germany post merkel coalition जर्मनी की नई दिशा
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जर्मनी की नई दिशा

समझौते में ऐसे कई प्रगतिवादी कदम हैं जिनके बारे में सीडीयू की सरकार में सोचा भी नहीं जा सकता था। मसलन, शौकिया इस्तेमाल के लिए कैनेबिस (भांग) की बिक्री को कानूनी मान्यता दी जाएगी, मतदान की उम्र 16 साल की जाएगी, और गर्भपात को सीमित करने वाले अनुच्छेद को रद्द कर दिया जाएगा।

आखिरकार जर्मनी में नई सरकार की सूरत उभर गई है। वहां बीते सितंबर में ही चुनाव हुआ था। लेकिन किसी पार्टी को बहुमत ना मिलने के कारण सत्ता के बंटवारे को लेकर तीन पार्टियों में बातचीत चल रही थी। अब तीनों पार्टियों ने नई सरकार का खाका तैयार कर लिया है। बातचीत इसलिए फंसी हुई थी, क्योंकि इस गठबंधन में एक तरफ पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी है, तो दूसरी तरफ मुक्त बाजार की समर्थक फ्री डेमोक्रेट्स (एफडीपी) भी इसका हिस्सा हैं। ये बात ध्यान खींचने वाली है कि लंबी वार्ता के दौरान आखिरकार ग्रीन पार्टी गठबंधन को जर्मनी के कोयला उद्योग को 2030 तक खत्म करने के लक्ष्य पर राजी कर लिया। बदले में एफडीपी को सरकार का दूसरा सबसे शक्तिशाली पद मिल गया। पार्टी के नेता क्रिस्चन लिंडनर देश के अगले वित्त मंत्री होंगे। ग्रीन पार्टी के सह-नेता रोबर्ट हाबेक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मंत्रालय संभालेंगे, जिसमें अब जलवायु को भी शामिल किया जाएगा। ग्रीन पार्टी की कुछ और मांगें भी समझौते में दिख रही हैं। नई सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक देश की ऊर्जा सप्लाई का 80 प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा स्रोतों से आएगा।

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लेकिन पर्यावरणवादी समूह इस लक्ष्य से खुश नहीं  हैं। उन्होंने निकट भविष्य में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के ठोस कदमों के गठबंधन के कार्यक्रम से गायब होने की आलोचना की है। उधर एफडीपी को भी कई मोर्चों पर जीत मिली है। 2023 में जर्मनी फिर से “ऋण ब्रेक” लगाएगा। यानी और ज्यादा ऋण लेने पर रोक लगाने वाली प्रक्रिया को लागू करेगा। इसे कोविड-19 के असर से निपटने के लिए हटा लिया गया था। इसके अलावा नए समझौते में किसी तरह के टैक्स को बढ़ाने का भी कोई जिक्र नहीं है। हालांकि आगे जाकर भी टैक्स नहीं बढ़ेगा, इसका वादा भी नहीं है। बहरहाल, इस बात के भी कई सबूत दिखाई दे रहे हैं कि पिछले 16 सालों से शासन करने वाली चांसलर अंगेला मैर्केल की पार्टी सीडीयू के रूढ़िवादी प्रभाव से देश को बाहर निकालने पर तीन पार्टियां सहमत हैँ। समझौते में ऐसे कई प्रगतिवादी कदम हैं जिनके बारे में सीडीयू की सरकार में सोचा भी नहीं जा सकता था। मसलन, शौकिया इस्तेमाल के लिए कैनेबिस (भांग) की बिक्री को कानूनी मान्यता दी जाएगी, मतदान को 16 साल की उम्र से ही कानूनी मान्यता दे दी जाएगी, और गर्भपात को सीमित करने वाले अनुच्छेद 219-ए को रद्द कर दिया जाएगा।

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