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ड्रोन हमला गंभीर चेतावनी है!

jammu airforce station attack

यह साफ दिख रहा है कि कोई ताकत है, जिसको भारत-पाकिस्तान के बीच स्थायी शांति बहाली और जम्मू कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू होने से परेशानी है। यह पता लगाना होगा कि इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है? कौन शांति बहाली की प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहता है?

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Drone Attack India : जम्मू में वायु सेना के ठिकाने पर 26-27 जून की दरम्यानी रात को हुए ड्रोन हमले को इसलिए मामूली नहीं माना जा सकता है कि उसमें किसी की मौत नहीं हुई या कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। यह भारत के किसी भी रक्षा प्रतिष्ठान पर हुआ पहला ड्रोन हमला था। इसलिए इसकी गंभीरता को समझना होगा और इसे एक गंभीर चेतावनी के तौर पर लेना होगा। पहले हमले के बाद लगातार दो दिन तक भारतीय सेना के ठिकानों के आसपास ड्रोन मंडराने की घटना एक खास पैटर्न की ओर इशारा कर रही है, जिसकी गंभीरता से जांच करने और सेना को इससे निपटने के लिए तैयार करने की जरूरत है। पहले हमले के बाद 27-28 जून की आधी रात के करीब कालूचक सैन्य ठिकाने के पास और फिर 28-29 जून की रात को सुंजवान सैन्य ठिकाने के आसपास ड्रोन मंडराते हुए दिखे। जब उन्हें मार गिराने के लिए सैनिकों ने फायरिंग की तो वे अंधेरे में गायब हो गए।

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Drone attack jammu kashmir

इस पैटर्न से पहली बात तो यह समझ में आ रही है कि ड्रोन अंधेरे में आते हैं। कम दृश्यता के समय में ड्रोन का भारतीय सैन्य ठिकानों के आसपास मंडराना इस बात का संकेत है कि ड्रोन भेजने वालों को पता है कि भारत के पास इसकी मैनुअल मॉनिटरिंग के अलावा इसे पकड़ने का तकनीकी उपकरण या दक्षता नहीं है। यह भी पता नहीं है कि ड्रोन या यूएवी किस तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है।

यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ड्रोन और अनमैन्ड एरियल व्हिकल यानी यूएवी दो अलग-अलग चीजें हैं। ड्रोन बहुत आसान तकनीक से बन जाता है और सामान्य इंजीनियरिंग समझ वाले लोग भी इसे बना कर उड़ा सकते हैं। इसका सिविलियन इस्तेमाल शुरू हो गया है और कई जगह जरूरी सामानों की डिलीवरी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन यूएवी बिल्कुल अलग चीज है। उसकी तकनीक उन्नत होती है और उसे ऐसे धातु से बनाया जाता है, जिससे वह रडार की पकड़ में आने से बच सकता है। अब सोचें, अगर देश के दुश्मन हमले के लिए यूएवी का इस्तेमाल करते हैं तो खतरा कितने गुना बढ़ सकता है?

Drone Attack India : अमेरिका और चीन दोनों इस किस्म के यूएवी तैयार कर रहे हैं जो बेआवाज होते हैं और कम ऊंचाई पर उड़ते हुए रडार की पकड़ से बाहर रह सकते हैं। तुर्की ने भी इस किस्म के ड्रोन या यूएवी तैयार किए हैं। इसे पकड़ने के लिए उन्नत तकनीक के सर्विलांस उपकरण की जरूरत है, जिनके जरिए 24 घंटे प्रभावी निगरानी की जा सके।

भारत सरकार रक्षा अनुसंधान व विकास विभाग यानी डीआरडीओ को ऐसे सर्विलांस उपकरण तैयार करने के काम में लगाए और जब तक स्वदेशी तकनीक विकसित होती है तब तक बाहर से ऐसे उपकरण मंगाए, जिससे ड्रोन या यूएवी की गतिविधियों को पकड़ा जा सकता है। यह संभव नहीं है कि रात भर सुरक्षा बलों के जवान ड्रोन या यूएवी की तलाश में आसमान को ताकते रहें!

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अफसोस की बात है कि भारत सरकार ने इस मामले में पहले दी गई चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने इस बारे में पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मिल कर इस खतरे के बारे में चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ लगती पंजाब की सीमा के आसपास बड़ी संख्या में ड्रोन उड़ते पाए गए। तभी देश के समूचे रक्षा प्रतिष्ठान को अलर्ट हो जाना चाहिए था। लेकिन तब इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। किसी ने कहा कि नशे के तस्कर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

किसी ने कहा कि सीमा पार से हथियार भेजने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है तो किसी को लगा कि हाई रिजोल्यूशन कैमरे लगा कर ड्रोन के जरिए जासूसी की जा रही है। किसी ने इस पहलू से विचार नहीं किया कि इसके जरिए हमला भी हो सकता है। इसके बावजूद अगर नशीली वस्तु या हथियार भेजे जा रहे थे या जासूसी हो रही थी तो यह क्या कम गंभीर बात है? लेकिन पता नहीं क्यों इसे गंभीरता से नहीं लिया गया! Drone Attack India :

बहरहाल, देर से ही सही लेकिन जम्मू में हमले के बाद अब भारत सरकार और सैन्य प्रतिष्ठानों को इसकी गंभीरता का अहसास हुआ है। अब यह बात समझ में आई है कि ड्रोन या यूएवी का हमला बहुत बड़ा और घातक हो सकता है। पारंपरिक लड़ाई, आतंकवादी हमले या बम विस्फोट के मुकाबले ड्रोन या यूएवी का हमला कम जोखिम और ज्यादा असर वाला हो सकता है। 26-27 जून की दरम्यानी रात को हुआ हमला भी बहुत घातक हो सकता है।

अगर हमलावरों का निशाना नहीं चूकता तो संभव है कि वायु सेना के स्टेशन पर खड़े कुछ विमान क्षतिग्रस्त हो जाते। यानी वह हो जाता, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है। ड्रोन या यूएवी 25 किलो तक सामान लेकर उड़ने की क्षमता वाले होते हैं। सोचें, अगर 25 किलो आरडीएक्स किसी सैन्य ठिकाने पर गिर जाए तो उससे कितना बड़ा नुकसान हो सकता है!

भारत सरकार और रक्षा प्रतिष्ठानों को यह समझना होगा कि देश बरसों से एक छद्म युद्ध की स्थिति में है और चीन-पाकिस्तान जैसे ऐसे पड़ोसियों से घिरा है, जिनका मकसद भारत को चोट पहुंचाना है। इसमें ड्रोन वार एक नया ट्रेंड हो सकता है। जासूसी करने और हथियार या नशीली वस्तु पहुंचाने के बाद अब इसका इस्तेमाल हमले के लिए किया जा सकता है, जो पारंपरिक हमले से ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

ऐसा नहीं है कि इससे सिर्फ सीमावर्ती इलाका ही खतरे में है, सीमा से दूर-दराज के इलाकों में भी इनके जरिए हमला किया जा सकता है। इसलिए इनकी निगरानी और मार गिराने के प्रभावी उपकरणों की तत्काल जरूरत है।

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सुरक्षा और सामरिक पहलू के अलावा जम्मू कश्मीर में लगातार तीन दिन तक ड्रोन की मूवमेंट पकड़े जाने की घटना को राजनीतिक पहलू से भी देखने की जरूरत है। कुछ दिन पहले ही भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच वार्ता हुई और 2003 के युद्धविराम का पालन करने पर सहमति बनी। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जून को जम्मू कश्मीर के नेताओं को सर्वदलीय बैठक के लिए दिल्ली बुलाया था। Drone Attack India :

इसके तुरंत बाद जम्मू कश्मीर में आतकंवादी गतिविधियां बढ़ गईं। एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर के घर में घुस कर उसके सहित पूरे परिवार को मार दिया गया है। लश्कर का एक आतंकवादी विस्फोटक के साथ पकड़ा गया और जम्मू में वायु सेना के स्टेशन पर ड्रोन हमला हुआ। यह महज संयोग नहीं हो सकता है।

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यह साफ दिख रहा है कि कोई ताकत है, जिसको भारत-पाकिस्तान के बीच स्थायी शांति बहाली और जम्मू कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू होने से परेशानी है। यह पता लगाना होगा कि इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है? कौन शांति बहाली की प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहता है? एनआईए के साथ साथ सेना और स्थानीय पुलिस सबको मिल कर और बिल्कुल वस्तुनिष्ठ तरीके से इसकी जांच करनी होगी कि आखिर किस मंशा से इन घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।

साथ ही देश के राजनीतिक नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की घटनाओं से पाकिस्तान के साथ शांति बहाली और राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली का काम नहीं रूके। अगर इसमें किसी किस्म की रूकावट आती है तो उससे भारत विरोधी ताकतों का ही एजेंडा पूरा होगा।

By अजीत द्विवेदी

पत्रकारिता का 25 साल का सफर सिर्फ पढ़ने और लिखने में गुजरा। खबर के हर माध्यम का अनुभव। ‘जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से शुरू करके श्री हरिशंकर व्यास के संसर्ग में उनके हर प्रयोग का साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और अब ‘नया इंडिया’ के साथ। बीच में थोड़े समय ‘दैनिक भास्कर’ में सहायक संपादक और हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ शुरू करने वाली टीम में सहभागी।

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