ट्रंप ने ये हाल कर दिया

डॉनल्ड ट्रंप को अमेरिकी इतिहास में ऐसे राष्ट्रपति के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने देश की राजनीतिक प्रणाली को उतनी चोट पहुंचाई, जितनी इसके पहले शायद ही किसी और ने की हो। खास कर देश की चुनाव प्रणाली की साख को उन्होंने इतना लांछित कर दिया है कि अब अमेरिका के विरोधी देश जब-तब उस पर कटाक्ष कर देते हैं। यह अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार ही हुआ है कि आखिरी वक्त तक कोई राष्ट्रपति अपनी हार मानने को तैयार ना हो। इसी का परिणाम है कि अमेरिका के सभी जीवित दस पूर्व रक्षामंत्रियों ने सेना को चुनावी विवाद से दूर रहने की चेतावनी दी है। ऐसा भी अमेरिकी इतिहास में पहली बार ही हुआ है कि पूर्व रक्षा मंत्रियों को मिल कर सेना के लिए इस तरह का बयान जारी करना पड़ा हो। इसमें लिखा गया कि इस सिलसिले में सेना का कोई भी कदम “खतरनाक, गैरकानूनी और असंवैधानिक” होगा। 20 जनवरी को अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन शपथ ग्रहण करेंगे।

नवंबर से अब तक ट्रंप जिस तरह की कोशिशें करते रहे हैं, उन्हें देखते हुए बहुत लोगों को शक है कि शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले ट्रंप कोई नया पैंतरा अपना सकते हैं। पूर्व रक्षा मंत्रियों ने अपने बयान में एक बार भी ट्रंप का नाम नहीं लिया। लेकिन उन्होंने कहा कि 3 नवंबर के चुनाव के बाद बार बार वोटों की दोबारा गिनती कराई गई, अदालत को भी बीच में लाया गया, लेकिन नतीजा नहीं बदला। पूर्व रक्षा मंत्रियों ने चिंता व्यक्त की कि नतीजों को पलटने की कोशिश में सेना का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावी विवाद को निपटाने के लिए अगर अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई, तो यह देश को एक खतरनाक, गैर कानूनी और असंवैधानिक क्षेत्र में पहुंचा देगा। ये बयान लगभग उसी समय आया, जब अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने डॉनल्ड ट्रंप की एक ऑडियो क्लिप जारी की। इस बातचीत में ट्रंप जॉर्जिया के मुख्य चुनाव अधिकारी पर दबाव बनाते हुए सुने गए। उन्होंने कहा- “जॉर्जिया के लोग गुस्से में हैं। इस देश के लोग गुस्से में हैं। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि आप 11,780 वोट ढूंढें, क्योंकि हम जीते हैं।” यानी ट्रंप चुनाव नतीजे को बदलवाना चाहते थे। उनकी इसी कोशिश ने अमेरिकी लोकतंत्र को आज चिंताजनक स्थिति में ला खड़ा किया है।

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