नाकामी की ओर ‘सक्सेस स्टोरी’

टेलीकॉम को भारत की सक्सेस स्टोरी यानी सफलता की बड़ी कहानी बताया जाता रहा है। लेकिन अब ये क्षेत्र इतना संकटग्रस्त है कि ये कहानी अब नाकामी की कथा बन सकती है। दो बड़ी कंपनियां मुसीबत में हैं। और अनुमान लगाया जा रहा है कि फाइव जी सेवा आने पर जियो का इस क्षेत्र में पूरा एकाधिकार बन सकता है। ध्यानार्थ है कि वोडाफोन आइडिया को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बड़ा नुकसान हुआ है। दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में 50,921 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इस कंपनी के ऊपर हजारों करोड़ का बकाया है और उसने अपनी दूसरी तिमाही में इस देनदारी को जोड़ दिया। इसलिए ये घाटा विशाल नजर आने लगा। समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया था, जिसके बाद कंपनी को इतना बड़ा नुकसान दिखने लगा।

दरअसल वोडाफोन आइडिया, एयरटेल समेत अन्य कुछ टेलीकॉम कंपनियों पर सरकार की कुल 1.4 लाख करोड़ रुपये की पुरानी देनदारी बन रही है। वोडाफोन आइडिया ने देनदारियों के लिए खर्च के प्रावधान को जोड़ा है, जिसकी वजह से उसे करीब 50,921 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वोडाफोन आइडिया को जितना नुकसान दूसरी तिमाही में हुआ है, उतना किसी भी कंपनी को अब तक नहीं हुआ। दूरसंचार कंपनी एयरटेल ने भी चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घाटा दर्ज किया है। एयरटेल पर भी सरकार के प्रति देनदारी है। अगर दोनों कंपनियों के घाटे को जोड़ दें, तो यह करीब 74,000 करोड़ रुपये बनता है। असल में एजीआर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने कंपनियों की वित्तीय हालत खराब कर दी है। कंपनियों पर स्पेक्ट्रैम के इस्तेमाल, टेलीकॉम लाइसेंस फीस, जुर्माना और ब्याज मिलाकर करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये सरकार की देनदारी है। कंपनियों का कहना है कि केंद्र उन्हें थोड़ी राहत दे, तो उनके लिए कारोबार करना आसान हो जाएगा। वोडाफोन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी निक रीड ने पिछले दिनों भारत में कारोबार को लेकर अनिश्चितता की बात कही थी। लेकिन सरकार की नाराजगी के बाद उन्होंने सफाई दी कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। एक अनुमान के मुताबिक वोडाफोन आइडिया का ग्राहकों के हिसाब से बाजार में हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। जब ये कंपनी संकट में हो, इस क्षेत्र में बनते हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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