अदालत परिसर में जंग!

देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच अदालत परिसर में जंग हुई। शुरुआत बीते शनिवार को हुई। एक निचली अदालत अदालत के परिसर में गोली चली। कई पुलिसकर्मी और वकील घायल हो गए। पुलिस की कई गाड़ियां और कई निजी मोटरसाइकिलें जला दी गईं। खबरों के मुताबिक मामला पार्किंग को लेकर एक वकील और अदालत के परिसर में कैदियों के हवालात के बाहर तैनात एक पुलिसकर्मी के बीच हुई बहस से बात बढ़ी। देखते ही देखते तीस हजारी अदालत के वकीलों और पुलिस के बीच हिंसक झगड़े का रूप ले लिया। झगड़ा इस कदर हिंसक हो गया कि पुलिस की तरफ से गोली भी चल गई और एक वकील घायल हो गया। उसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने खड़े हैं। इस घटनाक्रम में वकीलों का उग्र और हिंसक रूप सामने आया है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो आए, जिनमें वकीलों को मार पीट और तोड़-फोड़ करते हुए साफ देखा गया।

एक वीडियो में एक पुलिसकर्मी को बेरहमी से मारते-पीटते देखा गया। कुछ वीडियो में पुलिसकर्मी भी एक अधिवक्ता को पीटते हुए और तोड़-फोड़ करते देखे गए हैं। शनिवार की घटना की तह तक पहुंचने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक न्यायिक जांच बैठा दी है। जांच का जिम्मा दिल्ली हाई कोर्ट के ही पूर्व जज एसपी गर्ग को सौंपा गया है। उन्हें जांच पूरी करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है। बहरहाल, मुद्दा सिर्फ एक घटना नहीं है। अतीत में भी वकीलों का अराजक व्यवहार देखने को मिला है। लेकिन तब उसे रोकने की कोशिश नहीं की गई। मसलन, जब जेएनयू से जुड़ी घटना में पेश किए गए छात्र नेता कन्हैया कुमार की अदालत परिसर में वकीलों ने पिटाई की, तब ना तो पुलिस ने अपना कर्त्तव्य निभाया, ना ही उसको लेकर समाज में चिंता देखी गई। जबकि अगर ऐसे व्यवहार को कभी माफ किया जाता है, तो उससे आगे का रास्ता खुलता है। ताजा घटना से ये बात साफ हो गई है। वैसे जानकारों के अनुसार इस घटना के पीछे एक गंभीर समस्या है और वह है दंड न्याय प्रणाली का पतन। इसकी वजह से आज भीड़तंत्र का राज है। हर व्यक्ति छोटी से छोटी बात पर उग्र हो जाता है और उसके बाद हत्याएं और पीट पीट कर मार देने की वारदातें होती हैं। पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच यह पहली झड़प नहीं है और उनके बीच तना-तनी बनी ही रहती है। क्या अब इस पर विराम लगेगा?

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