्जा मंत्री ने इसका खंडन किया और दावा किया कि मुंबई में मानवीय चूक की वजह से बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी, वह कोई साइबर अटैक नहीं था।

भगवान जाने भारत सरकार ने ऐसा क्यों किया लेकिन इससे हकीकत नहीं बदलती है। चीन का साइबर आतंकवाद एक ऐसी हकीकत है, जिसका सामना पूरी दुनिया कर रही है। खुद भारत अनेक बार इस हमले का शिकार हो चुका है। इसके बावजूद भारत सरकार का रवैया शुतुरमुर्ग की तरह रेत में गर्दन गाड़ लेने वाला है। चीन के हैकर और साइबर आतंकवादी भारत के सैकड़ों संस्थानों, संगठनों पर साइबर हमला कर चुके हैं। अनगिनत बार यह हमला हुआ है। इस साल 24 फरवरी को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार बंद रहा था तो उसका कारण साइबर हमला था। एनएसई ने कहा है कि जिस तरह से सुबह 9.54 बजे से लेकर 11.43 तक एक-एक करके सारे ऑपरेशन ठप्प हुए, वह कोई तकनीकी खराबी या संचार प्रणाली की विफलता नहीं थी, बल्कि साइबर हमला था।

अमेरिकी कंपनी ‘रिकॉर्डेड फ्यूचर’ ने दावा किया है कि चाइनीज मालवेयर ‘रेडइको’ ने सिर्फ मुंबई में बिजली आपूर्ति के सिस्टम को हैक नहीं किया था, बल्कि कई और सुविधाओं को निशाना बनाया था। मुंबई का खुलासा होने के बाद तेलंगाना सरकार ने दावा किया कि 12 अक्टूबर 2020 को ही उसकी बिजली आपूर्ति भी बाधित करने का प्रयास किया गया था। एक साथ 40 सब-स्टेशन्स पर साइबर अटैक हुआ था पर कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने तत्काल उसे पकड़ लिया और हमले को विफल कर दिया। चीन के हैकरों ने दिल्ली की बिजली आपूर्ति को भी  प्रभावित करने का प्रयास किया था और कर्नाटक में एनटीपीसी के कुडगी पावर प्लांट पर भी अटैक किया था। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट पर चीन ने साइबर हमला किया था तो वीओ चिदंबरम बंदरगाह पर भी हमला हुआ था। यह जाना हुआ तथ्य है कि चीन ने भारत में कोरोना वायरसरोधी टीके के उत्पादन की फैसिलिटी को भी निशाना बनाया था। पिछले साल दिसंबर में भारतीय स्टेट बैंक और नवंबर दिसंबर 2019-2020 में एचडीएफसी बैंक साइबर हमले का शिकार हुए थे।

भारत पता नहीं किस मजबूरी में चीन के साइबर हमले से या तो इनकार कर रहा है या उसे कमतर करके दिखा रहा है। जबकि दूसरी ओर सारी दुनिया इससे त्रस्त है और चीन के खिलाफ कार्रवाई के लिए कमर कस रही है। तकनीक के मामले में सर्वाधिक सक्षम देश अमेरिका में सबसे ज्यादा चिंता है। भारत पर साइबर हमले का खुलासा हुआ तो अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य फ्रैंक पलोन ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि वह भारत का समर्थन करे और चीन को सबक सिखाए। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने इस खुलासे के बाद स्वीकार किया कि चीन एक बड़ा साइबर खतरा बन गया है और उसकी वजह से अमेरिका 5जी तकनीक को लेकर चिंता में है। नेड प्राइस ने कहा है कि 5जी अमेरिका की प्राथमिकता है पर चिंता है कि चीन इसे प्रभावित या नियंत्रित कर सकता है। अमेरिका 5जी के पूरे नेटवर्क में ऐसा कोई उपकरण नहीं लगाना चाहता है, जिसे चीन ‘मैनिपुलेट, डिसरप्ट या कंट्रोल’ कर सके।

चीन ने अमेरिका में 30 हजार संस्थाओं और संगठनों को साइबर हमले का शिकार बनाया है। साइबर सिक्योरिटी न्यूज की एक वेबसाइट पर इसके विशेषज्ञ ब्रायन क्रेब्स ने इस बारे में विस्तार से लिखा है। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेनिफर प्साकी ने माना कि चीन का साइबर हमला एक बड़ा और सक्रिय खतरा है। उसने अमेरिका में बड़ी हैंकिंग करने यानी नासा और एनएसए के सिस्टम में घुसपैठ करने का प्रयास तो किया ही साथ ही छोटे कारोबारियों-उद्यमों को भी निशाना बनाया, स्थानीय प्रशासन के सिस्टम में घुसपैठ की और पब्लिक यूटिलिटी के सिस्टम को हैक करने का प्रयास किया।

अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में साइबर नेटवर्क पर हो रहे हमले की बात माइक्रोसॉफ्ट ने भी स्वीकार किया है और कहा है कि ‘हैफनियम’ नाम का ग्रुप है, जो चीन के समर्थन से दुनिया पर साइबर हमले कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक यह एक ‘हाईली स्किल्ड और आधुनिक ग्रुप है’, जिसे चीन का समर्थन है। उसने यह भी बताया है कि इस ग्रुप के हैकर ई-मेल एक्सचेंज या नेटवर्क की दूसरी ऐसी कमियों का फायदा उठा रहे हैं, जो पहले से अज्ञात थीं। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सिस्टम की ऐसी कमियों को दूर करने के लिए नए अपडेट्स जारी किए हैं। उसका दावा है कि अमेरिका में ही सर्वर किराए पर लेकर चीन के हैकर अमेरिका को परेशान कर रहे हैं और सारी दुनिया में साइबर अटैक कर रहे हैं।

सोचें, अमेरिका जैसे डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा वाले समर्थ देश में जब चीन के हैकर इतना आतंक पैदा कर सकते हैं तो भारत के डिजिटल सिस्टम की क्या बिसात है? भारत में तो झारखंड के छोटे से कस्बानुमा शहर जामताड़ा में बैठे कुछ नौजवान साइबर फ्रॉड करके लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगा देते हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन क्या कर सकता है? असल में भारत में डिजिटल क्रांति अधपकी रह गई है। यह पहले अपने स्वाभाविक रफ्तार से चल रही थी। जिस रफ्तार से डिजिटल सिस्टम विकसित हो रहा था उसी हिसाब से साइबर सुरक्षा भी बन रही थी। लेकिन केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद डिजिटल इंडिया का अभियान शुरू हुआ और सब कुछ डिजिटल कर देने की अंधी दौड़ शुरू हो गई। नवंबर 2016 में नोटबंदी के फैसले के बाद जब काले धन का नैरेटिव ज्यादा नहीं चला तो बिना सोचे-विचारे किए गए इस फैसले को न्यायसंगत ठहराने के लिए कैशलेस इकोनॉमी बनाने का अभियान अलग से शुरू हो गया।

लोगों से नेटबैंकिंग अपनाने की अपीलें होने लगीं और डिजिटल पेमेंट का महत्व बताते हुए इसका प्रचार शुरू किया गया। एक तरफ डिजिटल इंडिया का अभियान चल रहा था, लोगों को डिजिलॉकर का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा था और बताया जा रहा था कितने फुट ऊंची दिवारों के पीछे डिजिटल इंडिया के सर्वर सुरक्षित रखे जा रहे हैं तो दूसरी ओर डिजिटल इकोनॉमी बनाने का अभियान चल रहा था। हकीकत यह है कि भारत को जितनी तेजी से डिजिटल बनाने का अभियान चला उतनी तेजी से या उतनी तीव्रता के साथ साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास नहीं हुआ। इसका नतीजा यह हुआ है कि भारत का पूरा डिजिटल सिस्टम दुनिया के और खास कर चीन व पाकिस्तान के हैकर्स के लिए आसान शिकार बन गया। वे बैंकिंग व वित्तीय सिस्टम और ट्रेनों के परिचालन से लेकर बिजली आपूर्ति तक के सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। भारत को इस हकीकत को स्वीकार करना चाहिए कि चीन भारत के खिलाफ पारंपरिक युद्ध के साथ साथ साइबर वार भी छेड़े हुए है और इससे निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी करनी चाहिए।

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