रोजगार की शिक्षा

दिल्ली की सरकार ने नौकरी की गारंटी देने वाली पढ़ाई शुरू कराने की दिशा में जो कदम उठाया है, वह स्वागतयोग्य पहल है। दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने सोमवार को कौशल और उद्यमिता विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। देश में अपनी तरह के इस पहले विश्वविद्यालय की स्थापना का मूल मकसद उद्योगों की जरूरत के हिसाब से पाठ्क्रम तैयार करना और नौजवानों को प्रशिक्षित करना है। इस विश्वविद्यालय को छोटे से लेकर बड़े पाठ्यक्रमों और शोध कार्यों के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इससे हर तरह के रोजगार का प्रशिक्षण और कौशल छात्रों को हासिल हो सकेगा। यों तो औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए आईटीआई जैसे प्रशिक्षण संस्थान पहले से ही चल रहे हैं लेकिन इनकी उपादेयता सवालों के घेरे में है। ये संस्थान आज भी पेशेवर तरीका नहीं अपना पाए हैं।

रोजगार मुहैया कराने वाली शिक्षा की दिशा में पहल की जरूरत लंबे समय से महसूस होती रही है और समय-समय पर ऐसे संस्थानों की स्थापना के लिए जोर भी दिया जाता रहा है। हालांकि कहा जा सकता है कि अब दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए नौजवानों को लुभाने के लिए सरकार ऐसे कदम उठछा रही है। पर इसमें कोई दो राय नहीं कि अगर ऐसी योजनाओं के के पीछे मंशा साफ हो तो इस तरह के प्रयासों में ही कामयाबी के सूत्र छिपे होते हैं। अच्छी बात यह है कि प्रस्तावित कौशल और उद्यमिता विश्वविद्यालय में दिल्ली में चल रहे सभी आईटीआई संस्थानों, पॉलिटेक्निक सस्थानों का विलय कर दिया जाएगा। इस विश्वविद्यालय में तीन महीने के पाठ्यक्रम से लेकर उच्च अध्ययन और शोध तक काम होगा। विश्वविद्यालय देशी-विदेशी उद्योग संस्थानों, संगठनों से करार करेगा और उन्हें दक्ष कामगार मुहैया कराएगा। हाल में केंद्रीय श्रम मंत्री ने तो यह कहा भी था कि लोगों को रोजगार इसलिए नहीं मिल पा रहा है क्योंकि वे काम में दक्ष नहीं हैं और उद्योगों की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ऐसे में अगर दिल्ली सरकार ने नए जमाने के हिसाब से दक्ष कामगार तैयार का बीड़ा उठाया है तो यह बड़ा कदम है।

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