राजधानी में ही भारत-पाकिस्तान!

आजाद भारत, उसकी राजधानी दिल्ली और शासक हिंदू महाराजाधिराज नरेंद्र मोदी-अमित शाह मगर इसके बावजूद घर-घर मैसेज बनवाया जा रहा है कि दिल्ली में पाकिस्तान है तभी आठ फरवरी का चुनाव दिल्ली में इंडिया बनाम पाकिस्तान मैच है! हिंदुओं को ‘सोच समझ कर फैसला करना पड़ेगा। ये लोग आपके घरों में घुसेंगे। आपकी बहन, बेटियों को उठाएंगे, उनका रेप करेंगे। उनको मारेंगे। इसलिए आज समय है। कल मोदीजी और अमित शाह जी बचाने नहीं आएंगे।’ तो भारत के गृह मंत्री का आह्वान था कि ‘बटन इतने ग़ुस्से से दबाना कि बटन यहां बाबरपुर में दबे। करंट तुरंत शाहीन बाग़ के अंदर लगे।’ फिर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपनी सभा में ललकारते हुए नारा लगाया- “देश के गद्दारों को…” और लोगों ने जवाब दिया “गोली मारो **** को!”

 

क्या यह भारत राष्ट्र-राज्य के मौजूदा हिंदू हुक्मरानों द्वारा अधिकृत तौर पर देश-दुनिया से यह जतलाना नहीं है कि एक संविधान, एक झंडा और उसमें देश हिंदू और पाकिस्तान दो! दिल्ली में यदि आठ फरवरी को हिंदू नहीं जीते तो भारत की राजधानी सीरिया हो जाएगी, दिल्ली कश्मीर में कन्वर्ट होगा और हिंदुओं का जीना दूभर हो जाएगा!

सोचें, क्या सौ साल पहले अंग्रेजों ने ‘डिवाइड एंड रूल’ की अपनी रीति-नीति में दिल्ली के अंदर हिंदू और मुसलमानों का ऐसा आमने-सामने वाला अखाड़ा बनवाया था? अपना देश, हिंदू राज, नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल हिंदू, अमित शाह हिंदू सब हिंदू लेकिन मुसलमानों के एक शाहीन बाग के धरने को पाकिस्तान का मूर्त रूप बना देना हिंदू की गौरव-ताकत दास्तां है या डर और मूर्खता का नगाड़ा है? दुनिया में क्या अर्थ निकल रहा होगा? मुसलमान के घर-घर में क्या सोचा जा रहा होगा?

अंग्रेज हों या उनसे पहले औरगंजेब या निकोल मैकियावेली और चाणक्य के हवाले सत्ता और राज के ताकत, अनैतिकवादी हथकंडों पर चलने वाले दिल्ली तख्त के तमाम राजा-सुल्तान-बादशाह, प्रधानमंत्रियों ने चाहे जो किया है यह कभी प्रसंग सुनने को नहीं मिला कि बादशाह ने दिल्ली में हिंदू बनाम मुसलमान के दो अखाड़े बना कर यह आह्वान बनाया या बनवाया हो कि यदि हार गए तो जीतने वाले लोग आपके घरों में घुसेंगे। आपकी बहन, बेटियों को उठाएंगे, उनका रेप करेंगे। उनको मारेंगे।

सचमुच कभी सपने में नहीं सोचा कि एक मुफसिल चुनाव को जीतने के लिए हिंदुओं से कहा जाएगा कि यदि हमें वोट नहीं मिला तो दिल्ली बन जाएगा सीरिया, कश्मीर! बटन दबाओ मारो करंट!

जवाब संभव है कि यह चाणक्य नीति है। हिंदुओं के राज करने की कला है। इसी तरह धीरे-धीरे पका कर भारत का हिंदू राष्ट्र बनना संभव होगा। पाकिस्तान में पटाखे की चेतावनी से शुरू सिलसिला श्मशान बनाम कब्रिस्तान, पानीपत की लड़ाई और दिल्ली तब बनेगा सीरिया-कश्मीर का नैरेटिव उस ग्रैंड योजना पर क्रमबद्ध अमल है, जिससे भारत हिंदू राष्ट्र मान लिया जाए और मुसलमान अपनी हैसियत समझ जाएंगे!क्या दुनिया में ऐसा व्यवहार, इस तरह चुनाव लड़ना किसी लोकतंत्र में सुनने-देखने को मिला? और क्या इस तरह के राजनीतिक व्यवहार से कोई राष्ट्र अपनी कौम, अपने धर्म की पहचान के साथ शिखर की मंजिल प्राप्त कर पाया है?

सोचें, दिल्ली के चुनाव को किस तरह से मोड़ने की कोशिश है? निश्चित ही शाहीन बाग का धरना वैश्विक पैमाने में, इस्लामी जमात में एक भारी मैसेज लिए हुए है तो उसी पर अमित शाह का हिंदुओं को एकजुट बनाने, हिंदुओं के मनोभाव में कॉमन दुश्मन को पैठाने का भाव बनवा मारो करंट का जो नैरेटिव बनवाया है वह येन केन-प्रकारेण चुनाव जीतने की जिद्द में बनी रणनीति है। यह इतिहासजन्य तथ्य है कि नेता दो तरह के होते हैं। सत्ता और ताकत पाने के दो तरीके हैं। या तो डिवाइड एंड रूल का तरीका या लोगों को जोड़ते हुए उनमें कुछ बड़ा मकसद बनवाने के नेतृत्व का तरीका है।

इसकी कसौटी में दिल्ली के चुनाव पर गौर करें तो तस्वीर बनेगी कि अरविंद केजरीवाल ने छोटे-छोटे काम कर सबको याकि हिंदू व मुसलमान दोनों के साझे (याकि आम जनता, प्रजा) यूनाइट करते हुए वोट लेने की रणनीति में काम किया हुआ है। उससे पार कैसे पाया जाए तो जाहिर है मोदी-शाह की रणनीति में फोकस है कि लोग केजरीवाल के काम और बातों में न आएं और वे हिंदू बनाम मुसलमान में बंट जाए। हिंदू एकजुट हो शाहीन बाग, बुर्कों-मुस्लिम चेहरों को देख खतरा बूझने लगे और जिहाद बनाम क्रूसेड के मनोभाव में आमने-सामने के दो अखाड़े बनें।

अब यह बात तब समझ आ सकती थी यदि मोदी-शाह देश की सत्ता के सौ प्रतिशत मालिक नहीं होते। जब सब कुछ इनके पास है तब देश की राजधानी में ही कश्मीर-सीरिया जैसे हालातों के जुमले लिवा लाना क्या कोई तुक वाली, चाणक्य वाली बात है?

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