जरूरी और सामयिक कदम

इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कालेज अब केवल रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए ‘उभरते क्षेत्रों’ में ही में कोर्स शुरू कर सकते हैं। पुराने यानी पारंपरिक क्षेत्रों में ऐसा करने की इजाजत नहीं होगी। इस संबंध में जारी दिशा-निर्देश 2020-21 से शुरू होने जा रहे अकादमिक सेशन से लागू हो जाएंगे। ये कदम जरूरी माना जा रहा था। इंजीनियरिंग शिक्षा और ये क्षेत्र जिस तरह के संकट में फंस गया है, उसके बीच हर साल लाखों नए इंजीनियर तैयार करने का औचित्य अब नहीं रह गया है। इसके साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) फिर ज़ोर दिया है और वो ये है कि जाने-माने सरकारी इंस्टीट्यूट्स जैसे नाम नए कॉलेजों को न दिया जाये। साथ ही इंजीनियरिंग शिक्षा क्षेत्र में मांग से ज्यादा सप्लाई की समस्या पर भी विचार होना जरूरी है। देश में हर साल लगभग आधी सीटें खाली रह जा रही हैं। इसलिए कि इंजीनियरिंग का पेशा अब आकर्षक नहीं रह गया है। जबकि बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कालेज गुजरे दशकों में खोले गए। शायद उतनी संख्या की आवश्यकता नहीं थी। इसीलिए हालिया दिशा-निर्देश में यह साफ कहा गया कि जो इंस्टीट्यूट ज्यादा छात्र लेना चाहते हैं या नए अतिरिक्त कोर्स शुरू करना चाहते हैं, तो उनको इसकी अनुमति केवल ‘उभरते क्षेत्रों’ में दी जाएगी। उभरते क्षेत्र शिक्षा के नए क्षेत्र हैं। एआईसीटीई ने इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस  (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ब्लॉकचेन (बिटकॉयन के पीछे लगने वाली तकनीक), रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा साइंसेज, साइबर सुरक्षा, थ्री डी प्रिंटिंग और डिज़ाइन और ऑगमेंटेड रिएलिटी, वर्चुअल रिएलटी को नए क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है। जानकारों के मुताबिक नवीनतम एआईसीटीई के नियमन शिक्षा का माहौल बनाएगा, जो क्वालिटी शिक्षा को बढ़ावा देगा। मकसद है कि देश की तकनीकी शिक्षा दुनिया में सबसे अच्छी हो जाए। दिशा-निर्देश में इस बात को दोहराया गया है कि नई संस्थाएं अपना नाम ऐसा नहीं रख सकती कि उसका संक्षिप्त नाम आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी (नेश्नल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी) या आईआईएससी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस) हो। ये नियम एआईसीटीई के अनुसार छात्रों को भ्रमित होने से बचायेगा। गौरतलब है कि बड़ी संख्या में कई कोर्सेस में खाली सीटों के मद्देनज़र और आगामी मांग को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकि संस्थाओ को डिप्लोमा, अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लेवल पर इंजीनियरिंग और टेक्नोलोजी क्षेत्र में और सीटों की अनुमति पहले से नहीं दी जा रही है। अब यहां अन्य नियमों को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।

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