जंगल में फैलती आग - Naya India
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जंगल में फैलती आग

इन दिनों उत्तराखंड के नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, देहरादून और पौड़ी समेत के कई जिलों में जंगल जल रहे हैं। चूंकि अब राजनीति और मीडिया में जन हित और पर्यावरण जैसे अहम पक्षों से जुड़े मुद्दों की अहमियत नहीं बची, इसलिए इसकी शायद ही कहीं वैसी चर्चा है, जैसी होनी चाहिए। खुद राज्य सरकार के मुताबिक एक अप्रैल से 11 अप्रैल के बीच राज्य के जंगलों में 847 जगह आग लगी है। उससे 1,248 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जंगल प्रभावित हुआ है। इसमें से करीब दो-तिहाई क्षेत्रफल रिजर्व फॉरेस्ट हैं, जो काफी समृद्ध माने जाते हैं। आग से कई पशुओं की मौत हो गई है। कुछ रिहायशी इलाकों में तक भी ये आग फैल चुकी है। आग को बुझाने के लिए राज्य सरकार ने वायु सेना के दो हेलीकॉप्टरों की मदद ली, लेकिन उससे कुछ खास हासिल नहीं हुआ। तो अब सब कुछ भगवान भरोसे है। यानी इस भरोसे कि बरसात हो तो आग बुझे।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (फर्म्स) की सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के मुताबिक सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य जंगलों में भी आग लगी हुई है। पूरी हिमालयी पट्टी पर पश्चिम से पूर्व तक आग के संकेत मिले हैं। वैसे हिमालयी क्षेत्र में भी आग कोई नई घटना नहीं है। अब अब चिंता की बात यह है कि ऐसा होने में पहले की तुलना में काफी इजाफा हो गया है। अब फरवरी से जंगलों में आग की घटनाएं शुरू हो जाती है। इसलिए इसके बुझने के लिए मॉनसून का इंतजार लंबा पड़ता है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड के जंगलों में पिछले छह महीनों से जंगलों में आग धधक रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है। यह साफ है कि जंगलों में लगने वाली अधिकांश आग मानवजनित है। लगातार घटते फॉरेस्ट गार्ड्स और संसाधनों की कमी के कारण साधारण आग भी विकराल रूप ले लेती है। ये हकीकत है कि वन विभाग में अफसर बहुत हैं, लेकिन जमीन पर मॉनिटरिंग और जंगलों की सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट गार्ड नहीं हैं। अब भड़की आग के बाद उत्तराखंड हाइ कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह फॉरेस्ट गार्ड्स के 60 फीसदी खाली पड़े पदों को अगले 6 महीने में भरे। इससे जाहिर है कि आग फैलने का कारण क्या है और उसके लिए जिम्मेदार कौन है?

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