महिला अनुभव व पर्यारणविद् पचौरी

एक पुरानी कहावत है कि हर किसी पुरुष की प्रगति में किसी न किसी महिला की अहम भूमिका रहती है। मगर मैं अक्सर चीजों को उल्टे तरीके से देखता हूं। मुझे अपना अनुभव यही बताता है कि किसी पुरुष के प्रगति में किसी महिला की अहम भूमिका रही हो अथवा नहीं मगर उसकी दुर्गति में महिला का हाथ जरुर होता है। हिंदू धर्म के दो महाग्रंथो महाभारत व रामायण इसके जीते जागते उदाहरण है।

अगर द्रौपदी ने महाभारत में कौरवों के लिए अंधे का बेटा अंधा शब्द न कहा होता तो कौरव व पांडवों दोनों को ही इतना दुख झेलते हुए परिवार की बरबादी नहीं देखनी पड़ती। रामायण में अगर सीता सोने का हिरण मारकर लाने की जिद न करती व अपने देवर की बात को मानते हुए लक्ष्मण रेखा पार न करती तो उनका अपहरण न हुआ होता व इतनी बड़ी कथा तैयार न होती।

यह सिलसिला आज भी चला आ रहा है। हम राजनीति में आए दिन इसके उदाहरण देखते रहते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे जाने माने लोध नेता कल्याण सिंह को कुसुम राय की वजह से व गोविंदाचार्य को भाजपा की एक नेत्री की वजह से बहुत बदनामी झेलनी पड़ी थी। फिर ‘मीटू’ अभियान ने जानी मानी हस्तियों की पोल खोलकर रख दी थी।

हाल ही में जाने माने प्रकृति व पर्यावरण विशेषज्ञ राजेंद्र कुमार पचौरी के निधन की खबर पढ़ी तो कुछ साल पहले उन पर लगे यौन शोषण के आरोप याद आ गए जो कि उनके निधन के बाद भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहे।आर के पचौरी एक राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय हस्ती थे जो कि पर्यावरण के लिए अपनी चिंता, जानकारी व कामों के लिए दुनिया भर में जाने जाते थे। उनकी हैसियत का अनुमान तो इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उन्हें 2007 में अमेरिका के उपराष्ट्रपति अल गोरे के साथ नोबेल का साझा पुरस्कार मिला था। भारत सरकार ने भी उन्हें पदमभूषण व पदमविभूषण से नवाजा था। वे पर्यावरण क्षेत्र की एक जानी मानी हस्ती थे।

राजेंद्र कुमार उर्फ आर के पचौरी का जन्म 20 अगस्त 1940 को देहरादून में हुआ था। वे आईपीसीसी इंटरगर्वनमेंटल पेनल आफ क्लाइमेट चेंज (मौसम बदलाव संबंधी अंर्तसरकारी संगठन) के अध्यक्ष थे। उन्हें 2002 में यह पद संभाला था। वे उस पर 2015 तक बने रहे। इस पद पर रहते हुए उनके कामकाज के कारण से उनको नोबल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। वे देश के जाने माने संस्थान टेरी (द एनर्जी एंड रिर्सोसेज इंस्टीटयूट) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक भी रहे।

वे उत्तर प्रदेश के जाने माने प्रतिष्ठित कालेज ला मार्टिनियर में पढ़े। उन्होंने भारतीय रेलवे संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली। रेलवे के स्पेशल अप्रेंटिस के रुप में 1958 में चुने व बाद में वे पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। उन्होंने इंजीनियरिंग में डाक्टरेट किया। पर्यावरण को बहुत करीबी से जानने वाले आर के पचौरी मांसाहार नहीं करते थे। बाद में उन्होंने अमेरिका के कई जाने माने कालेजों में पढ़ाया। वे 1982 में टेरी के निदेशक बने। बाद में संयुक्त राष्ट्र व विश्व मौसम संगठन द्वारा स्थापित पेनल्स के सदस्य बने।

उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने के लिए भारत के 22 राज्यों व दुनिया के 13 देश के लिए कार्यक्रम चलाए। पूरी दुनिया में उनका नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता था मगर वे 18 फरवरी 2015 में विवाद में फंस गए जब उनके संस्था की एक महिला ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवायी। मगर 21 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में अग्रिम जमानत दे दी। टेरो की एक समिति न उनके खिलाफ जांच करके उन्हें यौन शोषण का दोषी पाया।

मगर पचौरी ने उनकी इस रिपोर्ट को प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताते हुए अदालत में चुनौती दी। पचौरी का दावा था कि उनके मुताबिक दोनों के बीच जो कुछ था वह अच्छे संबंधों का परिचायक था। मैंने कभी उस महिला का यौन शोषण नहीं किया। अदालत ने उन्हें 2016 में नियिमत जमानत दे दी। अदालत ने अपना फैसला देते हुए कहा कि जांच पूरी हो चुकी है व एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मगर पूरी जांच के दौरान पुलिस ने उन्हें एक बार भी गिरफ्तार नहीं किया। यह मामला आज भी अदालत में चल रहा है। इस कांड के कारण नोबल पुरस्कार व पदम पुरस्कारों के साथ यौन शोषण का आरोप भी इस वयोवृद्ध व्यक्ति पर चस्पा हो गया और वे 79 साल की आयु में हृदय रोग से पीड़ित होने के कारण एक दागी व्यक्ति होकर दुनिया से चले गए।

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