मामला बेहद गंभीर है

दविंदर सिंह का मामला गंभीर है। उनकी गिरफ्तारी से सुरक्षा एजेंसियों के एक हिस्से और आतंकवादियों के बीच मिलीभगत का शक गहरा गया है। दविंदर सिंह का नाम पहले भी विवादों में आया है। पिछले शनिवार की रात पुलिस ने दक्षिणी कश्मीर में एक तेज दौड़ती गाड़ी को रोक कर उसमें सवार डिप्टी पुलिस अधीक्षक दविंदर सिंह, दो आतंकवादियों और उनके कथित सिविलियन सहायक को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार किए गए आतंकियों में से एक नवीद बाबा कश्मीर के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का शीर्ष कमांडर है। बाबा पहले कश्मीर पुलिस में ही भर्ती था, लेकिन उसने 2017 में पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी। तब वह चार हथियार साथ ले कर भाग गया था। इस मामले को लेकर भारत के रक्षा तंत्र में चिंताएं पैदा हो गईं हैं। विशेष रूप से इसलिए पिछले पांच महीनों से कश्मीर रक्षा-बलों की कड़ी निगरानी में है। स्पष्टतः ये बहुत संवेदनशील मामला है। सभी इंटेलिजेंस एजेंसियां और पुलिस साथ में इस अधिकारी से पूछताछ कर रहे हैं। हालत को देखते हुए यह एक जघन्य अपराध है। सिंह लंबे समय से पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप में रहे हैं, जो एक आतंक-विरोधी दस्ता है। कश्मीरी और मानवाधिकार समूह इस दस्ते पर तीन दशकों से मानवाधिकारों के उल्लंघन, हत्याओं, उत्पीड़न, बलात्कार और फिरौती के लिए संदिग्धों और नागरिकों को पकड़ने का आरोप लगाते आए हैं। पकड़े जाने से पहले सिंह श्रीनगर हवाई अड्डे पर हाईजैक विरोधी इकाई में कार्यरत थे। बतौर एक आतंक-विरोधी अधिकारी, उन पर अकसर संदिग्धों के उत्पीड़न के आरोप लगते रहे। इनमें एक 19 साल का छात्र भी शामिल था जिसका, जम्मू-कश्मीर कोएलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के अनुसार सिंह ने 2000 में अपहरण कर लिया था। बाद में उसे मार भी दिया था। अफजल गुरु ने भी उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। अफजल को 2013 में नई दिल्ली में तिहाड़ जेल में 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकवादी हमले में शामिल होने के जुर्म में फांसी लगा दी गई थी। गुरु ने आरोप लगाया था कि संसद पर हमले में शामिल एक प्रमुख आतंकवादी को सिंह ने ही उनसे मिलवाया था और उसे दिल्ली में किराये पर मकान, गाड़ी और अन्य जरूरत की चीजें दिलवाने पर मजबूर किया था। इन आरोपों के बावजूद दविंदर सिंह बचे रहे। लेकिन अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है, तो ये सवाल उठा है कि क्या उनके जैसे और भी अफसर हैं, जो देशद्रोहियों से मिले हुए हैं?

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