nayaindia war memorial indian army फ़ौजी स्मारक: फ़िज़ूल की बहस
बेबाक विचार | डा .वैदिक कॉलम| नया इंडिया| war memorial indian army फ़ौजी स्मारक: फ़िज़ूल की बहस

फ़ौजी स्मारक: फ़िज़ूल की बहस

war memorial indian army

सभी देशवासियों के लिए यह खुशखबर है कि अब इंडिया गेट पर सुभाषचंद्र बोस की भव्य प्रतिमा सुसज्जित की जाएगी। इसे मैं हमारे नेताओं की भूल-सुधार कहूंगा, क्योंकि उस स्थान से जार्ज पंचम की प्रतिमा को हटे 52 साल हो गए लेकिन किसी सरकार के दिमाग में यह बात नहीं आई कि वहां चंद्रशेखर आजाद या भगतसिंह या सुभाष बाबू की प्रतिमा को प्रतिष्ठित किया जाए। अब सुभाष बाबू की प्रतिमा तो वहां लगेगी ही, अब सरकार ने एक काम और कर दिया है, जिसकी फिजूल ही आलोचना हो रही है। वह है, अमर जवान ज्योति और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को मिलाकर एक कर दिया गया है।

यह ज्योति बांग्लादेश में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में 1972 में स्थापित हुई थी और उसके पहले और बाद के युद्धों में शहीद हुए जवानों के लिए पास में ही 2019 में एक स्मारक बना दिया गया था। अब सरकार ने इन दोनों को मिलाकर जो एक पूर्ण स्मारक बनाया है तो उसकी आलोचना यह कहकर हो रही है कि इंदिरा गांधी के बनाए हुए स्मारक को नष्ट करके मोदी अपना नाम चमकवाना चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने अपने बनवाए हुए स्मारक में उसे विलीन करवा दिया है।

कल भारतीय टेलिविजन चैनलों पर इसी मुद्दे को लेकर दिन भर उठापटक चलती रही। जो आरोप लगाया जा रहा है, वह तभी सही होता जबकि अमर जवान ज्योति को जार्ज पंचम की मूर्ति की तरह हटा या बुझा दिया जाता। अब ज्योति और स्मारक को मिला देने से संयुक्त ज्योति और भी तेजस्वी हो जाएगी। इस महाज्योति में अब उन 3843 जवानों के नाम भी शिलालेख पर लिखे जाएंगे, जिनका बांग्लादेश में बलिदान हुआ था। पहले ये नाम नहीं लिखे गए थे। अब संयुक्त स्मारक में कुल 24,466 जवानों के नाम अंकित होंगे, जो 1947 से अब तक के सभी युद्धों या मुठभेड़ों या आतंकी मुकाबलों में शहीद हुए हैं। ये नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित होंगे।

Read also पाकिस्तान से रिश्ते सुधरने की सोचे ही नहीं!

इंडिया गेट का निर्माण अंग्रेज शासकों ने 1931 में करवाया था ताकि प्रथम महायुद्ध और अफगान-ब्रिटिश युद्धों में शहीद हुए भारतीय नौजवानों को याद रखा जा सके। उनकी संख्या 84,000 मानी जाती है। अब यदि अपने सभी भारतीय जवानों का स्मारक एक ही जगह हो तो यह ज्यादा अच्छा है। सभी के लिए एक ही भव्य श्रद्धांजलि समारोह होगा।

भारत में किसी भी पार्टी का प्रधानमंत्री हो, सभी शहीद उसके लिए तो एक समान ही होने चाहिए। कांग्रेसी-काल और भाजपा-काल के शहीदों में फर्क करना और उनके लिए अलग-अलग स्मारक खड़े करना कहाँ तक ठीक है? नरेंद्र मोदी यदि अमर जवान ज्योति के लिए यह नहीं कहते कि किसी खास परिवार के नाम पर ही स्मारक खड़े किए जाते हैं तो शायद यह फिजूल का वितंडावाद खड़ा नहीं होता। कांग्रेसियों की हालत पहले ही खस्ता है। यदि आप जले पर नमक छिड़केंगे तो मरीज शोर तो मचाएगा ही।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

Leave a comment

Your email address will not be published.

14 − 6 =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
नवजोत सिद्धू ने सरेंडर किया
नवजोत सिद्धू ने सरेंडर किया