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पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख पर रहेगी नजर

जब से पत्रकारिता शुरू की तब से ही पाकिस्तान के बारे में पढ़ते आए थे कि पाकिस्तान को तीन ‘ए’ चलाते हैं। यह है अल्लाह (खुदा), आर्मी (सेना) व अमेरिका। ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान के अमेरिका से संबंध खराब हो गए। पाकिस्तान में सेना की बहुत अहम भूमिका रही है। वहां अनेक बार सेना ने चुनी हुई सरकारों का तख्तापलट कर सत्ता संभाली है। वैसे भी वहां की विदेश नीति सेना ही तय करती आई है, जो कि आमतौर पर भारत विरोधी होती है। जब वहां सेना की कमान कोई नया व्यक्ति संभालने वाला होता है तो पूरे देश की नजर इस पर टिक जाती है कि उसके आने के बाद पाकिस्तान व भारत के संबंध कैसे होंगे? हालांकि मेरा मानना है कि इस देश की सत्ता पर काबिज लोगों को अपने भारत विरोध रवैए के कारण ही सत्ता मिलती है।

काफी कशमकश के बाद यह तय हो गया है कि पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर होंगे, जो कि वहां की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख थे। वहां के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने उनकी नियुक्ति का ऐलान कर दिया है। वे वहां की सबसे कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ ही वहां के मिलिट्री इंटेलीजेंस प्रमुख भी रह चुके हैं। हालांकि उन्होंने आईएसआई के प्रमुख रहते बहुत कम समय ही बिताया। उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की नाराजगी के कारण महज आठ माह के अंदर ही पद से हटा कर लेफ्टिनेंट जनरल फैज अहमद को आईएसआई का प्रमुख बना दिया गया। मुनीर ने पुलवामा आतंकी हमले की साजिश की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य व जानी मानी कैबिनेट सेक्रेटरी पोस्ट से रिटायर हुए तिलक देवशेर के मुताबिक मुनीर के आईएसआई का निदेशक रहने के दौरान ही पाकिस्तान ने फरवरी 2019 में कुख्यात पुलवामा का आतंकी हमला किया था। वे पाकिस्तान की कश्मीरी नीति को तैयार करने वाले आला अफसरों में से रहे हैं व मौजूदा जनरल कमर जावेद बाजवा के 29 नवंबर को रिटायर होने के बाद उनकी जगह ली है।

जनरल बाजवा को दो बार तीन-तीन साल का अतिरिक्त समय देकर इस पद पर बनाए रखा गया। दूसरी बार उन्हें इमरान खान सरकार ने तीन साल का और कार्यकाल दिया। पाकिस्तान के राष्ट्रपति अल्वी पाकिस्तानी राजनीतिक दल तहरीके इंसाफ से संबंध रखते हैं जो कि इमरान खान की पार्टी है। वह पद संभालने के पहले लाहौर में होने वाली पार्टी सभा में हिस्सा लेने के लिए भी गए थे। मुनीर के साथ साथ लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को ज्वाइंट जनरल चीफ स्टाफ कमेटी का प्रमुख बना दिया गया है। यह देश का दूसरा सबसे अहम पद है। यह नियुक्तियां उस समय की गईं, जबकि इमरान खान व सेना प्रमुख बाजवा के बीच चला आ रहा टकराव जगजाहिर हो उठा था। अप्रैल माह में इमरान खान ने सेना पर उन्हें पद से हटाने का षडयंत्र रचने के आरोप लगाए थे। याद रहे कि उन्हें अविश्वास मत के जरिए सत्ता से हटाया गया। नए सेना प्रमुख के बारे में इमरान खान के करीबी पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि उनकी हरकतें देखने के बाद ही वे उनके बारे में अपनी राय व्यक्त करेंगे। पिछले छह महीने में पाकिस्तान सेना की भूमिका बहुत शोचनीय रही है। ध्यान दिला दें कि सत्ता से दूर हुए इमरान खान व मुनीर के संबंध बहुत खराब हो गए थे।

उन्हें प्रमोशन के बावजूद सरकार ने सितंबर 2018 में चार सितारे वाले जनरल का पद नहीं ग्रहण करने दिया। इमरान खान उन्हें इस पद पर नियुक्त किए जाने के खिलाफ थे। वे यह नहीं चाहते थे कि नया सेना प्रमुख सरकार की पसंद का हो। जो कि सरकार का समर्थन कर सके। उन्हें सबसे बड़ा खतरा यह था कि सत्ता से हटने के बाद उन पर भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है। इससे उनकी छवि खराब हो रही है। मुनीर उन्हें नापसंद करते हैं व उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। ध्यान दिला दें कि जब आईएसआई का प्रमुख रहते हुए मुनीर ने इमरान खान की पत्नी व प्रथम महिला के भ्रष्टाचारों का खुलासा किया था। इमरान ने उनसे नाराज होकर उन्हें पद से हटा दिया। मुनीर को अब देखना यह है कि उन्हें इस पद पर लाने वाली नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग के प्रति उनका क्या व्यवहार रहता है। बताते हैं कि पाकिस्तानी सेना यह नहीं चाहती है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग अगले चुनाव में बहुत ज्यादा मजबूत होकर उभरे। वैसे माना जा रहा है कि उन्हें इस पद पर लाकर नवाज शरीफ ने इमरान खान के खिलाफ एक नया दुश्मन खड़ा कर दिया है। मुनीर के अपना पद संभालने माना जा रहा है कि सेना की मदद से इमरान खान को निपटाने में शरीफ को मदद मिलेगी। यह माना जाता है कि पाकिस्तान में सरकार का रिमोट कंट्रोल सेना के हाथ में होता है। छह लाख सैनिकों वाली पाकिस्तानी सेना दुनिया में छठी सबसे बड़ी सेना है जिसके पास परमाणु हथियार भी हैं। कुछ समय पहले ही कमर जावेद बाजवा ने कहा था वहां की सेना राजनीतिक दखलदाजी देती आई है पर अब सेना राजनीतिक दखलंदाजी नहीं करेगी। वैसे बता दे कि मुनीर को यह पद सौंपने के पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लंदन जाकर अपने बड़े भाई नवाज शरीफ से सलाह मशविरा कर लिया था। याद दिला दें कि देश में जल्दी आम चुनाव करवाने की मांग से लेकर इमरान खान की पार्टी इस्लामाबाद तक की पदयात्रा कर रही है।

इमरान खान प्रधानमंत्री पर अपनी हत्या की साजिश रचने का अरोप लगा चुके हैं। पाकिस्तान में आजादी के बाद के 75 वर्षों में लगभग आधा समय वहां की सेना ने ही देश पर राज किया। इमरान खान को चुनाव में जिताकर सत्ता में लाने के पीछे सेना का ही हाथ था। पहले वे आसिफ जरदारी व नवाज शरीफ पर ऐसे व्यक्ति को सेना प्रमुख बनाने का आरोप लगा रहे थे जो कि उनके भ्रष्टाचार व अपराधों पर परदा डाल सके पर कुछ समय से उनका रूख बदल गया है। अब वे कहने लगे हैं कि सरकार, जिसको चाहती हैं उसे यह पद दे मुझे इससे क्या लेना देना। वहीं बाजवा कहने लगे हैं कि पूर्वी पाकिस्तान में देश को सेना के कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक खामियों के कारण हार मिली थी। नए सेना प्रमुख मुनीर को अपने गुरु बाजवा को भी बचाना होगा क्योंकि हाल ही में एक पाकिस्तानी चैनल ने उन पर छह साल के दौरा 22.9 अरब की संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया है। आसिम मुनीर इस पद पर पहुंचने के पहले भारत पर नजर रखने वाले उत्तरी क्षेत्र के कोर कमांडर रहे हैं। बाजवा के इस पद पर छह साल तक रहते हुए पाक सेना की इमेज खराब हो चुकी है।

अब तो उनके द्वारा पैसा बटोरने की बातें छपने तक लगी हैं। उन्होंने खुद राजनीति में टांग अड़ाते रहने की बात स्वीकार की। जिस सेना को प्रधानमंत्री का बचाव करना हो उसके निष्पक्ष रहने की कल्पना भी करना बेकार है। मुनीर पाकिस्तान के राजनीतिक दलों से कैसे संबंध स्थापित रखते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। सेना के एक वर्ग पर इमरान खान का काफी असर है। उन्होंने पाकिस्तान में तहरीके तालिबान द्वारा चलाई जाने वाली आतंकवादी गतिविधियों पर भी नजर रखना है। बलोचिस्तान व खैबरपख्तूनवा में आतंकवादी घटनाएं पहले से ही काफी ज्यादा हो रही हैं। तालिबान की अफगानिस्तान में जीत में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका जरूर रही हो पर सीमा विवाद से लेकर दोनों देशों का आपसी विवाद भी जारी है। सबसे अहम सवाल तो उन्हें अमेरिका के साथ अपने संबंध सुधारने का हो गया है जो कि बाजवा अपने पद से हटने के पहले कुछ समय तक सुधारने में सफल रहे। ऐसे में वे भारत के साथ कैसे संबंध कायम रखते हैं। हमारी इस पर नजर लगी रहेगी।

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