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पहल तो अच्छी है

Establishment of Global Center

यह एक अच्छी पहल है। दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा के प्रति रूझान बढ़ रहा है। कोरोना महामारी के बाद ऐसे ज्ञान और चिकित्साओं की जरूरत और भी ज्यादा महसूस की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस केंद्र से पुरानी चिकित्सा पद्धति और आधुनिक विज्ञान को साथ आने का मौका मिलेगा। Establishment of Global Center

गुजरात के जामनगर में ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रडिशनल मेडिसिन की स्थापना एक स्वागतयोग्य कदम है। इस केंद्र का उद्देश्य आधुनिक विज्ञान के साथ प्राचीन प्रथाओं को मिलाकर इसकी क्षमता का इस्तेमाल करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डब्लूएचओ के महानिदेशक तेद्रोस अधनोम गेब्रयेसुस की उपस्थिति में पिछले हफ्ते इस केंद्र की आधारशिला रखी। बताया गया है कि यह दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा के लिए पहला आउटपोस्ट केंद्र होगा। यह एक अच्छी पहल है। दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा के प्रति रूझान बढ़ रहा है। चीन अपनी पारंपरिक चिकित्सा को विकसित करने की बड़ी योजना पर काम कर रहा है। कोरोना महामारी के बाद ऐसे ज्ञान और चिकित्साओं की जरूरत और भी ज्यादा महसूस की जा रही है। मोदी ने कहा कि इस केंद्र से पुरानी चिकित्सा पद्धति और आधुनिक विज्ञान को साथ आने का मौका मिलेगा। यह एक बड़ी बात है। पारंपरिक चिकित्सा अगर आधुनिक वैज्ञानिक शोध की कसौटियों पर खरी उतरे, तो उससे आम लोगों को सस्ती और प्रभावी चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सकती है। लेकिन ऐसा करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। साथ ही वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता होगी।

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अगर भारत सरकार ने यह सुनिश्चित किया, तो जिस उद्देश्य से इस केंद्र की परिकल्पना की गई है, वह पूरी हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, तो यह महज पॉलिटिकल मैसेजिंग का जरिया बन कर रह जाएगी। उम्मीद के बीच आशंका भी इसलिए पैदा होती है, क्योंकि हाल में दौर अवैज्ञानिक सोच को बढ़ाने और शिक्षा-अनुसंधान पर खर्च घटाने का रहा है। इसलिए अगर पारंपरिक दवाओं की क्षमता को तकनीकी प्रगति और साक्ष्य आधारित शोध के साथ जोड़ना है, तो यह तरीका बदलना होगा। भारत सरकार ने डब्लूएचओ के संचालन में चलने वाले इस ग्लोबल सेंटर के लिए पांच लक्ष्यों को जारी किया है। उनसमें तकनीक का उपयोग करने वाली पारंपरिक दवाओं के लिए एक डेटाबेस का संकलन शामिल है। पारंपरिक दवाओं के परीक्षण और सर्टिफिकेशन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तैयार करना भी एक लक्ष्य है, ताकि इन दवाओं में विश्वास बढ़े। इस सेंटर को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जहां पारंपरिक दवाओं के वैश्विक विशेषज्ञ एक साथ आएंगे और अनुभव साझा करेंगे। माना जाता है कि दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत आबादी पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग करती है।

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