यूपी में फिर वही कहानी

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में आंगनवाड़ी महिला कार्यकर्ता के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले में एक बार फिर पुलिस की लापरवाही और पीड़िता के परिजनों के साथ निष्ठुरता की कहानी दोहराई गई है। हालांकि मुख्य अभियुक्त और मंदिर के पुजारी को गिरफ्तार कर लिया गया, लकिन उसमें इतनी देर लगाई गई कि पुलिस के नजरिए को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए। साथ ही इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि बदायूं जिले के उघैती थाना क्षेत्र के मेवली गांव में मंदिर गई 50 वर्षीय एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। महिला के परिजनों ने मंदिर के पुजारी सत्यनारायण और उनके दो साथियों पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया। बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। लापरवाही के आरोप में उघैती थाने के थानाध्यक्ष निलंबित करना पड़ा। लेकिन उसके बावजूद कई सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब नहीं मिला है।

महिला के परिजनों के मुताबिक मंदिर का पुजारी सत्यनारायण बीते रविवार रात करीब बारह बजे उनके घर पर आया और लहूलुहान अवस्था में महिला को छोड़ गया। महिला शाम पांच बजे मंदिर गई थी। पुजारी ने बताया कि महिला कुंए में गिर गई थी। अगले दिन परिजन उघैती थाने पर पहुंचे, तो उनकी शिकायत को पुलिस ने कोई तवज्जो नहीं दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही उसने एफआईआर लिखी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से महिला के साथ हुए गैंगरेप की बात सामने आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि महिला की द जघन्य तरीके से उसकी हत्या की गई है। उसका एक पैर भी टूटा हुआ था। तो उचित ही है कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं। परिजनों का कहना है कि थानेदार ने उनकी कोई बात नहीं सुनी और पोस्टमॉर्टम होने तक मौके का मुआयना तक नहीं किया। इसकी वजह से मुख्य अभियुक्त मंदिर का पुजारी दो दिन तक गांव में ही रहा और बाद में फरार हो गया। फिर यह भी कि पुजारी सत्यनारायण चार दिन तक गांव में ही छिपा रहा, लेकिन पुलिस उसे तलाश तक नहीं पाई। क्या ऐसा अनजाने में हुआ? या एक बार फिर वही कहानी दोहराई गई है, जो अब उत्तर प्रदेश में बलात्कार की हर वीभत्स घटना में देखने को मिलने लगी है?

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