समस्या देशों के अंदर है - Naya India global minimum tax
बेबाक विचार | लेख स्तम्भ | संपादकीय| नया इंडिया| %%title%% %%page%% %%sep%% %%sitename%% global minimum tax

समस्या देशों के अंदर है

global minimum tax scheme

जब तक ये व्यवस्था नहीं बदलती, इस समस्या का हल वैश्विक स्तर पर ढूंढना महज उन संसाधन को वापस धनी देशों में लाने का प्रयास भर है, जो अभी आयरलैंड या लक्जमबर्ग या बारबेडोस जैसे देशों को इसलिए मिल जाते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने यहां टैक्स दरें कम कर रखी हैँ।

global minimum tax scheme

global minimum tax : ये खबर ऊपर से आकर्षक लग सकती है कि अमेरिका की पहल पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले 130 देश वैश्विक न्यूनतम कर (ग्लोबल मिनिमम टैक्स) के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं। ये देश दुनिया की अर्थव्यवस्था के 90 फीसदी हिस्से की नुमाइंदगी करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर ये टैक्स व्यवस्था लागू हो भी गई, तो क्या उससे पूरी दुनिया में प्रगतिशील टैक्स ढांचा लागू हो जाएगा? प्रगतिशील टैक्स ढांचे का मतलब यह होता है कि जिसकी जितनी अधिक आमदनी है, उससे उतना अधिक टैक्स लिया जाए।

दूध पीना और महंगा! Mother Dairy ने भी बढ़ाए दूध के दाम, कल से 2 रुपए देने होंगे ज्यादा

अभी हाल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे यह बताते हैं कि विकसित देशों ने अपने यहां ऐसा टैक्स ढांचा अपना रखा है, जिससे सबसे धनी लोग सबसे कम और आम मध्यवर्गीय लोग अपनी आमदनी के अनुपात में सबसे ज्यादा टैक्स चुकाते हैँ। जब तक ये व्यवस्था नहीं बदलती, इस समस्या का हल वैश्विक स्तर पर ढूंढना महज उन संसाधन को वापस धनी देशों में लाने का प्रयास भर है, जो अभी आयरलैंड या लक्जमबर्ग या बारबेडोस जैसे देशों को इसलिए मिल जाते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने यहां टैक्स दरें कम कर रखी हैँ।

मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर आपराधिक मामले : ADR की रिपोर्ट

गौरतलब है कि ग्लोबल मिनिमम टैक्स का प्रस्ताव अमेरिका की पहल पर आया है। हाल में हुई जी-7 देशों की शिखर बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। उसके बाद धनी देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के मंच पर इस बारे में बातचीत आगे बढ़ी। खबरों के मुताबिक अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन ने इस पर सहमति बनाने के लिए अपने पूरे प्रभाव का इस्तेमाल किया है। इस प्रस्ताव के तहत दुनिया की 100 सबसे बड़ी कंपनियों को हर साल अपनी आमदनी का 15 फीसदी कॉरपोरेशन टैक्स के रूप में देना होगा, चाहे उन्होंने अपने दफ्तर कहीं भी रजिस्टर करा रखे हों। global minimum tax

ये भी गौरतलब है कि सबसे पहले तय ग्लोबल टैक्स रेट का प्रस्ताव यूरोप में गूगल, अमेजन, फेसबुक आदि जैसी कंपनियों के सिलसिले में आया था। लेकिन बाद में अमेरिका की पहल पर दूसरी क्षेत्र की कंपनियों को भी इस प्रस्ताव के तहत लाने पर धनी देशों के बीच सहमति बन गई। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका ने अपनी टेक कंपनियों को बचाने के लिए सभी देशों की सभी कंपनियों ने नई व्यवस्था के दायरे में लाने की चाल चली। इसमें वह कामयाब रहा दिखता है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *