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नागरिकताः केरल में बगावत

केरल विधानसभा ने आज वह काम कर दिया है, जो आज तक देश की किसी विधानसभा ने नहीं किया। मेरी जानकारी में ऐसा कोई तथ्य नहीं है कि केंद्र सरकार और संसद ने स्पष्ट बहुमत से कोई कानून पारित किया हो और उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी हो गए हों, इसके बावजूद किसी राज्य की विधानसभा ने लगभग सर्वानुमति से उस कानून को लागू नहीं करने का फैसला किया हो।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पूरी विधानसभा ने वोट दिया और पक्ष में भाजपा के अकेले विधायक ने। इसी कानून के खिलाफ सत्तारुढ़ मार्क्सवादी पार्टी और उसकी विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने जब मिला-जुला विरोध प्रदर्शन किया तो केरल के कई कांग्रेसी नेताओं को लगा कि कम्युनिस्टों के साथ किसी भी मुद्दे पर हाथ मिलाना ठीक नहीं है। लेकिन अब विधानसभा में दोनों परस्पर विरोधी पार्टियों का मिल-जुल वोट करना तो हाथ मिलाना क्या, दिलो-दिमाग मिलाना हो गया।

यहां असली सवाल यह है कि किसी राज्य का इस तरह केंद्र सरकार और संसद के विरुद्ध जाना क्या उचित है, क्या संवैधानिक है, क्या संघात्मक शासन प्रणाली के अनुकूल है ? इन तीनों प्रश्नों का जवाब नकारात्मक हो सकता है और अदालत भी वैसा कह सकती है लेकिन यदि मान लें कि दर्जन भर विधानसभाएं ऐसा प्रस्ताव पारित कर देती हैं तो उसके अर्थ क्या होंगे।

उसका पहला अर्थ यह होगा कि शरण देने का यह जो कानून बना है, यह घोर असंतोषजनक और गलत है। दूसरा, यदि कुछ राज्य इसे लागू नहीं करेंगे तो केंद्र क्या कर लेगा? यह कानून ताक पर धरा रह जाएगा। तीसरा, इस गलत कानून की वजह से देश का संघात्मक ढांचा चरमरा सकता है। उसमें सेंध लग सकती है। केंद्रीय कानूनों और संसद की अवहेलना सामान्य-सी बात बन सकती है। यह राष्ट्रीय एकता के लिए खतरनाक संकेत है। केंद्र सरकार ने बैठे-बिठाए यह मुसीबत क्यों मोल ले ली है, समझ में नहीं आता।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

6 comments

  1. In India every thing is possible the that law made by Ambedkar ,support by Congress & Gandhi leakage in every law bypass of every law & that is with respect.Yaar Modi does not do every thing alone in India every Indian should be equly do & support Indian Govt spl. thankfull to Narender Modi who do his best.

  2. संसद द्वारा पारित कानून को राज्य सरकार नहीं रोक सकती यदि ऐसा करती है केरल गवर्नमेंट तो पूरे देश की जनाधार का अपमान कर रही है

  3. ये कोई मामला नहीं है केंद्र सरकार केरल सरकार को बर्खास्त कर सकती हैं इस आधार पर ! फिर इस कानून को राज्यपाल से लागू कर सकती हैं ।

    1. हिम्मत नही है बर्खास्त करने क्योंकि भाजपा के साथ वहाँ का जनाधार और जन समर्थन नहीं है।

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