राजकोष पर बढ़ता दबाव

राजकोष की हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है। हर दिन आने वाले आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर के लिए विशेष उपहार का एलान करते हुए खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बताया था कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए कॉरपोरेट कर दरों में कमी के चलते 1,45,000 करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने के आसार हैं। यह बात अब सरकार ने संसद में भी दोहराई है। इसके साथ प्रत्यक्ष और परोक्ष करों की वसूली में हो रही गिरावट पर नजर डालें, तो हालात की गंभीरता का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। मगर सरकार को अनुमान है कि उसके उपाय जल्द ही कारगर होंगे। लोकसभा में सरकार ने दावा किया कि कॉरपोरेट कर में कटौती के जरिए दिए गए प्रोत्साहनों से अर्थव्यवस्था में जल्द प्रभाव होने का अनुमान है।

भारत में नए निवेश से न केवल नई नौकरियां सृजित होने का अनुमान है, बल्कि इससे आय में भी बढ़ोतरी होगी और नतीजतन मध्यम से दीर्घकाल में कर उगाही में वृद्धि होगी। दावा किया गया है कि कहा कि राजस्व संग्रह में तेजी लाने के लिए कर जाल का विस्तार करने और इसे व्यापक बनाने के लिए विभिन्न उपाए भी किए जा रहे हैं। साथ ही कॉरपोरेट कर दरों को कम किए जाने से नया निवेश आकर्षित होगा, नौकरियां सृजित होंगी और समग्र आर्थिक विकास बढ़ेगा। गौरतलब है कि 20 सितंबर 2019 को केंद्र ने अध्यादेश लाकर कॉरपोरेट कर में छूट का एलान किया था। उसको लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम- 2019 को इस हफ्ते लोकसभा में पेश किया। यह अधिनियम कॉरपोरेट कर छूट को लेकर जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा। कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए घोषित टैक्स छूट के बाद घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की दर कम होकर 22 प्रतिशत पर आ गई थी। हालांकि इसके लिए शर्त थी कि वे किसी अन्य प्रोत्साहन का लाभ नहीं लेंगे। एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित नई घरेलू विनिर्माण कंपनी के लिए कर की दर को घटाकर 15 प्रतिशत किया गया था। इसके अलावा जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुन:खरीद की घोषणा की है, उन्हें भी किसी प्रकार का कर नहीं देना होगा। हाल में आए सरकारी आंकड़ों से संकेत मिला है कि टैक्स छूट के अलावा अन्य कारणों से भी कर वसूली में कमी आई है। इन कारणों में आर्थिक सुस्ती शामिल है। यानी राजकोष दबाव में है।

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