इसमें जांच की क्या बात?


महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि राज्य का खुफिया विभाग कुछ हस्तियों पर किसान आंदोलन को लेकर ट्वीट करने का दबाव डाले जाने के आरोपों के संबंध में जांच करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कांग्रेस नेताओं की ओर से इस मुद्दे की जांच करने के आग्रह आए हैं। ऐसा सामने आया है कि कुछ सेलेब्रिटीज़ की ओर से एक ही पोस्ट एक ही वक्त पर आए हैं। ऐसे में इसकी जांच होगी कि ऐसा क्यों हुआ है। वैसे गौर करें तो इसमें जांच की कोई बात नहीं है। सबको मालूम है कि भारतीय सेलेब्रेटीज ने एक जैसे ट्विट क्यों किए। ट्विट का यह खेल कैसे संचालित होता है, यह भी सबको मालूम है। लेकिन तथ्य यह है कि ट्विट करने वाले लोग बालिग हैं और उन्हें मालूम है कि वे क्या कर रहे हैं। अब वे ऐसा भय के कारण करते हों या स्वार्थ में, यह दीगर सवाल है।

लेकिन यह किसी आपराधिक जांच का विषय नहीं हो सकता। देश में आज ऐसे हालात हैं कि इसके बीच वैचारिक ध्रुवीकरण और भय का माहौल दोनों एक दूसरे से जुड़े पहलू हो गए हैं। इसके बीच अगर यह सिद्ध भी हो जाए कि सभी सेलेब्रेटीज ने किसी के कहने पर ट्विट किए तो उससे क्या हासिल हो जाएगा? गौरतलब है कि हाल में पॉप स्टार रिहाना के किसान आंदोलन के समर्थन में ट्विट करने के बाद भारत के फिल्म और खेल जगत की शख्सियतों की ओर इस आंदोलन को लेकर ट्वीट किए थे। उधर अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने रिहाना के समर्थन में लगातार ट्विट किए हैं। भारत सरकार ने इस पर कहा था कि ऐसे मुद्दों पर टिप्पणियां करने से पहले, तथ्यों की पुष्टि की जानी चाहिए और मुद्दे को अच्छे से समझा जाना चाहिए। भारत सरकार ने उन ट्विट्स को सोशल मीडिया हैशटैग्स और कमेंट्स की सनसनी का लालच बताया था। मगर एक जैसे देसी ट्विट्स पर सरकार की प्रतिक्रिया दोस्ताना रही है। इसी संदर्भ में महाराष्ट्र के गृहमंत्री के साथ बैठक के दौरान महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने किसान आंदोलन को लेकर कुछ हस्तियों के ट्वीट का भाजपा से कथित तौर पर संबंधित होने का आरोप लगाया था। मगर इसकी जांच कराना एक समस्याग्रस्त नजरिया है। इससे बचा जाए, यही बेहतर होगा।


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