nayaindia drugs gambling betting हे राम! हिंदू राष्ट्र में नशा और सट्टा!
हरिशंकर व्यास कॉलम | गपशप | बेबाक विचार| नया इंडिया| drugs gambling betting हे राम! हिंदू राष्ट्र में नशा और सट्टा!

हे राम! हिंदू राष्ट्र में नशा और सट्टा!

गजब है। ऐसी बेसुधी! नरेंद्र मोदी सरकार और संघ परिवार की इसे बेजोड़ उपलब्धि ही मानेंगे जो भारत की आर्थिकी नशेडियों, सट्टेबाजों का पैदा कर पांच खरब डालर के लक्ष्य की और बढ़ती हुई है। भारत अपनी 65 प्रतिशत नौजवान आबादी के लिए गली-मौहल्लों में शराब की दुकानों को फैलाता हुआ है। हेरोईन,कोकेन अफीम, गांजा, ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों में भारत आत्मनिर्भर हो गया है! एक पत्रिका दि वीक ने दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले गैर-कानूनी नशीले ड्रग्स में भारत के ‘आत्मनिर्भर’ होने की जानकारी दी तो अपने को सचमुच समझ नहीं आया कि ऐसा चुपचार कैसे हो गया! मगर रपट के अनुसार ड्रग्स का धंधा न केवल भारत के घरेलू बाजार की जरूरत पूरी करते हुए है बल्कि भारत नशीले ड्रग्स निर्यात भी कर रहा है। जाहिर है सब गैर-कानूनी तौर पर।

ऐसा कैसे संभव? क्या अफीम की इतनी ज्यादा गैर-कानूनी खेती होने लग गई? मोटा मोटी पिछले दो-तीन सालों से धरपकड, बरमादगी की जितनी खबरें पढ़ने को मिली है उनका दो टूक अर्थ है कि भारत दुनिया का तेजी से बढ़ता ड्रग्स बाजार है। पंजाब के नौजवानों के ड्रग्स के आदि होने की बाते अब पुरानी है। भारत के सभी राज्यों में तेजी से बढ़ी नौजवान आबादी शराब, ड्रग्स, गांजा आदि की ऐसी आदी बनी है कि दुनिया के ड्रग माफियाओ के लिए भारत बढ़ा बाजार हो गया है। पाकिस्तान की सीमा पार से ड्रोन के जरिए ड्रग्स आने के कयास हो या म्यंमार से उत्तर-पूर्व के जरिए या समुद्री रास्ते, बंदरगाह और हवाई अड्डो से चोड़े-धाडे कंटेनरों, कुरियर सेवा आदि से नशीले पदाथों के आने और उनमें कुछ के पकड़े जाने की तमाम खबरों का अर्थ है भारत में डिमांड सुरसा की तरह बढ़ी है। भारत अब अमेरिका और योरोप की तरह नशीले पदार्थों की खपत, डिमांड का ऐसा बड़ा बाजार हो गया है कि आसियान, अफगानी, पाकिस्तानी, अफ्रीकी नेटवर्क से भारत की और खैप पहुंचाने में भारी मुनाफा बना है। अन्यथा टनों की तादाद में कंटेनर से पाउडर के नाम पर हेरोइन की खैप के बदंरगाह के रास्ते पहुंचने का भला क्या अर्थ?

और नशे में झूमते भारत राष्ट्र का यह भी नया आयाम जो हर सरकार शराब को घर-घर बेचने, होम सप्लाई के तरीके अपना रही है। मैं असंख्य बार धड़ाधड खुलती दुकानों और भीड़ को देख कर हैरान होते हुए सोचता हूं कि इस देश में हो क्या रहा है? इस देश में खालिस, हार्ड एल्कोहल कितना पीया जाने लगा है!  फिल्मों खासकर हिंदी, पंजाबी फिल्मों में बाप-बेटे, घर-परिवार के पूरे साथ बैठ दारू पीने के आम रिवाज से दिमाग में कई बार लगा कि कहीं हिंदू संस्कृति के सोमरस को घर-घर पहुंचवाने का अभियान तो नहीं चला हुआ है? नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत या संघ परिवार के तमाम जयश्री राम वालों को क्या घर-परिवारों में सोमप्रास का ऐसा प्रचलन खटकता नहीं? ये हिंदू परिवारों को इतना तबाह कैसे होने दे रहे है? नोट रखे मुस्लिम परिवारों, उनके मोहल्लों में शायद ही शराब दुकाने खुलती हो या खपत होती हो!

कहते है प्रधानमंत्री मोदी ने एक दफा संघ परिवार के आला लोगों को ज्ञान दिया था कि उन्हे आर्थिकी को पांच ट्रिलियन का बनाना है और ऐसा एयर इंडिया के विनिवेश, अदानी-अंबानियों को खरबपति बनवाएं बिना संभव नहीं है। इसी कसौटी में कहीं सरकार कामधंधों के फैलाव, रोजगार, सरकारों की रेवेन्यू बढ़वाने के एजेंडे में तो कहीं शराब, ड्रग्स और सट्टे बाजार से 140 करोड लोगों की आर्थिकी को चमकाने का रोडमैप बनाए हुए तो नहीं है?

मुझे दो-तीन सप्ताह पुरानी बात है। मुझे एक नौजवान ने ज्ञान दिया कि आपको पता है ऑनलाइन सट्टे में नौजवान लोग कैसे बरबाद हो रहे है। मैं पूरी तरह बेखबर था। उसने अपना नुकासन और आदत बताई तो मालूम हुआ कि मोदी राज में क्रिकेट अब नौजवानों के सट्टे का वैधानिक खेल हो गया है। पूरे देश के नौजवानो को सपना देखों, जुआ खेलों का आदी बनाया जा रहा है। लडकों की सट्टे की आदत बन रही है। एमएम रेडियों, सोशल मीडिया पर इतनी तरह के प्रचार से बहला-फुसला कर बच्चों की ऑनलाइन गेमिंग की आदत बनवाई जा रही है।

तभी सोचे, हम लोग कैसा बेसुध जीवन जीते हुए है!

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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