नीरज बन गया नेता!

जब नीरज शर्मा के फरीदाबाद से जीतकर विधायक बनने की खबर आयी तो अचानक 10 साल पहले की घटना याद हो आई। तब मैं पंडारा रोड पर रहता था। एक शाम नीरज अपने दिवंगत पिताजी हरियाणा सरकार में मंत्री रहे पंडित शिव चरणलाल शर्मा को लेकर हमारे घर आया। चाय पीने के बाद जब वे चलने लगे तो उन्होंने हम पति पत्नी के पास आकर कहा कि इसको समझाओ। यह मुझसे चुनाव लड़ने को कह रहा है। बेटा मुझे डर लगता है कि कहीं यह मेरा बुढ़ापा खराब न कर दे। अगर हार गया तो क्या होगा।

हम लोगों ने उन्हें समझाया कि आपका बेटा बहुत समझदार है। उसकी सलाह मान लीजिए। वे तब कांग्रेस के टिकट की बात करने लगे। हमने उन्हे तब कहां आप लोगों का इलाके में रसूख है तो कांग्रेस का भी टिकट हो जाएगा। पर हम लोगों की तमाम आला नेताओं से दोस्ती होने के बावजूद उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया।

जब मैं आखिरी बार नीरज व उनके साथ अहमद पटेल से मिला तो उनकी ओर से कोई सकारात्मक बात न सुनकर नीरज ने उठते हुए कहा कि भाईसाहब एक बात आप लोग भी गांठ बांध ले कि पापा तो चुनाव लड़ेंगे। आपके चुनाव चिन्ह से नहीं लड़े तो निर्दलीय चुनाव भी लड़ सकते हैं। किसी भी चुनाव चिन्ह की सवारी कर सकते हैं। हम लोग तो अंदर से कांग्रेसी हैं। इसलिए आपका टिकट चाहते थे। टिकट मिल जाएगा तो अच्छे अंतर से जीतेंगे नहीं मिलने से मामूली से जीतेंगे।

मगर कांग्रेस का टिकट नहीं मिला व नीरज के पिताजी निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़े व उन्होंने जीत हासिल की व कांग्रेस का पुराना धुरंधर उम्मीदवार हार गया।

ऐसा ही इस बार भी हुआ। नीरज तो फरीदाबाद (एनआईटी) विधानसभा से जीत गया। मगर फरीदाबाद व गुड़गांव समेत कई लोकसभा क्षेत्रों में जहां सत्तारुढ़ भाजपा जीती वहां कांग्रेस के उम्मीदवार 30-30,000 मतों से हारे थे। जबकि नीरज अपने जिले, पडौसी जिले में कांग्रेस का जीतने वाला अकेला उम्मीदवार है। भूपिंदर सिंह हुड्डा अपने मित्र हैं। फिर भी मेरा मानना है कि कांग्रेस के उम्मीदवारों के उम्मीद से ज्यादा जीतने की वजह भाजपा मुख्यमंत्री का नेतृत्व जिम्मेदार रहा होगा। मुख्य वजह लोगों की राज्य की भाजपा सरकार से बढ़ी नाराजगी थी। हर मुख्यमंत्री अपने सबसे करीबी योग्य व्यक्तियों को मंत्री बनाता है जो कि सरकार के कामकाज के लिए जिम्मेदार होते हैं। मगर इस चुनाव में तो उन्होंने अपने 11 मंत्रियों में से दो के टिकट ही काट दिए जबकि उनके सात मंत्रियों में से महज दो अनिल विज व बलबीर ही चुनाव जीत पाए। बाकी सभी मंत्री चुनाव हार गए। अब अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी इस जीत पर उन्हें बधाई दे रहे हो तो क्या कहा जा सकता है।

नीरज खुद कभी नेता या विधायक बन जाएगा. हमने कभी इसकी कल्पना ही नहीं की थी। एक तो उसकी छोटी उम्र व भोला भाला चेहरा व उससे भी बढ़कर उसकी मासूम हरकतें। मैं जब उसके लाजपत नगर स्थित शोरुम की छत पर भूपिंदर सिंह हुड्डा से मिला तो हैरान रह गया। उसने चुनाव के पहले हुड्डा की प्रेस कान्फ्रेंस रखी थी। यह उसके संबंधों का ही असर था जो देश के हर छोटे बड़े अखबार का दिल्ली स्थित हरियाणा कवर करने वाला संवाददाता वहां पर तब मौजूद था व इस अवसर पर हुड्डा से बात करने का लुत्फ उठा रहा था।

नीरज ने हुड्डा के साथ बातचीत के दौरान कहा कि बाउजी आप तो बस इतना सा काम करिए कि राज में आ जाए तो एक खटारी ही सही मगर सरकारी एंबेसडर कार का रूतबा दिलवा दीजिएगा। हरियाणा भवन में एक कमरा व सरकारी फोन दे दीजिए। फिर अगर आपका हरियाणा में कोई काम रुक जाए तो मुझे कहिएगा। हुड्डा ने मुझसे इंटरव्यू में कहा कि देखो यह तो बिल्कुल बच्चों जैसी बातें करता है।

इस चुनाव में नीरज ने जीत हासिल करके अपना व भाजपा दोनों का ही चरित्र उजागर कर दिया। जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के कारण कुछ विधायकों के समझाने की जरुरत पड़ रही थी तो उसके एक बड़े नेता ने मुझे फोन करके नीरज को साथ आने के लिए मनाने को कहा। वे लोग मनचाही रकम, दोबारा चुनाव लड़ने पर टिकट व मनचाहा मंत्रालय देने को तैयार थे। मगर नीरज ने उसे ठुकरा दिया और आस्था बदलने से इंकार कर दिया। वहीं चाल,चरित्र व चेहरे की दुहाई देने वाली पार्टी ने हरियाणा में महिलाओं के लिए राक्षस माने जाने वाले गोपाल कांडा तक का समर्थन लेने की कोशिश की थी। वह तो जब दुष्यंत चौटाला ने मौके का लाभ उठाते हुए उसकी सरकार में शामिल होने की बात कही तो उन्होंने छाती चौड़ी करके कहना शुरु कर दिया कि हम कांडा का समर्थन नहीं लेंगे।

याद होगा कि हवाई चप्पलें बेचने से एमडीएलआर नामक हवाई कंपनी तक चलाने वाले गोपाल कांडा की एक एयर होस्टस व अधिकारी गीतिका शर्मा ने यह कहते आत्महत्या कर ली थी कि उस पर गलत दबाव डाले जा रहे थे। उसकी आत्महत्या के छह महीने के अंदर ही उस युवती की मां ने भी गोपाल कांडा द्वारा पैदा किए गए हालात से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। हरियाणा में सरकार बनाने को आतुर भाजपा ने उसका दामन तक थामने की कोशिश की थी जिस पर मुकदमे चल रहे हैं। मुझे याद आ गया कि जब वेंकैया नायडू भाजपा के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पार्टी मुख्यालय में नीतीश कटारा हत्याकांड के प्रमुख अभियुक्त के पिता डीपी यादव को पार्टी में शामिल करवाने के लिए उन्हें पत्रकारों के सामने पेश किया था। जब इस पर हंगामा हुआ तो आलोचना को देखते ही भाजपा ने अगले दिन ऐलान किया कि वह ऐसा नहीं करने जा रही है।

चुनाव नतीजों के बाद मैं पुनः किस्मत को मान गया हूं। कहानी है कि जब द्रोपदी मां बनने वाली थी तो वह कुंती के पास आशीर्वाद लेने गई। कुंती ने उससे पूछा कि तुम्हें कैसी औलाद चाहिए। वह धनवान हो गुणवान हो या कुछ और? इस पर द्रौपदी ने कहा कि आप तो बच्चेको भाग्यवान होने का आशीर्वाद दीजिए। जीवन मं् कुछ हासिल करने के लिए भाग्यवान होना जरुरी है। अगर बच्चा भाग्यवान हो तो लूला लंगड़ा होने पर भी राजा बन जाएगा। नीरज ने भी भाग्य के इस खेल को बहुत करीब से देखा है। विस्तार फिर कभी। फिलहाल नेता बने नीरज को सलाह है कि वह भाग्य और अपनी मेहनत में विश्वास रखे। नेता तो वह बन ही गया है। एक दिन मंत्री भी बनेगा। फिलहाल तो नीरज बन गया नेता।

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